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फंड के पोर्टफोलियो की ठीक से करें जांच

प्रियदर्शिनी माजी /  October 02, 2018

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) के बार-बार डिफॉल्ट करने से डेट फंडों को नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स जैसे फंड दीवान हाउसिंग फाइनैंस के ऋण पत्रों को बेच रहे हैं, जबकि इस कंपनी में कोई समस्या नजर नहीं आ रही है। यह साफ नजर आ रहा है कि निवेशक और डेट फंड प्रबंधक डरे हुए हैं।  क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी में फंड प्रबंधक (फिक्स्ड इनकम) पंकज पाठक कहते हैं, 'आईएलऐंडएफएस के घटनाक्रम को बीते वर्षों में ऐसी ही उन घटनाओं से जोड़कर देेखना चाहिए, जिनमें एमटेक ऑटो, जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) और बल्लारपुर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के डिफॉल्ट करने या उनकी क्रेडिट रेटिंग में अनाचक कमी से डेट म्युचुअल फंड प्रभावित हुए थे। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि ऐसे डिफॉल्ट से लिक्विड फंड बार-बार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे घटनाक्रम लिक्विड फंडों की प्रकृति और उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत हैं।'

 
हालांकि पाठक की सलाह है कि डेट फंडों के निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए। आम तौर पर इक्विड या लघु अवधि के फंडों में निवेश अति धनाढ्य व्यक्ति (एचएनआई) या निजी संपत्ति प्रबंधन कंपनियों से सलाह लेने वाले निवेशक करते हैं। उन्हें अपने सलाहकारों की सलाह के आधार पर यह फैसला लेना चाहिए कि और निवेश किया जाए या निकासी की जाए। अच्छी खबर यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने यह वादा किया है कि सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनी रहेगी। 
 
मिरे एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू का मानना है कि यह गलत तार्किकता का आम मामला है। जाजू कहते हैं, 'केवल एक डिफॉल्ट होने पर लोग सोचते हैं कि सब  कुछ असफल होगा। ऐसा मुश्किल से ही कभी होता है। इसलिए निवेशकों को मेरी सलाह यही है कि सतर्क रहें तथा अपने पोर्टफोलियो का मूल्यांकन करें। उन्हें भयभीत नहीं होना चाहिए। इसलिए अगर उनके पास पैसे हैं तो उन्हें अच्छे पोर्टफोलियो की तलाश करनी चाहिए और अच्छी दर पर खरीदारी करनी चाहिए।'
 
उनके मुताबिक आईएलऐंडएफएस का ज्यादातर फंडों की नेट एसेट वैल्यू पर पूरा असर पड़ चुका है। अगर एनबीएफसी क्षेत्र की अन्य किसी कंपनी ने डिफॉल्ट नहीं किया तो डेट फंडों के लिए कोई मुश्किल नहीं आएगी। आईएलऐंडएफएस के प्रवर्तकों के कंपनी में नकदी डालने से जल्द ही हालात सामान्य हो सकते हैं। कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं कि आईएलऐंडएफएस पर कुल बकाया कर्ज मोटा है। कंपनी का ढांचा जटिल है, जिसकी करीब 200 सहायक कंपनियां हैं। यहां तक कि आस्ति पुनर्गठन कंपनियों को ही जांच-पड़ताल करने में समय लगेगा। ऐसी चिंताएं भी जताई जा रही हैं कि अगर यह कंपनी राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में जाती है तो कर्ज लौटाने में और देरी होगी तथा निवेशकों को अपने कर्ज में बड़ी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 
 
इससे भी चिंताजनक बात यह है कि एनबीएफसी में म्युचुअल फंडों का अधिक निवेश है। क्रेडिट सुइस की एक रिपोर्ट में हाल में कहा गया है कि म्युचुअल फंडों का लघु अवधि के वाणिज्यिक पत्रों के जरिये एनबीएफसी में निवेश वर्ष 2016 से करीब तीन गुना बढ़ चुका है। मार्च, 2018 में एनबीएफसी के बकाया वाणिज्यिक पत्रों में से 60 फीसदी म्युचुअल फंडों के पास थे। एक डेट फंड निवेशक के रूप में अपने डेट फंड पोर्टफोलियो की जांच-पड़ताल करने का यह अच्छा समय है। अगर एनबीएफसी शेयरों में ज्यादा निवेश है तो अपने फंड प्रबंधक से पूछे कि उनके पास स्थिति से निपटने के लिए क्या योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इस क्षेत्र में ऋण जोखिम है। निवेशकों को इस चीज का व्यापक अध्ययन करना चाहिए कि वे कहां निवेश कर रहे हैं और उन्हें विभिन्न निवेश के बीच जोखिम एवं प्रतिफल के अंतर को समझना चाहिए।  एस्सेल म्युचुअल फंड के निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राजीव शास्त्री कहते हैं, 'इस समय निवेश को निकालने का मतलब बेवजह घाटा उठाकर बाजार के निचले स्तर पर निकासी है। जो निवेशक धैर्य बनाए रखेंगे, उन्हें वर्तमान माहौल का लाभ मिलेगा।'
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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