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आईएलऐंडएफएस के ऋण संकट से फंड सतर्क

जश कृपलानी /  September 23, 2018

आईएलऐंडएफएस के वाणिज्यिक पत्रों की रेटिंग एए से घटाए जाने से डेट फंड प्रबंधकों में बेचैनी पैदा हो गई है और वे पोर्टफोलियो में किसी संभावित जोखिम के खिलाफ पहले से ही बचने के उपाय कर रहे हैं। डेट योजनाओं में बड़े कॉरपोरेट निवेशकों से रिडम्पशन बढ़ गया है जिससे फंड प्रबंधक परिसंपत्ति बिक्री के जरिये नकदी स्तर बढ़ा रहे हैं। 

बड़े आकार के एक फंड हाउस के निर्धारित आय के प्रमुख के अनुसार, फंड प्रबंधक इसे लेकर चिंतित हैं कि आईएलऐंडएफएस संकट से तरलता में सख्ती बढ़ सकती है और इसका व्यापक प्रभाव देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘इस मामले को यदि सही ढंग से नहीं सुलझाया जाता है तो हालात बदतर हो सकते हैं।

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार प्रभावित हुआ है।’ कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में कुछ प्रभाव पहले ही देखा जा चुका है। एक डेट फंड प्रबंधक के अनुसार, पूर्व एहतियाती उपायों के जोखिम से परिसंपत्ति-देनदारी असमानता और अपने बहीखाते पर अधिक जोखिम वाली आवास वित्त कंपनियां (एचएफसी) प्रभावित हो सकती हैं। वह कहते हैं, ‘आईएलऐंडएफएस अधिक कर्ज जोखिम वाली कंपनी है और फंड प्रबंधक फिर से कोई रेटिंग डाउनग्रेड का जोखिम नहीं चाहते हैं।’

धारणा में यह बदलाव उन एचएफसी के लिए शुभ संकेत नहीं है जो अपने वित्त पोषण के लिए म्युचुअल फंडों पर निर्भर हैं। प्राइम एमएफ डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि एचएफसी को म्युचुअल फंडों से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की डेट फंडिंग प्राप्त हुई है जो सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए बैंकों की सकल उधारी के एक-तिहाई से अधिक है।

एचएफसी पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि संक्षिप्त अवधि के लिए परिसंपत्ति-देनदारी में असमानता चिंता की एक मुख्य वजह है। जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है, ‘एचएफसी संक्षिप्त अवधि की उधारी की ओर आकर्षित हुई हैं, क्योंकि संक्षिप्त अवधि की उधारी के बीच दरें लंबी अवधि की उधारी की तुलना में लगभग 100 आधार अंक सस्ती हैं। इससे संक्षिप्त अवधि की श्रेणी (1 साल तक) में परिसंपत्ति देनदारी असमानता पैदा हुई है।’

हाल में डीएसपी एमएफ ने अपने कुछ डेट निवेश दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) को बेचे। एक टीवी साक्षात्कार में, डीएसपी एमएफ के अध्यक्ष कल्पेन पारेख ने कहा कि फंड हाउस ने बुधवार को डीएचएफएल के 3 अरब रुपये के ऋण पत्र बेचे।

पारेख ने कहा कि फंड हाउस ने न सिर्फ डीएचएफएल के पत्र बेचे हैं, बल्कि उसने परिपक्वता घटाने और कुछ खास रिडम्पशन के की योजनाओं के तहत हाल के महीनों में दर्जनों बॉन्डों की बिक्री की। डीएचएफएल के प्रबंधन ने आश्वस्त किया है कि उन्हें किसी तरह की परिसंपत्ति-देनदारी असमानता का सामना नहीं करना पड़ रहा है और कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है।

हालांकि फंड प्रबंधकों का मानना है कि डीएचएफएल के पत्रों को 11 प्रतिशत के प्रतिफल पर बेचा गया जबकि ऐसे पत्रों को 8-9 प्रतिशत के बीच बेचा जाता है जिससे व्यवस्था में नकदी की सख्ती का संकेत मिलता है।

कोटक एमएफ की मुख्य निवेश अधिकारी (डेट) लक्ष्मी अय्यर ने कहा, ‘खासकर एचएफसी और एनबीएफसी के लिए, प्रतिफल पिछले 15 दिनों के दौरान 50-75 आधार अंक बढ़ा है। लोग अलग अलग पोर्टफोलियो को देखते हुए ट्रिपल ए और नॉन-ट्रिपल ए एनबीएफसी के बारे में बात कर रहे हैं।’ एक अन्य डेट फंड प्रबंधक ने कहा, ‘पिछले एक साल में कंपनियों के लिए उधारी लागत 100-1500 आधार अंक के बीच बढ़ी है। हालांकि यह एनबीएफसी के लिए अधिक पा्रसंगिक है, क्योंकि वे थोक बाजार पर निर्भर हैं। थोक बाजार में दरों में वृद्घि पर बेहद जल्द प्रतिक्रिया दिखती है।’ 
विश्लेषकों का कहना है कि जहां डेट फंड प्रबंधक अपने निवेश को लेकर अधिक चयनशील हो रहे हैं, वहीं एचएफसी को भी अब बैंकों द्वारा पैदा किए गए मजबूत प्रतिस्पर्धी जोखिम से मुकाबला करना होगा। फंड प्रबंधक ने कहा, ‘बैंक अब मॉर्गेज क्षेत्र में अधिक आक्रामक हुए हैं। वे एनबीएफसी की तुलना में बेहतर देनदारी जैसे कई मामलों में मजबूत बने हुए हैं। तेल प्रतिस्पर्धा के अलावा बढ़ती उधारी लागत के साथ से एचएफसी का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।’
इसके अलावा, फंडों में बिक्री के जोखिम से भी स्थिति जटिल हुई है। अक्सर म्युचुअल फंडों को सितंबर में बिकवाली दबाव का सामना करना पड़ता है क्योंकि कंपनियां अपनी कर देनदारियां निपटाने के लिए पैसा एकत्रित करती हैं। फंड प्रबंधकों का कहना है कि मौजूदा हालात में स्थिति और खराब हो सकती है। आईएलऐंडएफएस घटनाक्रम से नजदीकी से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे डेट योजनाओं में कुछ बड़े कॉरपोरेट निवेशक परेशान हैं और इनमें से कुछ निवेशक म्युचुअल फंड बिक्री के लिए अनुरोध पहले ही भेज चुके हैं। डेट योजनाओं में निवेशक धारणा पहले से ही कमजोर थी, क्योंकि ऐसी योजनाओं इस वित्त वर्ष में 500 अरब रुपये से अधिक की बिकवाली का सामना करना पड़ा है। एडलवाइस फाइनैंशियल सर्विसेज के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (निर्धारित आय) अजय मंगलूनिया ने कहा कि ताजा परिसंपत्ति बिक्री म्युचुअल फंडों के पुनर्गठन प्रयासों की वजह से भी हुई है। उन्होंने कहा, ‘डेट निवेश में जोखिम से निपटने की अधिक क्षमता वाले बैंकों के विपरीत, म्युचुअल फंड हालात बिगडऩे से पहले अपना निवेश बेचने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।’
मंगलूनिया ने कहा कि फंड प्रबंधक बेहद सतर्क हैं क्योंकि वे कोई नुकसान उठाए बगैर समस्याओं के जाल में फंसने से बचना चाहते हैं। मिरई एएमसी के प्रमुख (निर्धारित आय) महेंद्र जाजू कहते हैं, ‘इन कंपनियों (एचएफसी) के प्रबंधन आगे आए हैं और उन्होंने भरोसे के साथ यह कहा है कि वे अच्छी स्थिति में हैं। भविष्य में हमें हालात में सुधार लाने की जरूरत होगी।’ 
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