बिजनेस स्टैंडर्ड - जाति-विरोध का ‘आजाद’ योद्धा
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जाति-विरोध का ‘आजाद’ योद्धा

ऋत्विक शर्मा /  09 24, 2018

भीम आर्मी

बिजनेस स्टैंडर्ड जाति-विरोध का ‘आजाद’ योद्धाउत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के छुटमलपुर में चंद्रशेखर आजाद के घर के बाहर आने-जाने वालों की भीड़ लगी रहती है। हाल ही में तो मेहमानों की संख्या कुछ अधिक ही बढ़ गई। चंद्रशेखर के सामाजिक संगठन भीम आर्मी के सदस्य और उनके समर्थक नीले रंग से रंगे इस घर में अक्सर मुलाकातों के लिए इकट्ठा होते रहते हैं। बहुजन समाज के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने के मकसद से गठित भीम आर्मी इस समाज की वंचित एवं पिछड़ी जातियों के बीच चर्चा का सबब बनकर उभरी है।

दलित अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले चंद्रशेखर को करीब 15 महीनों तक जेल में रहने के बाद 14 सितंबर को सहारनपुर की जेल से रिहा किया गया। उन पर जातिगत हिंसा को उकसाने के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अपने युवा नेता की रिहाई के बाद इस गांव के दलितों के बीच किसी त्योहार जैसा माहौल बन गया। 

चंद्रशेखर से मिलने के लिए आए मेहमानों को घर में बनी तहरी परोसी जा रही है। चावल dऔर सब्जियों से बनने वाली तहरी को लोग बड़े चाव से खा रहे थे। छत पर बने एक कमरे में कई लोग देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चर्चा कर रहे हैं। उनकी बहस का मुद्दा यह है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनावों में किस तरह पराजित किया जाए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांस्कृतिक एजेंडे का जवाब देने के लिए उन्हें क्या रणनीति अपनानी होगी?

चंद्रशेखर के साथियों का आखिरी लक्ष्य भाजपा और आरएसएस को रोकना ही है। जेल से रिहाई के फौरन बाद चंद्रशेखर ने इसका खुलकर इजहार भी किया। इस युवा नेता का मानना है कि 2014 के चुनाव में धर्म ही भाजपा का सबसे बड़ा आसरा था। वह कहते हैं, ‘बहुजन आंदोलन से जुड़े लोग चाहे वे पिछड़े हों या दलित, बहुत ही सीधे-सादे इंसान हैं।

हर कोई इस धर्म-आधारित राजनीति का शिकार हो गया।’ उनका कहना है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) उत्पीडऩ अधिनियम 1989 को शिथिल करने की आशंका के चलते गत 2 अप्रैल को हुआ दलितों का देशव्यापी प्रदर्शन और रोजगार, भ्रष्टाचार एवं महंगाई के मोर्चे पर भाजपा की नाकामी इसकी निशानी हैं कि लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 

चंद्रशेखर पिछले साल देश के राजनीतिक पटल पर उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने भगवा आतंक के खिलाफ संघर्ष में दलितों को ओबीसी और मुस्लिमों के साथ मिलकर आवाज बुलंद करने का आह्वान किया था। देहरादून में वकालत की प्रैक्टिस करने वाले 31 वर्षीय चंद्रशेखर देखते-ही-देखते पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय के प्रतिनिधि चेहरे के तौर पर उभरे थे।

अप्रैल 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में सवर्ण ठाकुरों ने दलित समुदाय के मसीहा भीमराव आंबेडकर की मूर्ति लगाने की कोशिशों को नाकाम कर दिया था। इसके जवाब में दलित समुदाय ने भी चंद्रशेखर की अगुआई में राजपूत समुदाय के महान राजा महाराणा प्रताप की वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम का विरोध किया। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों पक्षों के बीच हिंसा भडक़ उठी जिसमें एक व्यक्ति की जान भी चली गई। इसके बाद चंद्रशेखर पर हत्या, हिंसा के लिए उकसाने और नफरत फैलाने के आरोप लगाए गए और उन्हें जून 2017 में डलहौजी से गिरफ्तार कर लिया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने नवंबर 2017 में चंद्रशेखर पर बेहद सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। राज्य सरकार ने ऐसा कदम इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत दिए जाने के अगले ही दिन उठाया था। लेकिन राज्य सरकार ने रासुका की अवधि खत्म होने के दो महीने पहले ही अचानक चंद्रशेखर की रिहाई का फैसला उनकी मां कमलेश देवी की तरफ से दाखिल अर्जी पर किया है। स्कूल प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त उनके पिता गोवद्र्धन दास की 2013 में ही मौत हो गई थी।

हालांकि सामाजिक-राजनीतिक पटल पर चंद्रशेखर आजाद का उदय बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती को अधिक रास नहीं आया। मायावती ने चंद्रशेखर को दलित समुदाय में फूट डालने वाला भाजपा एजेंट करार दिया है। लेकिन चंद्रशेखर इन हमलों से व्यथित नहीं हैं। वह खुद को आंबेडकर, बसपा संस्थापक कांशी राम, समाज सुधारक ज्योतिबा फुले, तमिल विचारक ई वी रामास्वामी पेरियार, आदिवासी नायक बिरसा मुंडा, समाज सुधारक नारायण गुरु और क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के विचारों से प्रेरित बताते हैं। 

चंद्रशेखर के छोटे भाई कमल किशोर बताते हैं कि भीम आर्मी के गठन के पहले दलितों एवं मुसलमानों की बहुलता वाले उनके गांव छुटमलपुर में जन्माष्टमी या शिवरात्रि पर निकलने वाली शोभायात्रा में दलित सडक़ के दोनों तरफ हाथ जोडक़र खड़े रहते थे। लेकिन भीम आर्मी ने दलितों को उच्च जातियों के हाथों होने वाले धार्मिक उत्पीडऩ के प्रति सजग करने की कोशिश की। चंद्रशेखर के नाम के साथ रावण उपमाम का भी इस्तेमाल होता रहा है।

रामायण के मुख्य खल-पात्र रावण के साथ अपनी तुलना करने के बाद से ही चंद्रशेखर के साथ यह उपनाम जुड़ गया था। इस युवा नेता की खासियत यह है कि जहां भाजपा-संघ के विरोध को लेकर वह मुखर हैं, वहीं विरोधी दलों को समर्थन देने में भी उन्होंने खुला रवैया अपनाया हुआ है। इसके अलावा विभिन्न सकारात्मक बातों को आत्मसात कर उन्हें अपने अभियान का अंग बनाना भी उनकी क्षमता को उजागर करता है।

भीम आर्मी की रक्षा समिति के समन्वयक संजीव माथुर भाजपा और आरएसएस के प्रति नाराजगी की एक वजह भी बताते हैं। माथुर बताते हैं कि देहरादून में स्नातक की पढ़ाई के दौरान चंद्रशेखर आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े हुए थे। लेकिन कॉलेज परिसर में लगे एक हैंडपंप का इस्तेमाल करने से ऊंची जाति के छात्रों ने रोक दिया तो चंद्रशेखर का उनसे विवाद हो गया। उसके बाद उन्होंने एबीवीपी का साथ भी छोड़ दिया था।

बहरहाल चंद्रशेखर को लगता है कि मीडिया ने वर्ष 2014 में वजूद में आने के बाद से ही भीम आर्मी की छवि एक उग्रवादी संगठन के तौर पर पेश की है। माथुर कहते हैं, ‘आजाद की तरफ से लागू किए गए सुधार अतिवादी न होकर मानवतावादी हैं। स्कूलों में आंबेडकर की शिक्षाओं को प्रोत्साहित करना और रक्तदान शिविरों का आयोजन ऐसे ही कदम थे।’

चंद्रशेखर का संगठन करीब 300 अनौपचारिक पाठशालाओं का संचालन करता है जिनमें वालंटियर बच्चों को बहुजन समाज की हकीकत के बारे में बताते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में ये कक्षाएं चलाई जाती हैं। माथुर कहते हैं कि भले ही भीम आर्मी के गठन के समय दलितों की एक उपजाति का प्रमुखता से उल्लेख किया गया था लेकिन वक्त बीतने के साथ इस संगठन के दायरे में संभी वंचितों को शामिल कर ‘संविधान और महिला की गरिमा’ कायम रखने का लक्ष्य रखा गया है। वह कहते हैं, ‘ऊंची जातियों के बच्चों का भी हमारे स्कूलों में प्रवेश प्रतिबंधित नहीं हैं। हमारे भीतर कोई जातिगत घृणा नहीं है।’ 

चंद्रशेखर कहते हैं कि आने वाले समय में वह अपने संगठन के भीतर पिछड़ी जातियों को भी प्रतिनिधित्व एवं नेतृत्व देने जा रहे हैं। वह कहते हैं, ‘मुस्लिम भी बहुजन आंदोलन का एक हिस्सा हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि मुसलमानों को भी हमारे संगठन में ईमानदार प्रतिनिधित्व एवं आवाज मिले।’

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