बिजनेस स्टैंडर्ड - म्युचुअल फंडों को बैंकों से कर्ज की आस
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म्युचुअल फंडों को बैंकों से कर्ज की आस

ऐश्ली कुटिन्हो और जश कृपलानी / मुंबई 09 26, 2018

कम हुआ नकदी प्रवाह

बिजनेस स्टैंडर्ड म्युचुअल फंडों को बैंकों से कर्ज की आसकम नकदी प्रवाह के माहौल में म्युचुअल फंडों के लिए एक या दो दिन की अवधि वाली वाणिज्यिक प्रतिभूतियों को भुनाना काफी कठिन हो गया है। इस मामले से अवगत लोगों ने बताया कि मौजूदा परिस्थिति में कुछ बड़े फंड हाउस बढ़ते निकासी आग्रह को पूरा करने के लिए बैंकों से उधारी लेने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

कोटक म्युचुअल फंड की मुख्य निवेश अधिकारी (डेट) लक्ष्मी अय्यर ने कहा, 'परिस्थिति 2008 की तरह गंभीर भले न हो लेकिन वह काफी अनिश्चित हो गई है। द्वितीयक बाजार में खरीद-फरोख्त काफी कम हो चुकी है। मौजूदा परिस्थिति में कोई भी उधारकर्ता प्राथमिक बाजार की ओर रुख नहीं करेगा। सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट रेट ओवरनाइट रेट के मुकाबले 2 फीसदी अधिक है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुई तो इसका प्रभाव गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के इतर भी दिख सकता है और विनिर्माण कंपनियों को भी जल्द ही इसका सामना करना पड़ सकता है।' 

फिलहाल म्युचुअल फंड कंपनियां अपनी शुद्ध परिसंपत्तियों की 20 फीसदी तक रकम छह महीने के लिए उधार ले सकती हैं ताकि निकासी, पुनर्खरीद, ब्याज भुगतान एवं यूनिट धारकों को लाभांश जैसी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इसके तहत फंड हाउस किसी खास श्रेणी में अपनी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एएमयू) के समानुपात में रकम बैंक से उधार ले सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि यदि किसी फंड हाउस की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों का मूल्य 1 अरब रुपये है तो वह अपनी निकासी जरूरतों को पूरा करने के लिए 20 करोड़ रुपये तक उधारी ले सकता है। 

एक डेट फंड मैनेजर ने कहा, 'नकदी प्रवाह काफी कम हो चुका है लेकिन हमने निकासी का कोई बड़ा दबाव नहीं देखा है। हां, बिकवाली के लिए यह एक कठिन बाजार है।' तीन महीने की अवधि वाली वाणिज्यिक प्रतिभूतियों के लिए दरें पिछले सप्ताह 50 से 75 आधार अंक कम हो गईं। प्रतिफल में गिरावट के कारण नई वाणिज्यिक प्रतिभूतियां बाजार में नहीं उतारी जा रही हैं।

घरेलू ब्रोकरेज कोटक ने उम्मीद जताई है कि 2018-19 की दूसरी छमाही में बेंचमार्क 10 वर्ष की अवधि वाली वाणिज्यिक प्रतिभूतियां 7.75 से 8.25 फीसदी के दायरे में कारोबार करेंगी।

कोटक ने अपने एक नोट में कहा है, 'हमारा मानना है कि मनी मार्केट के नकदी प्रवाह में आई हालिया सख्ती काफी हद तक डेट फंडों के पोर्टफोलियो समायोजन से प्रेरित है जिसका खास कंपनियों में अपेक्षाकृत बड़ा निवेश था। हालांकि फिलहाल पूर्ण नकदी संकट की संभावना कम दिख रही है लेकिन एनबीएफसी ऋण क्षेत्र में कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है और अल्पावधि की ब्याज दरें बढ़ेंगी।'

डीएसपी एमएफ के अधिकारियों ने सोमवार को निवेशकों की बैठक बुलाकर अपनी चिंताएं जाहिर की और कहा कि दीवान हाउसिंग के ऋण पत्रों की बिक्री का इस योजना पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ा। हालांकि अधिकारियों ने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार की हालिया घटनाओं पर चिंता जाहिर की। एक अधिकारी ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में नियामकीय दखल की अवश्यकता है। 

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