बिजनेस स्टैंडर्ड - ब्रांडों का जोर अब दूध आधारित पेय पर
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ब्रांडों का जोर अब दूध आधारित पेय पर

टी ई नरसिम्हन /  10 02, 2018

फ्लेवर्ड मिल्क पर ध्‍यान
आईटीसी, कोका कोला, पेप्सिको और ब्रिटानिया जैसी कंपनियां दूध आधारित पेय बाजार में स्वास्थ्यवर्धक विकल्प देने में दिलचस्पी दिखा रहीं

कैसी है होड़

कोका कोला इंडिया ने दो फ्लेवर (आम और केला) मिनट मेड स्मूदी लॉन्च किए हैं। शुरुआत में यह तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश और इसके बाद अन्य राज्यों में उपलब्ध होंगे। कोक के पास एक फ्लेवर्ड दूध ब्रांड विवो है जो देश भर में उपलब्ध है।
आईटीसी ने सनफीस्ट वंडर्ज लेबल के तहत दूध आधारित पेय पदार्थ की पेशकश की है। पहले इसे कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बाजार में पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि उसकी योजना देश भर में जाने की है
पेप्सिको ने क्वैकर ओट्स और मिल्क बेवरिज की पेशकश आम और बादाम के फ्लेवर में की है। इस पेय पदार्थ को पिछले साल 16 शहरों में लॉन्च किया गया और दक्षिणी राज्यों में इसका सबसे ज्यादा जोर है। इस उत्पाद को सचिन तेंडुलकर के साथ तैयार किया गया है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ब्रांडों का जोर अब दूध आधारित पेय परकई कंपनियों ने स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए देश में रेडी-टू-ड्रिंक और दूध आधारित पेय (बेवरिज) बाजार में कई नए ब्रांडों की पेशकश की है और लोकप्रिय ब्रांडों का विस्तार किया है। कोला पेय के मुकाबले स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के तौर पर अपनी जगह बनाने और शताब्दी वर्ष में जन्मी पीढ़ी को लुभाने के लिए कोका कोला, ब्रिटानिया, नेस्ले और केविनकेयर जैसी कुछ कंपनियों में होड़ लगी हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में अमूल और मदर डेयरी जैसे ब्रांडों की चुनौती के अलावा सबसे बड़ी चुनौती असंगठित बाजार को ब्रांडेड क्षेत्र में बदलना था।

ज्यादातर ब्रांडों का मुख्य जोर फ्लेवर्ड मिल्क पर है क्योंकि डेयरी आधारित पेय श्रेणी में यह सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला पेय है। आईटीसी ने दक्षिण में 'सनफीस्ट वंडर्ज मिल्क' ब्रांड लॉन्च किया और इसके फूड्स डिविजन के विभागीय मुख्य कार्यकारी हेमंत मलिक कहते हैं, 'हमारे पेय में फलों का गूदा होता है और असली फल ग्राहकों को बेहतर पोषण देते हैं। दूध आधारित पेय पदार्थों के लिए कंपनी अपनी संस्थागत क्षमताओं का इस्तेमाल करेगी जिनमें कृषि क्षेत्र के संसाधन, वितरण और बुनियादी ढांचा शामिल हैं।'

आईटीसी और अन्य कंपनियां दूध से जुड़े उत्पादों में दिलचस्पी दिखा रही हैं ताकि ब्रांड पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े मूल्यों पर जोर दे सकें और आपूर्ति शृंखला का फायदा उठाते हुए इन उत्पादों को लॉन्च करने के लिए एक बेहतर मंच दे सकें। हालांकि कंपनियों को कीमतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जो इस क्षेत्र में क्षेत्रीय और गैर-ब्रांडेड खिलाड़ी पेशकश करते हैं। देश में दूध की आपूर्ति में तेजी होने की वजह से पेय से जुड़े नए ब्रांडों की पेशकश हुई है। प्रबंधन सलाहकार कंपनी टेकसाइ रिसर्च के मुताबिक, 'भारत दुनिया में दूध और दुग्ध उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। पिछले पांच सालों में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में सुधार हुआ है।'

टेकसाइ रिसर्च के एक प्रवक्ता का कहना है कि देश में संगठित दुग्ध उत्पाद बाजार में तेजी देखी जा रही है क्योंकि कम वसा और कोलेस्ट्रल की वजह से डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है। हालांकि सलाहकार कंपनी के मुताबिक असंगठित क्षेत्र का देश के दुग्ध उत्पाद बाजार में एक बड़ी हिस्सेदारी है जिससे छोटे किसान जुड़े हैं। ग्राहक दूध आधारित पेय को तरजीह दे रहे हैं क्योंकि अब वे सेहत और पोषण को लेकर ज्यादा जागरूक हैं। विशेषज्ञ इन्हें फंक्शनल फूड का नाम देते हैं जिनका बुनियादी पोषण से इतर स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर होता है।

फंक्शनल फूड बाजार में डेयरी उत्पाद अच्छी खासी जगह बना रहे हैं और दुग्ध आधारित फंक्शनल बेवरिज एक उभरता सेगमेंट हैं। यूरोमॉनीटर के मुताबिक फ्लेवर्ड दूध का बाजार 2016 के 17.8 अरब रुपये से 2017 में 22 अरब रुपये हो गया और 2018 में यह 28 अरब रुपये हो गया है। 2018 से 2023 के बीच इसमें 23.3 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर की उम्मीद है।

टाटा स्ट्रैटजिक मैनेजमेंट ग्रुप के एक अध्ययन के मुताबिक ब्रांडेड दुग्ध पेय बाजार देश में तेजी से वृद्धि करने वाला खंड है और यह वित्त वर्ष 2021 तक 60 अरब डॉलर से अधिक का बाजार बन जाएगा। 2016 में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक देश में उपभोग किए जाने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों में से केवल 22 फीसदी ही ब्रांडेड होते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। कोला ब्रांडों के लिए फ्लेवर्ड दूध और अन्य मूल्य वर्धित उत्पाद पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने में मदद करते हैं।

220 अरब रुपये के कॉर्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स बाजार की रफ्तार धीमी है क्योंकि खासतौर पर युवा उपभोक्ता स्वास्थ्यवर्धक विकल्प की मांग करते हैं। इसी वजह से वे इस मांग को भुनाने की उम्मीद कर रहे हैं और इसके लिए दूध आधारित उत्पादों की पेशकश की जा रही है जो परंपरागत पेशकश मसलन लस्सी, बटर मिल्क और सादे दूध से अलग है। कंपनियों को उम्मीद है कि इससे युवा ग्राहक आकर्षित होंगे। कंपनियां नए उत्पादों मसलन ओट्स मिल्क, कॉफी मिल्क और दूध के साथ मिले जूस की पेशकश कर रही हैं। 

कोका कोला इंडिया ने मिनट मेड स्मूदी लॉन्च किया है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि इस कदम के जरिये कंपनी 'हेल्थ और वेलनेस' में कदम रखा है। लॉन्च के पहले चरण में इन उत्पादों को तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश और इसके बाद अन्य राज्यों में उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक इन उत्पादों को बच्चों की मां की बातें सुनकर और उनकी जरूरतों को समझने के बाद तैयार किया गया। नेस्ले इंडिया ने हाल ही में दो रेडी टू ड्रिंक कोल्ड कॉफी चिल्ड लाते और इन्टेंस कैफे के लॉन्च के साथ अपने दुग्ध उत्पादों को भी मजबूत किया है।

नेस्ले इंडिया डेयरी के महाप्रबंधक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद भंडारी ने लॉन्च के वक्त एक साक्षात्कार में कहा कि दूध आधारित पेय पदार्थ वही लोग बना सकते हैं जो डेयरी कारोबार में रहे होंं और उन्हें इससे जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी हो। कंपनी ने अपने कॉफी ब्रांड नैसकैफे का इस्तेमाल अपने नए उत्पाद को लॉन्च करने का फैसला किया है जबकि आईटीसी ने अपने नए पेय के लिए एक ऐसे ब्रांड (सनफीस्ट) का इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है जिससे बच्चे और मां दोनों ही रूबरू हो चुके हैं। ब्रांडों के संघर्ष के बीच दूध अब केवल बच्चों के लिए वाली श्रेणी से बाहर हो चुके हैं। 

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