बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या खुदरा एनबीएफसी में आएगी और कमजोरी?
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क्या खुदरा एनबीएफसी में आएगी और कमजोरी?

कृष्ण कांत /  September 23, 2018

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों की कीमतों में शुक्रवार को भारी गिरावट से कुछ विश्लेषक यह विचार करने को मजबूर हो गए हैं कि क्या इस क्षेत्र में गिरावट आनी बाकी थी? बॉन्ड प्रतिफल में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद इस क्षेत्र का मूल्यांकन अच्छा है। हालांकि बॉन्ड प्रतिफल बढऩे से ऋणदाताओं के फंड की लागत बढ़ेगी, जिससे उनका मार्जिन प्रभावित होगा। देश की सबसे बड़ी खुदरा एनबीएफसी अपनी 12 महीने की आमदनी के 23.5 गुणा पर कारोबार कर रही हैं। यह इस क्षेत्र के 15 वर्षों के आमदनी गुणक 18.4 गुना से करीब 500 आधार अंक अधिक है। शीर्ष गैर-बैंक ऋणदाता बेंचमार्क निफ्टी 50 सूचकांक में अपने मूल्यांकन की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि पहले डिस्काउंट पर रहते थे। 

इस क्षेत्र के मझोले शेयरों (हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन) का मूल्यांकन और अधिक बना हुआ है। मझोली एनबीएफसी का मूल्यांकन पिछले 12 महीनों के दौरान उनकी आमदनी का 24.4 गुणा बना हुआ है, जो पिछले 15 वर्षों के पी/ई गुणक 13.9 गुणा का करीब दोगुना है। 

इन शेयरों में से ज्यादातर शेयर दोनों बेंचमार्क सूचकांकों और इस क्षेत्र की अगुआ एचडीएफसी के मुकाबले प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। एचडीएफसी में सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग ऋणदाता है, जिसकी हाल के वर्षों में बाजार हिस्सेदारी घटने के बावजूद इस क्षेत्र के राजस्व, लाभ और बाजार पूंजीकरण में करीब आधा हिस्सा है। 

एचडीएफसी के सबसे बेहतर बैलेंस शीट अनुपात के कारण कंपनी का शेयर हमेशा व्यापक बाजार के मूल्यांकन से ऊपर रहा है। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक और एमडी जी चोक्कालिंगम ने कहा, ‘खुदरा एनबीएफसी को दो चीजों से मदद मिली। पहली, वर्ष 2014 की दूसरी छमाही की शुरुआत से ब्याज दरों में गिरावट आई। दूसरी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फंसे कर्जों के कारण कर्ज की बढ़ती मांग पूरी करने में असमर्थ थे। हालांकि अब तक मिल रहे ये फायदे कमजोर पडऩे लगे हैं क्योंकि ब्याज दरें बढऩे लगी हैं और बैंक भी खुदरा ऋण वितरण में ज्यादा आक्रामक बन रहे हैं।’

यह विश्लेषण उन 13 खुदरा एनबीएफसी के सालाना वित्तीय आंकड़ों पर आधारित है, जिनके पिछले 15 वर्षों के वित्तीय आंकड़े उपलब्ध हैं। इस नमूने में एचडीएफसी, एलआईसी हाउसिंग, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस और बजाज फाइनैंस आदि शामिल हैं। 

खुदरा एनबीएफसी के लिए फंड की औसत लागत करीब 190 आधार अंक घटी है। यह वित्त वर्ष 2012-13 में 10 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 2018 के दौरान घटकर 8.1 फीसदी पर आ गई है। यह गिरावट एचडीएफसी से इतर ऋणदाताओं के लिए और अधिक रही है। उनकी उधारी की औसत लागत वित्त वर्ष 2018 में घटकर 8.5 फीसदी पर आ गई, जो वित्त वर्ष 2013 में औसतन 10.5 फीसदी थी। 10 वर्ष की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 2013 की अंतिम तिमाही में 9.5 फीसदी था, जो 2016 की आखिरी तिमाही में 6.5 फीसदी के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। तब से बॉन्ड प्रतिफल 8 फीसदी का स्तर पार कर गया है, जिससे एनबीएफसी की उधारी लागत पर दबाव बढ़ा है। 

विश्लेषकों का कहना है कि जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी का माहौल होता है, तब फंड की कम लागत के कारण बैंकों को एनबीएफसी पर बढ़त मिलती है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘वाणिज्यिक बैंकों के पास कम लागत की बचत एवं चालू खाता जमाएं होती हैं, जिससे वे एनबीएफसी की तुलना में फायदे में होते हैं। एनबीएफसी को खुले बाजार से उधारी लेनी पड़ती है।’

ब्याज दरों में तेजी के माहौल में छोटी एनबीएफसी सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। उन्हें एचडीएफसी जैसी शीर्ष रेटिंग प्राप्त एनबीएफसी की तुलना में बॉन्ड बाजार से उधार लेने के लिए ज्यादा ब्याज दरों का भुगतान करना पड़ता है। विश्लेषकों का कहना है कि हाल की तिमाहियों में म्युचुअल फंडों में निवेश घटा है, जिससे एनबीएफसी को फंड जुटाने में दबाव का सामना करना पड़ेगा।

धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘2016 में नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर लागू से कारोबार में अड़चनों के बाद धनाढ्य लोगों और कारोबारियों ने म्युचुअल फंडों में निवेश बढ़ाया था। इस पैसे का ज्यादातर निवेश एनबीएफसी के बॉन्डों में हुआ। अब फंड की आवक घट रही है, जिससे एनबीएफसी के लिए फंड जुटाना मुश्किल और महंगा होता जा रहा है।’

इससे बहुत सी एनबीएफसी को ऋण वृद्धि में धीमे चलने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। वहीं उनके मार्जिन एवं लाभ में भी कमी आएगी, जिससे उनके मूल्यांकन की रेटिंग कम होगी।  
Keyword: NBFC, bank, microfinance, debt, demonetisation, Bond, Bond yield, lender, Margin, HDFC,
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