बिजनेस स्टैंडर्ड - खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान
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खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान

दिलीप कुमार झा / मुंबई September 25, 2018

केंद्र सरकार ने बुआई क्षेत्र और उपज में विस्तार के जरिये भारत का खाद्य तेल उत्पादन दोगुना करने और आयात निर्भरता कम करने के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। हाल ही में रबी सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस योजना का खुलासा किया है। इसका उद्देश्य 2022 तक वार्षिक उत्पादन 1.369 करोड़ टन तक पहुंचाना है जबकि मौजूदा उत्पादन 73.1 लाख टन है। हालांकि उत्पादन बढ़ाने के लिए इससे पहले भी कई रणनीति तैयार की जा चुकी हैं लेकिन इनमें निरंतरता नहीं रही। स्थिर उत्पादन की तुलना में खपत में लगातार इजाफे ने भारत की आयात निर्भरता 2016-17 में बढ़ाकर 67 प्रतिशत कर दी जबकि अनुमानित मांग 2.45 करोड़ टन है।
 
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि नौ साल के दौरान वार्षिक फसल के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय प्रदर्शन (3.89 प्रतिशत की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर) के बावजूद उत्पादन प्रति व्यक्ति मांग (लगभग छह प्रतिशत) की बढ़ती दर से मेल नहीं खा पाया। बढ़ती जनसंख्या और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति उपभोग (19 किलोग्राम प्रति वर्ष) में हो रहे इजाफे की वजह से ऐसा हुआ है। तिलहन की नौ वार्षिक फसलों (प्राथमिक स्रोत) का उत्पादन लक्ष्य 4.564 करोड़ टन रखा गया है जिससे 2022 तक वनस्पति तेल की उपलब्धता लगभग 1.369 करोड़ टन रहेगी।
 
तेल वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) 2016-17 के दौरान 730 अरब रुपये मूल्य का कुल 1.4 करोड़ टन वनस्पति तेल आयात दर्ज किया गया था जो वनस्पति तेल की 2.45 करोड़ टन खपत का 67 प्रतिशत था। खेती का वार्षिक क्षेत्र करीब 2.67 करोड़ हेक्टेयर रहा जिसमें से तकरीबन 70 प्रतिशत क्षेत्र बारिश के पानी पर निर्भर था। मक्का, कपास या चने जैसी प्रतिस्पर्धी फसलों की तुलना में सामान्य रूप से इस क्षेत्र में गिरावट देखी गई है। 2022 तक देश में वनस्पति तेल की कुल जरूरत 3.22 करोड़ टन रहने का अनुमान है। प्रति व्यक्ति उपभोग अनुमानित रूप में करीब 22 किलोग्राम है। 2015-16 के दौरान यह 19 किलोग्राम था। इस बढ़ते उपभोग के मद्देनजर सरकार का लक्ष्य इसका आधा भाग घरेलू स्रोतों से पूरा करना है।
 
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि उत्पादन में विस्तार के जरिये 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करना संभव है। इसका मतलब यह है कि कृषि के तरीकों में परिवर्तन के जरिये तिलहन उत्पादन के तहत आने वाले क्षेत्र और उपज में बढ़ोतरी होगी। इसमें उन्नत बीज और कृषि का मशीनीकरण भी शामिल है। अरंडी के किसान पहले ही मूंगफली के साथ अंतर-फसलों की खेती करके आय दोगुना करने की अपनी क्षमता दिखा चुके हैं।
Keyword: edible oil, import, export, agri,
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