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डेट फंड में दम अगर निवेश वहीं करें, जहां ऋण जोखिम हो कम

संजय कुमार सिंह /  October 02, 2018

जब निवेशक डेट फंडों में निवेश करते हैं तो उनके लिए अवधि के अलावा एक अन्य अहम जोखिम ऋण होता है। पहले भी डेट फंड एमटेक ऑटो, बल्लारपुर इंडस्ट्रीज, जिंदल स्टील ऐंड पावर द्वारा कर्ज लौटाने में डिफॉल्ट किए जाने या उनकी क्रेडिट रेटिंग में कमी से नुकसान उठा चुके हैं। हाल में इक्रा ने आईएलऐंडएफएस और उसके समूह की कंपनियों के वाणिज्यिक पत्रों को बहुत अधिक डाउनग्रेड (6 अगस्त को एएए से 17 सितंबर को डी) किया है। इससे निवेशकों को झटका लगेगा और उन्हें डेट फंड पोर्टफोलियो में ऋण जोखिम पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 

 
निवेशकों के लिए उजली किरण
 
12 फंड हाउस और 32 फंडों का आईएलऐंडएफएस और उसके समूह की कंपनियों में निवेश है। इस समूह पर कुल 910 अरब रुपये का कर्ज है, जिसमें म्युचुअल फंडों का हिस्सा तुलनात्मक रूप से कम 22.83 अरब रुपये (अगस्त के अंत में) है। यह रकम (22.88 अरब रुपये) डेट फंडों की कुल प्रबंधनाधीन संपत्तियों (एयूएम) 13.23 लाख करोड़ रुपये का एक मामूली हिस्सा है। इतना ही नहीं, अब तक म्युचुअल फंडों को भुगतान में कोई डिफॉल्ट नहीं हुआ है। केवल भुगतान में देरी हुई है। हालांकि रेटिंग में गिरावट के चलते आईएलऐंडएफएस और उसकी सहयोगी कंपनियों में निवेश करने वाले सभी फंडों को अपने निवेश के मूल्य में गिरावट का झटका झेलना पड़ा है। 
 
इसमें कौन दोषी है? विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें ज्यादा दोषी रेटिंग एजेंसियां हैं, जिन्हें पहले से ही आईएलऐंडएफएस और उसकी सहायक कंपनियों की रेटिंग में कमी की शुरुआत कर देनी चाहिए थी। इससे पहले ही चेतावनी मिल जाती और एक साथ रेटिंग में भारी कमी की जरूरत नहीं पड़ती।  फंड प्रबंधन भी पूरी तरह अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा लगता है कि वे वाणिज्यिक पत्र (सीपी) जैसी लघु अवधि की योजनाओं में जोखिमों को भांपने में नाकाम रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वाणिज्यिक पत्रों में ए1+ रेटिंग भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि रेटिंग एजेंसियां उन्हें डाउनग्रेड करने में बहुत सुस्त होती हैं। 
 
फंड्सइंडिया डॉट कॉम में अनुसंधान प्रमुख विद्या बाला ने कहा, 'जब कोई फंड प्रबंधक अल्पावधि के पत्र में निवेश करता है तो उसे कंपनी की नकदी आवक पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि लघु अवधि के फंडों के मामले में ज्यादा प्रतिफल कमाने के लिए जोखिम को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अगर कुछ गलत होता है तो इन फंडों में झटके से उबरने की कोई गुंजाइश नहीं होती है। 
 
नियामकीय बदलावों की दरकार 
 
इस समय भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों और क्रेडिट रिस्क फंडों को छोड़कर अन्य श्रेणियों के डेट फंडों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं तय करता है कि वे कितना ऋण जोखिम ले सकते हैं। बाला कहती हैं, 'बहुत सी लघु एवं मध्यम अवधि की डेट फंड श्रेणियों में काफी अधिक ऋण जोखिम है। सेबी उनके द्वारा लिए जाने वाले अवधि जोखिम के नियम ही तय करता है।' बाला ने कहा, 'सेबी को इस कमी को दूर करना चाहिए।'
 
निवेशकों को क्या करना चाहिए? 
 
निवेशकों को अपने उन फंडों से निकलने में हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए, जिनका आईएलऐंडएफएस में समूह के वाणिज्यिक पत्रों में निवेश है। इन फंडों को जो नुकसान होना था, वह हो चुका है। इन फंडों का एनएवी पहले ही डाउनग्रेडिंग को दर्शा रहा है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया में निदेशक (प्रबंध अनुसंधान) कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, 'वर्तमान में यह अनुमानित नुकसान है। वास्तव में डिफॉल्ट होने पर ही निवेशकों को वास्तविक नुकसान होगा। अगर कंपनी की धन जुटाने की योजना कामयाब रही और उसे कुछ नकदी मिली तो यह बाजार आधारित नुकसान खत्म हो जाएगा। इसलिए निवेशकों को इंतजार करना चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस समय निकासी से निवेशकों का अनुमानित नुकसान वास्तविक नुकसान में तब्दील हो जाएगा। 
 
निवेशकों को भविष्य में निवेश करते समय यह पता होना चाहिए कि डेट फंड सावधि जमाओं जितने सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें इन फंडों में जोखिम कम से कम करने पर काम करना चाहिए। बेलापुरकर ने कहा कि जोखिम न लेने वाले निवेशकों को उन फंडों में निवेश करना चाहिए, जो अपना ज्यादातर निवेश एएए और ए1+ रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में करते हैं।  निवेशकों को ऐसे फंड में निवेश करने से बचना चाहिए, जिसकी अवधि और उनके निवेश करने की अवधि में अंतर हो। अगर कोई निवेशक एक साल के लिए क्रेडिट रिस्क फंड में निवेश करता है तो उसके पास घाटे से उबरने का समय नहीं होगा। ऐसे फंडों में कम से कम तीन साल के लिए निवेश करना चाहिए। अगर किसी क्रेडिट रिस्क फंड या मध्यम अवधि के फंड का परिपक्वता पर प्रतिफल उस श्रेणी के अन्य फंडों से अधिक है तो इसका मतलब है कि वह फंड ज्यादा जोखिम ले रहा है। 
 
बेलापुरकर का सुुझाव है कि ऐसे फंडों में उस फंड प्रबंधक पर दांव लगाएं, जो लंबे समय से ऐसी रणनीतियों का प्रबंधन कर रहा है और जिसके पास आंतरिक ऋण शोध के लिए एक अच्छी टीम है। क्रेडिट रिस्क फंडों यानी जो अपने पोर्टफोलियो का 50 फीसदी या उससे अधिक एए+ रेटिंग से कम के पत्रों में निवेश करते हैं, उनमें आपका कुल निवेश अपने कुल डेट पोर्टफोलियो का 20 या 25 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।  आपकी निवेश अवधि उस फंड की औसत परिपक्वता के बराबर या थोड़ी अधिक होनी चाहिए, जिसमें आप निवेश करते हैं। अगर यह दो साल से कम है तो अल्प अवधि के डेट फंडों पर दांव लगाएं। बाला कहती हैं, 'ऐसे फंडों में सबसे तगड़ा प्रतिफल देने वाले फंडों में निवेश से बचना चाहिए। ऐसा कोई तरीका नहीं है कि कोई फंड प्रबंधक ऋण जोखिम लिए बिना लघु अवधि के डेट फंडों में ऊंचा प्रतिफल हासिल कर सकता है।'
 
भविष्य में ऋण जोखिम को लेकर ज्यादा सतर्क रहें। मिरे एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू ने कहा, 'उद्योग में वृद्धि के साथ ही पोर्टफोलियो की क्रेडिट गुणवत्ता के लिहाज से विविधता आएगी। जोखिममुक्त और आक्रामक पोर्टफोलियो में अंतर करना शुरू करें। खुद आकलन करें या अपने सलाहकार को यह फैसला लेने दें कि विभिन्न फंड हाउसों के ऋण जोखिम आकलन की गुणवत्ता कितनी अच्छी है।' उन्होंने कहा कि निवेशकों को केवल प्रतिफल नहीं बल्कि जोखिम समायोजित प्रतिफल को देखना चाहिए। उन्हें उचित पोर्टफोलियो विविधिकृत वाले फंडों में निवेश करना चाहिए, जिनका किसी एक कंपनी में 2.5 या 3 फीसदी से अधिक निवेश नहीं होना चाहिए। 
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