बिजनेस स्टैंडर्ड - ब्रेक्सिट की आर्थिकी और राजनीति
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ब्रेक्सिट की आर्थिकी और राजनीति

पार्थसारथि शोम /  September 20, 2018

ब्रेक्सिट के आर्थिक और राजनीतिक निहितार्थों, उसके सकारात्मक और नकारात्मक तत्त्वों का आकलन करना आसान काम नहीं है। विस्तार से बता रहे  हैं पार्थसारथि शोम 

 
भारत में या दुनिया के किसी भी अन्य देश में ब्रेक्सिट को लेकर सुविचारित आलेख देखने को नहीं मिला है। चाहे जो भी हो, यूनाइटेड किंगडम के नागरिकों ने भले ही अत्यंत मामूली मार्जिन से ही सही लेकिन इसके पक्ष में मतदान किया है। याद रहे कि जो लोग इसके पक्ष में हैं, उनका यही मानना था कि यूरोप के अन्य प्रवासियों ने उनके रोजगार छीन लिए हैं। उनकी वजह से उन्हें उचित वेतन और परिस्थितियों में रोजगार नहीं मिल रहा है। इन लोगों ने खामोशी से ही सही लेकिन बेहद प्रभावी ढंग से मतदान किया। हालांकि ब्रेक्सिट को लेकर राजनेताओं के अलावा ब्रेक्सिट से जुड़े किसी अन्य पक्ष की ओर से मीडिया में कोई उचित विश्लेषण देखने को नहीं मिला है। क्या इसे उनके इस भरोसे के रूप में देखा जा सकता है कि ब्रेक्सिट सही है शायद इसका जवाब हां है। 
 
जुलाई में यूनाइटेड किंगडम की सरकार ने एक वक्तव्य जारी किया और उसके बाद एक श्वेतपत्र जारी किया गया। अगर उन पर गौर किया जाए तो इस नतीजे पर पहुंचना मुश्किल नहीं है कि अन्य चीजों में कोई बदलाव नहीं आएगा। यानी यथास्थिति बरकरार रहेगी। यकीनन भविष्य में चुनिंदा मसलों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश है लेकिन सभी मामलों में चर्चा से यही बात निकल कर आती है कि स्वाभाविक रूप से वे दोनों पक्षों के लिए दूसरा श्रेष्ठ विकल्प ही होंगी। कुलमिलाकर देखा जाए तो आर्थिक पैकेज की बात समझ में आती है। वस्तु व्यापार स्थापित नियम सिद्घांतों पर जारी रहेगा और ब्रेक्सिट के बाद भी यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ के बीच अबाध व्यापार जारी रहेगा। 
 
इसके बावजूद कोई विश्लेषक इस बात का उल्लेख नहीं कर रहा है कि आयरलैंड ने पहले उत्तरी आयरलैंड को व्यापारिक सीमा के रूप में स्वीकार करने का जो धुर विरोध किया था वह तत्काल हल हो जाएगा। वैश्विक संदर्भ में समग्र रूप से देखा जाए तो वस्तुओं का मुक्त व्यापार यूनाइटेड किंगडम के आसन्न लक्ष्य के रूप में समझ में आता है। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ वस्तु व्यापार इसमें शामिल हो जाएगा। इसके लिए यूरोपीय संघ ने यह स्वीकार कर लिया है कि वे नियमन और स्वीकृति में यूरोपीय संघ के मानकों का पालन करेंगे। कुछ लोगों ने इसे अधीनता की संज्ञा दी है। वे यह बात भूल गए हैं कि कृषि समेत किसी भी कारोबारी साझेदार के साथ वस्तु व्यापार बहुसांस्थानिक नियमन के अधीन होता है। 
 
सेवाओं की बात करें तो यूरोपीय संघ को लग सकता है कि उसके पास अपने वित्तीय क्षेत्र के विकास का अवसर है। निस्संदेह यूनाइटेड किंगडम के वित्तीय क्षेत्र में कई तरह के समायोजन देखने को मिल सकते हैं। इसमें दो राय नहीं कि वह वित्तीय क्षेत्र के हब की पुरानी भूमिका कायम रखना चाहेगा लेकिन यूरोपीय संघ इसे समाप्त करना चाहता है।  यूनाइटेड किंगडम को अनिश्चितता के रूप में थोड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। चाहे जो भी हो लेकिन यह जोखिम उठाना होगा क्योंकि यूनाइटेड किंगडम ने एक आधुनिक वित्तीय केंद्र की स्थापना की है। उसने किसी भी अन्य औपनिवेशिक शक्ति की तुलना में अंतरराष्ट्रीय वित्त और व्यापार का बेहतर प्रबंधन किया। ऐसे में यह चकित करने वाली बात नहीं है कि कुछ ही वित्तीय संस्थानों ने बाहर निकलने की हड़बड़ी दिखाई है। तीसरा, अंग्रेजी का सामान्य भाषा बने रहना निश्चित तौर पर यूनाइटेड किंगडम को निकट भविष्य में मजबूत बनाए रखेगा। 
 
प्रशासनिक और आनुपातिक क्रियान्वयन में चुनौतियां हैं। उदाहरण के लिए यूनाइटेड किंगडम ने यूरोपीय संघ के लिए सीमा शुल्क एकत्रित करने का प्रस्ताव रखा है हालांकि यूरोपीय संघ उसके लिए ऐसा नहीं कर रहा है। यूरोपीय संघ इसके लिए क्यों सहमत होगा यह बात समझ से परे है। इसी तरह यूनाइटेड किंगडम ने जोर दिया है कि वह पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्र में, उपभोक्ता संरक्षण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अन्य क्षेत्रों में सार्थक नियमन का पालन करेगा और करीबी संबंध कायम करके चलेगा। उसने कहा कि वह उच्च नियमन मानकों का पालन करते हुए...विकल्प तलाशेगा और नए रिश्ते कायम करेगा। यूनाइटेड किंगडम चाहता है कि वह यूरोपीय न्यायिक अदालत से परे अपने और यूरोपीय संघ के बीच के सारे मामले विशेष रूप से नियुक्त समिति के जरिये निपटाए। यूरोपीय संघ की ओर से इसका तीव्र विरोध लाजिमी प्रतीत होता है। 
 
मुझे लगता है कि दोनों आधिकारिक दस्तावेजों में भी ब्रेक्सिट की मूल वजह यानी प्रवासियों के मुद्दे से भी अधिक स्पष्ट तरीके से निपटा जाना चाहिए था। इस बात को समझा जा सकता है कि यूरोपीय संघ से यूनाइटेड किंगडम को होने वाला प्रवासन, यूनाइटेड किंगडम से यूरोपीय संघ को होने वाले प्रवासन से तीन गुना रहा है। यह अस्थायी है ब्रेक्सिट जनमत संग्रह प्राथमिक तौर पर इस पर केंद्रित रहा। चेकर्स वक्तव्य में कहा गया कि मुक्त आवागमन को खत्म कर यूनाइटेड किंगडम को यह तय करने का अधिकार दिया जाए कि कौन वहां आएगा और कौन नहीं। इस समाचार पत्र में जुलाई माह में कहा गया था कि चेकर्स वक्तव्य मुक्त आवागमन को लेकर कोई चर्चा नहीं चाहता। श्वेत पत्र ने कहा कि आव्रजन विधेयक में आव्रजन सलाहकार समिति की रिपोर्ट नजर आएगी। फिलहाल विनिर्माण, कृषि, होटल सेवाओं आदि के श्रमिकों के आवागमन की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। 
 
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत और उभरते बाजारों पर इसका क्या असर होगा? संभव है कि ब्रेक्सिट के बाद श्रमिकों की बढ़ी हुई मांग गैर यूरोपीय संघ वाले क्षेत्रों से श्रमिकों की आवक की राह खोल दे। हालांकि यूरोपीय संघ को और वहां से श्रमिकों की आवाजाही सीमित होगी लेकिन शेष विश्व के लिए काफी मौके रहेंगे। लब्बोलुआब यह कि ब्रेक्सिट का नफा-नुकसान दोनों हैं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, ब्रेक्सिट का आकलन सांख्यिकीय आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। यूरोपीय संघ की बात करें तो जर्मनी और फ्रांस ने यूनाइटेड किंगडम के प्रति अपनी खामोशी भरे रुख से से बढ़त हासिल कर ली है। 
 
यूरोप के इतिहास पर गौर करें तो ब्रिटेन ने करीब तीन सदियों तक नेतृत्व संभाला। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद उसका यह दर्जा अमेरिका के हाथों छिन गया। यूरोपीय संघ में शामिल होने के बाद भी उसके कद में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। अब उसने अब अपना खोया गौरव दोबारा पाने की एक दिलचस्प राह चुनी है। देखना है कि यह मामला अब केवल यूरोप तक सीमित रहता है या शेष विश्व पर भी इसका असर होगा।
Keyword: brexit, britain, india, UK,,
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