बिजनेस स्टैंडर्ड - उधारी में कटौती करेगी सरकार
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उधारी में कटौती करेगी सरकार

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली September 28, 2018

नकदी और बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने के लिए सरकार वित्त वर्ष 2018-19 में सकल बाजार उधारी में 700 अरब रुपये की कटौती करेगी। इस राशि से राजकोषीय घाटे का समायोजन होगा, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर बने रहने की उम्मीद है। दूसरी छमाही में सरकार बाजार उधारी से 2.47 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी, जिसमें महंगाई दर से जुड़े दो बॉन्ड शामिल होंगे। शुद्ध बाजार उधारी का लक्ष्य पूर्ववत बना रहेगा, जिसके लिए बाईबैक घटाया जाएगा। साथ ही लघु बचत से अतिरिक्त संसाधन सरकार को मिलेंगे। 
 
भारतीय रिजर्व बैंक के साथ चर्चा के बाद दूसरी छमाही का कैलेंडर तय करे के बाद आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग ने कहा, 'दूसरी छमाही के लिए सकल उधारी कार्यक्रम अब सिर्फ 2.47 लाख करोड़ रुपये का है। पहली छमाही में हमारा उधारी कार्यक्रम 2.88 लाख करोड़ रुपये का था।'  सरकार ने वित्त वर्ष 2019 में उधारी से 6.06 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब सिर्फ 5.35 लाख करोड़ रुपये (दूसरी छमाही में 2.47 लाख करोड़ रुपये और पहली छमाही में 2.88 लाख करोड़ रुपये) का लक्ष्य है। 700 अरब रुपये की घटी बाजार उधारी की पूर्ति घटे बाई बैक और लघु बचत से बढ़े संसाधनों के माध्यम से होगी। 
 
गर्ग ने कहा, 'हमारे राजकोषीय घाटे पर असर नहीं पड़ रहा है, जिसकी वजह से हमने शुद्ध उधारी कार्यक्रम को यथावत जारी रखने का फैसला किया है। बहरहाल हमने बाईबैक कार्यक्रम पर फिर से कुछ विचार किया है और उसके साथ ही हम उम्मीद कर रहे हैं कि लघु बतज से कुछ और धन जुटाया जा सकेगा।' इसके पहले सरकार ने कहा था कि वह वित्त वर्ष 2019 में बाईबैक 250 अरब रुपये घटाएगी और लघु बचत से 250 अरब रुपये जुटाएगी। उसने 200 अरब रुपये जुटाए हैं। सूत्रों ने कहा कि कुल मिलाकर बाईबैक से 200 अरब रुपये कम किया जाएगा। 
 
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नैयर ने कहा कि कम अवधि के हिसाब से 10 साल का बॉन्ड यील्य 8.0 से 8.1 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। इस समय यह 8.02 से 8.03 प्रतिशत के बीच है।  उन्होंने कहा, 'एच-2 बाजार उधारी के आकार में अनिश्चितता है। कच्चे तेल के दाम और रुपये के मूल्य को लेकर अनिश्चिता का जोखिम है। साथ ही विभ्नि राजकोषीय जोखिमों को लेकर संतुलन बनाना है। इसका असर बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा।' सरकार नवंबर की शुरुआत से हर हफ्ते 110 अरब रुपये उधारी लेगी। गर्ग ने कहा, 'और उसके बाद हम 120 अरब रुपये उधारी लेंगे, जैसा कि पहली छमाही में हुआ था। हम उधारी कार्यक्रम 8 मार्च को खत्म करेंगे।'  संख्या के हिसाब से कुल नीलामी 21 होगी। 
 
इस साल की दूसरी छमाही में सरकार इन्फ्लेशन इंडेक्स्ड बॉन्ड भी पेश करेगी। गर्ग ने कहा, 'यह एक नया तरीका है, हम उम्मीद करते हैं कि मौजूदा छमाही में एक या दो इश्यू जारी किया जाएगा।'  सरकार राजकोषीय घाटे को शुद्ध बाजार उधारी, बाईबैक और लघु बचत के अलावा अन्य किसी स्रोत से पूरा नहीं करना चाहती। गर्ग ने कहा कि या तो कोई नकदी प्रबंधन बिल नहीं होंगे या यह बहुत कम समय के लिए हो सकते हैं।  डीईए सचिव ने कहा, 'हमारी राजकोषीय जरूरतों के लिए हमारा उधारी कार्यक्रम पर्याप्त है। हमने यह भी फैसला किया है सिर्फ दूसरी छमाही में ही 350 अरब रुपये जुटाए जाएंगे। और आगे मार्च में इसे सिर्फ 250 अरब रुपये रखा जाएगा।'
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