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वित्तीय कंपनियों लेकर चिंतित नहीं बैंक

अभिजित लेले और अद्वैत राव पालेपू /  September 23, 2018

वित्तीय कंपनियों के लिए नकदी संकट को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को दरकिनार करते हुए देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने कहा है कि मजबूत नकदी स्थिति की वजह से तरलता को लेकर स्थिति चिंताजनक नहीं है। साथ ही वित्तीय कंपनियों के लिए उच्च गुणवत्ता के साथ वित्तीय सुविधा मुहैया कराई जा रही है।

हालांकि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएलऐंडएफएस) और उसकी ऋण इकाई द्वारा डिफॉल्ट के बाद बैंक वित्तीय कंपनियों से किसी तरह के जोखिम को लेकर हालात पर पुनविर्चार कर रहे हैं। बाजार में शेयरों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा जारी बॉन्डों में अस्थिरता ने बैंकों को सतर्क कर दिया है।  

बैंकों तेज रफ्तार के साथ (जुलाई 2018 तक सालाना आधार पर 40 प्रतिशत वृद्घि) वित्तीय कंपनियों को ऋण प्रदान किया है। आरबीआई के आंकड़े के अनुसार जुलाई 2018 में वित्तीय कंपनियों पर बकाया बैंक ऋण 4.73 लाख करोड़ रुपये पर था जो जुलाई 2017 में 3.37 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि वित्तीय कंपनियों के 

लिए ऋण मार्च 2018 के 4.96 लाख करोड़ रुपये के स्तर से 4.6 प्रतिशत तक घटे हैं। पिछले सप्ताह आईएलऐंडएफएस में मौजूदा संकट ने डीएचएफएल और इंडियाबुल्स हाउसिंग के शेयरों में बिकवाली दबाव पैदा कर दिया था, क्योंकि इन कंपनियों को भय है कि आईएलऐंडएफएस जैसी स्थिति सभी एनबीएफसी को न झेलनी पड़े।

प्रत्यक्ष ऋणों के साथ साथ, बैंकों ने वित्तीय कंपनियों द्वारा जारी वाणिज्यिक पत्रों और डिबेंचर्स के जरिये भी उनमें बड़ा निवेश कर रखा है। एक निजी बैंक में जोखिम प्रमुख ने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम को लेकर चिंता स्वाभाविक है। लेकिन घबराने और डरने की कोई जरूरत नहीं है। वित्तीय कंपनियों को उधारी के मामले में बैंक अब सतर्कतापूर्ण रुख अपनाएंगे। कम रेटिंग वाली वित्तीय कंपनियों के लिए मूल्य निर्धारण बदलेगा। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी के लिए उधारी की गति में भी कुछ नरमी आ सकती है।

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने एक बयान में कहा कि एसबीआई निजी और सरकारी क्षेत्र की एनबीएफसी को नियामकीय नीतिगत ढांचे में लाए जाने का समर्थन करता है। दरअसल, को-एंडिंग मॉडल पर ताजा नियामकीय दिशा-निर्देशों से एसबीआई और प्राथकि क्षेत्रों के लिए उधारी बढ़ाने के लिए गैर-जमा स्वीकारने वाली एनबीएफसी के बीच संबंधों के लिए अवसर और अधिक मजबूत हुए हैं। 

बैंकों का कहना है कि वित्तीय कंपनियों के लिए उधारी ऐसे समय में प्रत्यक्ष उधारी के लिए एक विकल्प है जब ऋण वृद्घि की रफ्तार धीमी है। इसे अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति वाले कर्जदार (इस मामले में फाइनैंस कंपनी) को उधारी के लिए कम जोखिमपूर्ण पोशकश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि डिफॉल्ट की आशंका कम है। बैंक बैलेंस शीट बढ़ाने और कुछ आय कमाने में सक्षम हैं। वित्तीय कंपनियों के लिए बैंकों द्वारा उधारी ट्रेजरी बिलों जैसी योजनाओं में रकम लगाने की तुलना में बेहतर आय दिलाती है। 

इक्रा ने जून में एनबीएफसी पर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एनबीएफसी को रकम मुहैया कराने वाले बैंकों के शेयर में वित्त वर्ष 2017 और अप्रैल-सितंबर 2017 के दौरान भारी गिरावट के बाद वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही से तेजी शुरू हो गई थी। एनबीएफसी को बैंक ऋण में मार्च 2018 में अच्छी तेजी दर्ज की और यह फरवरी 2018 के स्तर के मुकाबले बढक़र 1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। मार्च 2018 में एनबीएफसी के लिए बैंकों का बकाया ऋण सालाना आधार पर 27 प्रतिशत तक बढ़ गया। वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही के बाद से एनबीएफसी के लिए बैंक ऋण बढ़ा है। 
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