बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों की नकदी में असमता होगी दूर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 23, 2018 02:35 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

बैंकों की नकदी में असमता होगी दूर

अनूप रॉय / मुंबई 10 02, 2018

बढ़ी उम्मीद 

360 अरब के बॉन्ड खरीदने की पेशकश और एलसीआर में ढील से बढ़ी उम्मीदें
सितंबर महीने में खुलकर नजर आया नकदी का असंतुलन
सरकारी बैंकों के जमा में सस्ते कर्ज का अनुपात रहता है ज्यादा, देते हैं एक दिनी कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बाजार से 360 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने की पेशकश करने और तरलता कवरेज अनुपात (एलसीआर) में ढील देकर 2 लाख करोड़ रुपये डालने से भारतीय बैंकों की नकदी प्रोफाइल की असमता हल होने की उम्मीद है।

सामान्यतया नकदी का असंतुलन दिखता नहीं हैं। लेकिन सितंबर के पिछले सप्ताह में यह उस समय नजर आया जब बैंकों के एक समूह को नकदी की कमी खुलकर सामने आई और उन्होंने भारी मात्रा में रिजर्व बैंक से उधारी ली, जो उन्होंने रिजर्व बैंक में रखा था। 

विशेषज्ञों के मुताबिक बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की स्थिति बड़े बैंकों के पक्ष में रही है। खासकर यह बड़े सरकारी बैंकों के पक्ष में है, जो एक दिन के लिए कर्ज देते हैं। इन बैंकों के पास भारी मात्रा में जमा होती है। अगर हम भारतीय स्टेट बैंक का मामला लें तो इसके पास कम लागत वाले चालू और बचत खाते का जमा बड़ा जमा आधार है, जो उसके कुल जमा का आधा है। बैंक चालू खाते पर ब्याज का भुगतान नहीं करते हैं, वहीं बचत खाते पर 4 प्रतिशत मामूली ब्याज देते हैं।  

छोटे बैंक, खासकर निजी क्षेत्र के बैंक खुदरा कर्ज देने को लेकर आक्रामक हैं। बहरहाल जब जमा आकर्षित करने की बात आती है तो वे घाटे में रहते हैं क्योंकि सरकारी मालिकाना वाली इकाइयों को सरकार का समर्थन होता है और इससे यह गारंटी मिलती है कि इन बैंकोंं में जमा धन सुरक्षित रहेगा। जमा बीमा योजना के साथ बेल-इन नियम लाने की कवायदों का भी कोई खास असर नहीं है। 

इसकी वजह से नकदी को लेकर असमानता पैदा होती है। सरकारी बैंक एक दिन के कर्जदाता बनकर उभरते हैं, वहीं निजी क्षेत्र की इकाइयां इस तरह का कर्ज लेती हैं। नकदी प्रोफाइल में यह असमता पूरे सितंबर में बनी रही। एक तरफ बैंकिंग क्षेत्र ने रीपो विंडो के माध्यम से भारी मात्रा में उधारी ली, वहीं रिजर्व बैंक में बड़ी मात्रा में अतिरिक्त नकदी राशि जमा की गई।

इसका असर यह नजर आता है कि बैंकिंग व्यस्था में पर्याप्त नकदी थी। यह तर्क समग्र व्यवस्था के हिसाब से सही हो सकता है, लेकिन हकीकत में स्थिति यह है कि एक तरफ तो बैंकों का एक समूह नकदी की कमी से जूझ रहा है, वहीं एक समूह के पास पर्याप्त नकदी मौजूद है।

यह विरोधाभास सितंबर महीने में खुलकर सामने आया। तिमाही और साल की एक छमाही के अंत में अग्रिम कर प्रवाह और वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े भुगतान की वजह से बैंकिंग व्यवस्था में नकदी पर दबाव रहा। 

माह के आखिरी कार्यदिवस 29 सितंबर को बैंकिंग व्यवस्था ने रिजर्व बैंक से 1.83 लाख करोड़ रुपये नकदी उधार में ली। लेकिन इसी दैरान व्यवस्था मेंं 1.65 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त नकदी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस संदर्भ में शुद्ध आंकड़े संभवत: सही न हों।

मुद्रा बाजार में 1 अक्टूबर के नकदी के आंकड़े, जो एक दिन बाद आते हैं, 3 अक्टूबर को जारी होंगे क्योंकि मंगलवार को छुट्टी रही।  भारतीय स्टेट बैंक समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा, 'रिजर्व बैंक द्वारा नकदी का प्रबंधन हमेशा रिजर्व बैंक के महंगाई प्रबंधन से अलग रखा जाना चाहिए और यह अलग नीतिगत साधन होना चाहिए।'

घोष ने कहा, 'कम अवधि के नकदी प्रबंधन और दीर्घावधि स्थायी जरूरतों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।' हालांकि नकदी का असंतुलन स्थायी नहीं है और यह उस समय खत्म हो जाती है जब सरकार खर्च करना शुरू करती है। आंकड़ों से पता चलता है कि सराकरक अग्रिम कर आने के साथ सराकर जल्द ही खर्च करना शुरू करेगी। लेकिन यह अंतर को पाटने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।  

कुछ बड़े बैंकों को बड़ी मात्रा में नकदी मिली, जबकि नकदी पर ध्यान केंद्रित करने वाले बैंकों को समस्या हुई। रिजर्व बैंक की हाल की घोषणाओं से इनमें से तमाम मसलोंं का समाधान होगा। इसमें एलसीआर मानकोंं में 2 प्रतिशत की ढील दिए जाने से उन्हें नकदी मिल सकेगी। इसके अलावा बैंक हमेशा खुले बाजार परिचालन में अपने बॉन्ड रिजर्व बैंक को बेच सकेंगे और नकदी की अतिरिक्त राशि हासिल कर सकेंगे। 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, bond, LCR,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सीबीआई विवाद से सरकार की साख पर पड़ेगा असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.