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एनबीएफसी में निवेश घटाएंगे फंड हाउस

बीएस संवाददाता / मुंबई 09 24, 2018

आईएलऐंडएफएस की भुगतान में चूक का असर

बिजनेस स्टैंडर्ड एनबीएफसी में निवेश घटाएंगे फंड हाउसशेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज हुई, जो बताता है कि आईएलऐंडएफएस की तरफ से हुई भुगतान में चूक का असर बाजार में फैल रहा है। यह असर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तक फैल चुका है और क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका अगला शिकार म्युचुअल फंड होंगे और यहां भी रेशानी देखने को मिलेगी।

म्युचुअल फंड लगातार एनबीएफसी के शेयर और ऋणपत्र खरीद रहे थे और एनबीएफसी की वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में इनका निवेश मार्च 2016 से तीन गुना हो गया है। मार्च 2018 में म्युचुअल फंडों के पास एनबीएफसी के कुल बकाया वाणिज्यिक प्रतिभूतियों का करीब 60 फीसदी था, जो मार्च 2016 में 41 फीसदी था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि म्युचुअल फंड एनबीएफसी में अपना निवेश घटा सकते हैं या फिर इसे सीमित कर सकते हैं जबकि ज्यादातर एनबीएफसी की क्रेडिट रेटिंग बनी हुई है। बैंकों में एनबीएफसी की प्रतिभूतियां को लेकर भी निवेश की इच्छा अनिश्चित है क्योंकि उनका निवेश पहले ही कुल कर्ज के 6 फीसदी पर पहुंच चुका है। 

म्युचुअल फंड की तरफ से ऋण पत्रों में किए गए कुल निवेश के प्रतिशत के तौर पर कॉरपोरेट बॉन्ड व वाणिज्यिक प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी पिछले पांच सालों में मार्च 2012 के 25 फीसदी के मुकाबले मार्च 2018 में बढक़र 65 फीसदी के पार निकल गई।

अफवाह के चलते पिछले पखवाड़े में बाजार में आया उतार-चढ़ाव निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है और एनबीएफसी की वाणिज्यिक प्रतिभूतियों का प्रतिफल 175 आधार अंक बढ़ा है। निवेशकों को आश्वस्त करने के लिए कुछ कंपनियों ने कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में वे वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में अपना निवेश व निर्भरता घटाएंगी ताकि नकदी की स्थिति ठीक की जा सके। हालांकि अगर वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में खरीद की रुचि और घटती है तो इसका प्रतिफल बढ़ेगा और इससे म्युचुअल फंडों को नुकसान होगा।

क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट में कहा गया है, अपेक्षाकृत कमजोर कीमत शक्ति वाली एनबीएफसी शुद्ध ब्याज मार्जिन में कमी देखेंगी क्योंकि नकदी की सख्त स्थिति आदि के चलते उनकी फंडिंग की लागत बढ़ेगी।मार्च 2018 तक एनबीएफसी के लिए गैर-बैंकिंग स्रोत में 74 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मतलब यह है कि पिछले कुछ सालों में एनबीएफसी ने बैंक उधारी के बजाय संसाधन जुटाने के लिए ज्यादा ऋणपत्र जारी किया है।

यह म्युचुअल फंडों के लिए जोखिम पैदा करता है क्योंकि एनबीएफसी ने वाणिज्यिक प्रतिभूतियों समेत अल्पावधि वाली फंडिंग के लिए ज्यादा ऋणपत्र जारी कर रही है, जो इसके पुनर्वित्त को लेकर जोखिम में इजाफा करता है। एनबीएफसी उद्योग की कुल फंडिंग के करीब 41 फीसदी के लिए वित्त वर्ष 2019 में पुनर्वित्त जरूरी होगा, जो म्युचुअल फंड उद्योग को शेयर बाजार के मौजूदा उतारचढ़ाव के दौर में और क्षणभंगुर बनाता है।

पिछले शुक्रवार को डेट फंड ने डीएचएफएल की वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में अपना निवेश 18 फीसदी छूट पर बेच दिया था, जिससे एनबीएफसी के शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई थी क्योंकि निवेशकों को लगा कि एनबीएफसी के साथ नकदी की दिक्कत है। डीएचएफएल का शेयर पिछले शुक्रवार को 44 फीसदी टूटा था और सोमवार को इसमें महज 12 फीसदी की भरपाई हुई।

हालांकि कंपनियों की तरफ से यह आश्वासन दिए जाने के बाद कि ऋण प्रतिभूतियां निवेश श्रेणी वाली हैं और उनकी वित्तीय देनदारी को लेकर किसी तरह की चूक नहीं हुई है, एनबीएफसी के शेयर में सोमवार को भी नाटकीय रूप से फिसलन जारी रही। 
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