बिजनेस स्टैंडर्ड - सौर परियोजनाओं पर जीएसटी की स्थिति साफ
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सौर परियोजनाओं पर जीएसटी की स्थिति साफ

श्रेया जय / नई दिल्ली September 27, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत नई सौर परियोजनाओं की लागत पर भ्रम की ्रस्थिति को दूर करते हुए केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) ने इसे बिजली समझौतों के 'कानून में बदलाव' उपधारा के तहत शामिल करने की अनुमति दे दी है। अब से परियोजना डेवलपरों द्वारा भुगतान किए गए जीएसटी को 'समय सीमा के भीतर एक बार के आधार पर' एक अलग अवयव के तौर पर वसूला जा सकता है।  यह आदेश एज्योर पावर और अदाणी पावर की सहायक कंपनी प्रयत्न डेवलपर्स की याचिका पर दिया गया है। अदाणी ने जीएसटी को कानून में बदलाव के तौर पर घोषित करने के लिए याचिका दायर की थी ताकि आगामी बोलियों में इसे लागत संरचना में शामिल किया जा सके। इस फैसले को लेकर कंपनियां आश्वस्त नहीं थीं क्योंकि नियामक की तरफ से कोई वैधानिक मंजूरी नहीं मिली थी। 
 
अदाणी ने सीईआरसी से यह भी मांग की थी कि वह शुल्क में समायोजन कर के याचिकाकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को 'कानून में बदलाव' का प्रावधान होने से पहले की तरह बहाल करे। मामला एनटीपीसी और राजस्थान की तीन बिजली वितरण कंपनियों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी, जहां अदाणी की सौर बिजली परियोजना है। दूसरी तरफ एज्योर ने उत्तर प्रदेश की अपनी परियोजना के लिए एकमुश्त 65 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है जिसका भुगतान भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) और उत्तर प्रदेश कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) करे। इस परियोजना की निविदा एसईसीआई ने जारी की थी। 
 
सीईआरसी ने अपने आदेश में सभी संबंधित पक्षों को दोनों याचिकाकर्ताओं के क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए 60 दिनों का वक्त दिया है जो कि परियोजना पूरी करने की अवधि के दौरान जीएसटी भुगतान करने की वजह से लागत में आई अंतर के बराबर है। नियामक ने इन दोनों डेवलपरों के मौजूदा शुल्क में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया है।   सौर बिजली उत्पादन संयंत्रों और इसमें उपयोग किए जाने वाले कच्चा माल (मॉड्ïयूलों सहित) पर जीएसटी दर को वस्तुओं के मूल्य का 5 फीसदी निर्धारित किया गया है। हालांकि, इन्वर्टर, सीमेंट और केबल जैसी दूसरी वस्तुओं को 18 फीसदी के दायरे में रखा गया है। साथ ही, सौर ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए जरूरी सेवाओं और तकनीकी आदि को 18 फीसदी के दायरे में रखा गया है।
 
परियोजना डेवलपर्स जिन्होंने 1 जुलाई, 2017 को प्रभावी हुए जीएसटी व्यवस्था के तहत अब तक कर का भुगतान किया है, वे अपनी लागत बढऩे के चलते एकमुश्त क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं। इन परियोजना डेवलपर्स को संबंधित राज्य/केंद्रीय ईआरसी में जाना होगा। क्षेत्र के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए, डेवलपर बोली में जीएसटी लागत को एक वैध हिस्सा मान सकेंगे।  
Keyword: solar, power, electric, GST,,
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