बिजनेस स्टैंडर्ड - रेल उधारी का बोझ उठाएगी सरकार
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रेल उधारी का बोझ उठाएगी सरकार

शाइन जैकब / नई दिल्ली 09 23, 2018

राजस्व सृजन पर्याप्त नहीं, कर्ज की होगी जरूरत

बिजनेस स्टैंडर्ड रेल उधारी का बोझ उठाएगी सरकारबुनियादी ढांचे के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए वित्त मंत्रालय ने भारतीय रेल से आगे और उधारी लेने को कहा है। साथ ही यह भी आश्वासन दिया है कि वित्त मंत्रालय कर्ज के मूल हिस्से को पुनर्भुगतान के वक्त चुका देगा, जबकि रेलवे को ब्याज का भुगतान करना होगा।   

सूत्रों के मुताबिक इस मसले पर जल्द ही अंतिम फैसला होगा। रेलवे चाहता है कि या जो सकल बजटीय समर्थन (जीबीएस) से अतिरिक्त धन का आवंटन किया जाए या वित्त मंत्रालय ब्याज और मूलधन दोनों का ही भुगतान करे। एक आधिकारिक सूत्र ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, ‘हम इस मसले पर अंतिम फैसला जल्द लेने के लिए व्यय विभाग के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह देखना है कि 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई आर्थिक समीक्षा की बैठक के बाद उनका अंतिम फैसला क्या होता है।’ 

निवेश की योजना 

कुल: 2014-15 से लेकर 5 साल में 8.56 लाख करोड़ रुपये   

कहां से आएगा धन (प्रतिशत में)

सकल बजट समर्थन 30
कर्ज 28
आंतरिक स्रोत 15
राज्य जेवी 14
पीपीपी 13
स्रोत: भारतीय रेल 

दिलचस्प है कि इस साल केंद्रीय बजट में 2017-18 के लिए बजटीय समर्थन 150 अरब रुपये कम कर दिया था और 2018-19 के लिए 531 अरब रुपये की राशि रखी थी, जबकि पिछले बजट में 550 अरब रुपये आवंटित किया गया था। यह उम्मीद की गई थी कि बड़ी निवेश योजना 2 लाख करोड़ ररुपये कम पड़ेंगे, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2015-19 तक 8.56 लाख करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। 

अधिकारी ने कहा, ‘हमारे कर्ज की लागत भी बढ़ रही है और इसके साथ ही हमारी सामाजिक सब्सिडी को बोझ भी है। ऐसे में हम अपने दम पर आगे उधारी नहीं लेना चाहते।’

इस साल के बजट के मुताबिक कर्ज की लागत चालरू वित्त वर्ष में 12 प्रतिशत बढक़र 192 अरब रुपये के करीब होने की संभावना है, जो पहले के वित्त वर्ष में 170.7 अरब रुपये था। चालू वित्त वर्ष में रेलवे ने 1,48 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है, जिसमें से 38 प्रतिशत उधारी से आने की उम्मीद है। 

2017 में बजट के विलय के बाद सरकार ने रेलवे द्वारा दिया जाने वाला लाभांश खत्म कर दिया। बहरहाल सूत्रों का कहना है कि व्यय और पेंशन का भारी बोझ है। ऐसे में अपने राजस्व से विस्तार, विद्युतीकरण और पटरियों का नवीकरण रेलवे के लिए असंभव है। 

मोदी सरकार ने कुल 8.5 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है, जिसमें जीबीएस करीब 30 प्रतिशत और कर्ज की भी हिस्सेदारी इसके बराबर ही करीब 28 प्रतिशत है। रेलवे की योजना के मुताबिक 1.99 लाक करोड़ रुपये नेटवर्क कंजेशन के काम, और समर्पित माल ढुलाई गलियारे जैसी योजनाओं पर खर्च होंगे। इसके अलावा 1 लाख करोड़ रुपये स्टेशन पुनर्विकास योजना और 650 अरब रुपये तेज रफ्तार रेल गलियारे पर खर्च कि या जाना है।
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