बिजनेस स्टैंडर्ड - एनबीएफसी को कर्ज में जोखिम नहीं
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एनबीएफसी को कर्ज में जोखिम नहीं

नम्रता आचार्य / कोलकाता September 28, 2018

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अपने कर्ज की समीक्षा कर रहा है। इस समय बैंक का एनबीएफसी पर करीब 2,000 अरब रुपये का कर्ज है।  एसबीआई के उप प्रबंध निदेशक (कंपनी खाता समूह) सुजित कुमार वर्मा ने कहा कि यह मुहिम अगले पखवाड़े में पूरी होने के आसार हैं। हालांकि बैंक को एनबीएफसी को अपने कर्ज में कोई जोखिम नजर नहीं आ रहा है। यह समीक्षा सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। उन्होंने यह बात भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आज आयोजित एक सेमिनार से इतर कही। 

 
आईएलऐंडएफएस की वजह से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आईएलऐंडएफएस ने अपने वाणिज्यिक पत्रों के बकाये को लौटाने में डिफॉल्ट किया है, जिसका असर पूरे एनबीएफसी क्षेत्र पर पड़ रहा है। वर्मा ने कहा, 'शुरुआती आकलन के अनुसार एनबीएफसी में नकदी या संपत्ति देनदारी में कोई अंतर नहीं मिला है।' वर्मा ने कहा कि बैंक को नहीं लगता कि एनबीएफसी को पहले से स्वीकृत ऋण देने पर रोक लगाने की जरूरत है। हालांकि वह उन एनबीएफसी को नए ऋण देने में सख्त हो सकता है, जिनका निकट भविष्य में बहुत मजबूत ऋण प्रोफाइल नहीं है। उन्होंने किसी 'प्रक्रियागत जोखिम' या नकदी संकट के डर को खारिज करते हुए कहा कि बैंक आगे भी इस क्षेत्र को कर्ज देता रहेगा।  
 
एसबीआई को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कंपनियों को कर्ज देने में बढ़ोतरी होगी। पिछली कई तिमाहियों में कंपनी जगत की वृद्धि सुस्त रहने से ऋण लेने की रफ्तार भी कमजोर थी। एसबीआई का अनुमान है कि उसका कंपनियों को कर्ज वित्त वर्ष 2019 में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 6 फीसदी बढ़ेगा। बैंक ने कुल कर्ज वितरण में वृद्धि करीब 10 से 12 फीसदी रहने की संभावना जताई है।  दो-तीन साल पहले तक बैंक के कुल कर्ज में कंपनियों को दिए गए कर्ज का हिस्सा करीब 70 फीसदी था। यह अब घटकर करीब 40 फीसदी पर आ गया है। वर्मा ने कहा कि कंपनियों को ऋण में वृद्धि पीएसयू और वाहन, तेल एवं गैस आदि क्षेत्रों में निजी निवेश की बदौलत होने की उम्मीद है। 
 
उन्होंने कहा, 'कंपनी क्षेत्र से ऋण की मांग में बढ़ोतरी हुई है। आईबीसी के जरिये होने वाले समाधानों से भी कंपनी क्षेत्र में ऋण की मांग बढ़ेगी।' कुछ फंसे कर्जों का समाधान होने की उम्मीद है। इसलिए बैंक का अनुमान है कि इस्पात जैसे क्षेत्रों में कार्यशील पूंजी की जरूरत से कंपनियों को ऋण में इजाफा होगा। वर्मा ने कहा कि 10 अक्टूबर से पहले बिजली क्षेत्र की तीन से चार ऋणग्रस्त संपत्तियों का एनसीएली के बाहर समाधान होने की उम्मीद है। 10 अक्टूबर को ऋणदाता स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक करेंगे। 
 
एसबीआई के एमडी दिनेश कुमार खारा ने कहा कि कंपनी दिवालिया समाधान के लिए एनसीएलटी में 12 कंपनियों की पहली सूची भेजी गई है। इन कंपनियों में बैंक का जितना निवेश है, उसके 53 फीसदी की वसूली होने की उम्मीद है। खारा ने कहा, 'हमने इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किए हैं और इसका बैलेंस शीट पर असर नहीं पड़ेगा। इन मामलों के लिए हमारा औसत प्रावधान करीब 55 फीसदी होगा।'
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, SBI, NBFC,,
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