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सरकारी बैंकों के साथ समीक्षा बैठक आज

सोमेश झा / नई दिल्ली September 24, 2018

वित्त मंत्री अरुण जेटली मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों और उच्च स्तरीय प्रबंधन के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में बैंकों के सालाना वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा होगी। बैंक आफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय की घोषणा के बाद सरकारी बैंकरों के साथ यह सरकार की पहली बैठक है। इन तीनों बैंकों के विलय के बाद बड़े बैंक का गठन होगा, जो  भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।

एक दिन चलने वाली इस बैठक में सरकारी बैंकों द्वारा खराब कर्ज की वसूली के लिए उठाए गए कदमों, चालू वित्त वर्ष में वित्तीय प्रदर्शन, सुधार के कदमों और वित्तीय समावेशन जैसे विषयों की समीक्षा होगी। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री शुरुआती भाषण देंगे, उसके बाद सरकारी बैंकों की समीक्षा होगी। 

बैंकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक, ग्रामीण विकास, सूक्ष्म लघु एवं मझोले (एमएसएमई) और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालयों के साथ भी चर्चा करेंगे। बैंकर खासकर एमएसएमई को बढ़ावा देने के कदमों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा आवास ऋण और इन मंत्रालयों के डिजिटलीकरण पर चर्चा होगी। 

बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) भी सरकारी क्षेत्र के बैंकरों के साथ चर्चा करेगा और इसमें नेतृत्व विकास कार्यक्रम पर चर्चा होगी जिससे उच्च पदों के लिए भविष्य के नेतृत्त्वकर्ता तैयार किए जा सकें। 

बैंकरों के साथ सरकार की बैठक आने वाली तिमाहियों में सरकारी बैंकों की पूंजी की जरूरतों पर प्रमुखता से बात होगी। सरकार की 2.11 लाख करोड़ रुपये पूंजी निवेश योजना की घोषणा पिछले साल की गई थी, जिसके तहत सरकार इस साल 560 अरब रुपये बैंकों में डाले जाएंगे। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों में 900 अरब रुपये डाले हैं। 
इक्रा द्वारा किए गए एक विश्लेषण के मुताबिक 11 सरकारी बैंकों का टियर-1 कैपिटल रेशियो 7.5 प्रतिशत रहै, जबकि न्यूनतम नियामकीय जरूरत 7 प्रतिशत की होती है। इससे संकेत मिलते हैं कि सरकारी बैंकों की भविष्य में घाटा उठाने की क्षमता बहुत सीमित है। 
वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग एजेंसी इक्रा के उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा, ‘इक्रा का अनुमान है कि सरकारी बैंकों को वित्त वर्ष 2019 के दौरान 1.2 से 1.8लाख करोड़ रुपये पूंजी की जरूरत है, तभी वे नियामकीय पूंजी अनुपात और पूंजी संरक्षण बफर (सीसीबी) की जरूरतें पूरी कर सकेंगे।’ 
संसदीय समिति को दिए गए ज्ञापन में इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने कहा कि वह सरकार से चाहता है कि सरकारी बैंकों की पूंजीगत जरूरतों का ‘वास्तविक आकलन’ करे क्योंकि 2.1 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण पैकेज की केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल की गई घोषणा के बावजूद खराब कर्ज की वजह से बैंकों का नुकसान बढ़ा है। 
बहरहाल चालू वित्त वर्ष में सरकार ने अब तक 6 सरकारी बैंकों में 136 अरब रुपये के करीब डाले हैं, जिनमें पंजाब नैशनल बैंक, आन्ध्रा बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं। यह पूंजी खासकर न्यूनतम पूंजी जरूरतों को देखते हुए डाली गई है, खासकर ऐसे समय में जब बैंकों को एडीशनल टियर 1 (एटी-1) बॉन्ड धारकों को भुगतान करना है। 
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सरकारी बैंकों ने 365 अरब रुपये गैर निष्पादित संपत्ति की वसूली की है, जो इसके पहले के वित्त वर्ष में हुई 745 अरब रुपये वसूली की करीब आधी है। सरकारी बैंकों का शुद्ध घाटा पहली तिमाही में 73 प्रतिशत घटकर 166 अरब रुपये रह गया है, जो इसके पहले की तिमाही में 627 अरब रुपये था। सरकारी बैंकों का प्रॉविजन कवरेज रेशियो (पीसीआर) चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 63.8 प्रतिशत रहा है, जो 2014-15 के 57.5 प्रतिशत पीसीआर से 6.3 प्रतिशत ज्यादा है। 
Keyword: Banker, Electronics, Rural Development, MSME, BBB, Arun Jaitely, Dena Bank, Vijaya Bank, Bank of Baroda,
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