बिजनेस स्टैंडर्ड - उधारी कम कर सकती है सरकार
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उधारी कम कर सकती है सरकार

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली September 27, 2018

सरकार चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अपनी सकल उधारी 200 अरब रुपये घटा सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक यह कमी कम बाईबैक और सरकारी बॉन्ड जारी कि ए जाने को लेकर संभावित बदलाव न होने की वजह से हो सकती है।  वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी शुक्रवार को नई दिल्ली में मुलाकात कर अक्टूबर-मार्च के उधारी कैलेंडर पर फैसला करेंगे। इस बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर और बजट डिवीजन व केंद्रीय बैंक के अधिकारी शामिल होंगे। 
 
एक अधिकारी ने कहा, 'बॉन्डों की बाईबैक में करीब 200 अरब रुपये की और कमी के बारे में चर्चा हुई है।' उन्होंने कहा कि दीर्घावधि जी-सेक जारी किए जाने पर कोई असर नहीं होगा।  2018-19 में केंद्र की सकल उधारी का बजट अनुमान 6.06 लाख करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में केंद्र सरकार ने 2.88 लाख करोड़ रुपये उधारी की इच्छा जताई थी, जबकि बाजार को 3.3 से 3.6 लाख करोड़ रुपये की उम्मीद थी।  सरकार द्वारा बाजार पर दबाव कम करने के लिए यह कदम उठाया और पहली छमाही की उधारी कुल बजट उधारी के 47.5 प्रतिशत कर दिया, जबकि सामान्यतया पहली छमाही में 60 से 65 प्रतिशत उधारी होती है। 
 
घटी उधारी बरकरार रखने के लिए केंद्र ने कहा कि वह राष्ट्रीय लघु बचत कोष से 250 अरब रुपये अतिरिक्त निकासी करेगी, जिससे 2018-19 में राजकोषीय घाटे की भरपाई की जा सके। पहले के 750 अरब रुपये के अनुमान के विपरीत अब राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए एनएसएसएफ से 1 लाख करोड़ रुपये निकाले जाएंगे। सरकार ने पहले ही जी-सेक के बाईबैक की योजना में कमी करने की घोषणा की है, जो सामान्यतया दूसरी छमाही में होता है। ऐसे में साल के लिए सकल उधारी 500 अरब रुपये घट जाएगी। इसके अलावा आगे कोई और कमी करने की घोषणा शुक्रवार को की जा सकती है।  
 
पहले की घोषणा के मुताबिक बजट में शुद्ध उधारी 4.62 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था,  एनएसएसफ से ज्यादा धन निकासी की वजह से उसमें 250 अरब रुपये की कमी आएगी। 2018-19 में शुद्ध उधारी 4.27 लाख करोड़ रुपये होगी। 
Keyword: bond, fund, loan, debt, govt,,
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