बिजनेस स्टैंडर्ड - धन देने की शर्तों से हटेगी सरकार
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धन देने की शर्तों से हटेगी सरकार

सोमेश झा / नई दिल्ली 09 26, 2018

इस वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों को मिला धन

बिजनेस स्टैंडर्ड धन देने की शर्तों से हटेगी सरकार

*अरब रुपये में

स्रोत: वित्त मंत्रालय

बैंक  धन* 
पंजाब नैशनल बैंक 82.5
कॉर्पोरेशन बैंक 25.5
सेंट्रल बैंक 23.5
इंडियन ओवरसीज बैंक 21.6
आन्ध्रा बैंक 20.2
इलाहाबाद बैंक 18
कुल 191.3
2018-19 की शेष पूंजी 459

 
सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) में प्रदर्शन और सुधार के लिए उठाए गए कदमों के आधार पर पूंजी डालने की योजना से हट सकती है। इस वित्त वर्ष में सरकार नियामकीय जरूरतों को पूरा करने और बैंकों द्वारा दिया जाने वाला कर्ज बढ़ाने में मदद करने के लिए पूंजी डालने पर विचार करेगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली की बैंकरों के साथ मंगलवार को हुई बैठक में सरकारी बैंकों की ओर से मांग को देखते हुए इस पर विचार हो रहा है। बैंकों ने कहा था कि उन्हें पहले धन की जरूरत है, जिससे कि वे उद्योग जगत को ज्यादा उधारी दे सकें।

हाल ही में सरकार ने 14,300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से प्रभावित पंजाब नैशनल बैंक में पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के माध्यम से 5,430 करोड़ रुपये डालने का फैसला किया था। दिल्ली मुख्यालय वाले इस बैंक ने 2018-19 के लिए 8,000 करोड़ रुपये के करीब अतिरिक्त पूंजी की मांग की थी।

बैंंक को नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की आभूषण फर्म ने14,300 करोड़ रुपये का चूना लगाया था। शुरुआत में सरकार ने बैंक की यह मांग खारिज कर दी, लेकिन बाद में पंजाब नैशनल बैंक में 8,250 करोड़ रुपये डाले। इसके पहले सरकार ने बैंक में 2,820 करोड़ रुपये बैंक को दिए थे, जिसे उसकी न्यूनतम पूंजी जरूरत पूरी हो सके और एडीशनल टियर 1 (एटी-1) बॉन्डों के ब्याज का समय से भुगतान हो सके।  

इसके साथ ही सरकार ने इस वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में करीब 19,100 करोड़ रुपये डाले हैं। इसके पहले सरकार ने 5 और बैंकों- सेंट्रल बैंक, कॉर्पोरेशन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, आन्धा बैंक और इलाहाबाद बैंक का पूंजीकरण किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा था कि बैंकरों ने सरकार से मांग की है कि पूंजी जरूरतें पहले पूरी की जाएं।

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था कि बैंंकरों ने सरकार से पूंजी डालने की समय सारिणी से पहले पूंजी दिए जाने की मांग की है।  

इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, 'इसका उद्देश्य अच्छा है, लेकिन बेहतर मकसद और घोषित किए गए बड़े आकार के पूंजीकरण कार्यक्रम के बाद आप असफलता नहींं चाहेंगे। आज कुछ बैंंक अपनी पूंजी की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति की कल्पना करें, जब बैंक अपने टियर-1 बॉन्ड की बाध्यता पूरी करने में सफल नहींं होंगे, तो इसका क्या परिणाम होगा?' उन्होंने कहा, 'व्यवस्था की कम अवधि की जरूरतें बाध्य कर रही हैं कि सरकार कमजोर बैंकों में धन डाले।' 

सरकार ने जब 2.11 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम की जनवरी में घोषणा की थी तो उसकी रूपरेखा के बारे में वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने वादा किया था कि 2018-19 में पुनर्पूंजीकरण सरकारी बैंकों के प्रदर्शन और सुधार पर निर्भर होगा। कुमार ने कहा था, 'यह आसान धन नहींं होगा (जो बैंकों को मिलेगा)।'

उन्होंने कहा था कि सरकारी बैंकोंं को अलग कारोबारी रणनीति अपनानी होगी और गैर प्रमुख कारोबार से निकलकर अपने मुख्य काम पर केंद्रित होना होगा, जैसा कि केंद्र ने 30 बिंदुओं का सुधार एजेंडा तैयार किया है। इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने सुधार एजेंडे के अनुपालन के लिए बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की मदद ली।

सरकार की योजना को  ईएएसई- एनहांस एक्सेस ऐंड सर्विस एक्सिलेंस के नाम से जाना जाता है, जिससे केंद्र सरकार की 2018-19 की पुनर्पूंजीकरण की कवायद जुड़ी हुई थी। मार्च में सरकारक रिपोर्ट कार्ड पेश करने की योजना बना रही थी, जो बीसीजी के आंकड़ों के आधार पर थे। बैंकोंं के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें धन दिया जाना था।   

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'बैंकों ने सरकार को सुझाव दिया है कि इस वित्त वर्ष में उन्हें पहले धन मुहैया कराया जाए। लेकिन सरकारी बैंक इस वित्त वर्ष में 1.8 लाख करोड़ रुपये खराब कर्ज की वसूली की उम्मीद कर रहे हैं, जो हमे आश्वस्त कर रहा है।'  

मंगलवार को हुई सालाना समीक्षा बैठक में सरकारी बैंकों ने वादा किया है कि वे दिवालिया संहिता के बाहर मामलों को निपटाने के लिए इस वित्त वर्ष में बराबर की कवायद करेंगे। 2017-18 में सरकारी बैंकों ने 746 अरब रुपये के करीब खराब कर्ज की वसूली की थी। उम्मीद की जा रही है कि गैर निष्पादित संपत्तियों के 50 करोड़ से ज्यादा मामलों को वसूली के लिए तैनात टीम को सौंप रहे हैं। 

Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, PSU,,
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