बिजनेस स?टैंडर?ड - अमूल आइसक्रीम : विवादों का जमकर किया मुकाबला
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अमूल आइसक्रीम : विवादों का जमकर किया मुकाबला

सोहिनी दास /  09 20, 2018

कड़ी प्रतिक्रिया

ऐसा पहली बार नहीं है जब जीसीएमएमफ के ब्रांड अमूल ने आरोपों का खंडन करने के लिए
गैर-परंपरागत तरीका अपनाया हो

बिजनेस स?टैंडर?ड अमूल आइसक्रीम : विवादों का जमकर किया मुकाबलापिछले कुछ दिनों से अमूल ब्रांड को सोशल मीडिया पर तीखे हमलों का शिकार होना पड़ा है क्योंकि यह कहा गया है कि उसकी आइसक्रीम में जानवरों की चर्बी पड़ी होती है। अमूल अपनी आइसक्रीम को पूरी तरह शाकाहारी बताता है और इसके पीछे पड़े आलोचकों ने आरोप लगाया कि कंपनी अपने ग्राहकों को ईमानदारी से सही बात नहीं बता रही है। शुरू में चंद लोगों ने ही इस तरह के आरोप लगाए थे लेकिन बाद में यह ब्रांड जबानी हमलों का बुरी तरह शिकार बन गया।

कंपनी ने इस पर तुरंत अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी और प्रेस विज्ञप्ति पर निर्भर रहने के बजाय इसने अपने प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी का एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए ट्रोल की निंदा की। इसमें अमूल गर्ल का भी इस्तेमाल किया गया जिसने असामान्य रूप से एकदम सीधे लहजे में ब्रांड की शाकाहारी पहचान का संदेश दिया। ब्रांड अमूल के मालिक गुजरात सहकारी दुग्ध वितरण महासंघ (जीसीएमएमएफ) के साथ ऐसा पहली बार नहीं है जब इसने अपने ब्रांड की सुरक्षा के लिए अपरंपरागत तरीका चुना हो। जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी कहते हैं कि करीब दो साल पहले भी इसी तरह की बातें व्हाट्सऐप के जरिये फैल रही थीं कि अमूल के उत्पाद में जानवरों से जुड़ी चीजें इस्तेमाल की जाती हैं। वह कहते हैं, 'उस वक्त हमने व्हाट्सऐप संदेश तैयार किया और यह स्पष्ट किया कि हमारे उत्पाद पूरी तरह से शाकाहारी हैं।' 

2018 में एक वीडियो जारी हुआ जिसमें युवाओं का एक समूह यह दावा कर रहा था कि अमूल आइसक्रीम में सुअर का वसा है जो कि 'हराम' है। इस समूह ने लोगों को इस कंपनी के उत्पाद का बहिष्कार करने की बात कही। अमूल ने गलत सूचनाओं का विरोध करने के लिए एक रणनीतिक अभियान चलाने का फैसला किया। इसने अपनी मार्केटिंग टीम से ग्राहकों और कारोबारी साझेदारों को दोबारा यह आश्वासन देने को कहा कि इसके उत्पाद और इसमें मिलाई गई सामग्री 100 फीसदी शाकाहारी है। इसने कंपनी से संपर्क करने वाले प्रत्येक ग्राहकों को पूरी गंभीरता से जवाब दिया। 

अमूल ने 5 सितंबर को अपनी वेबसाइट पर एक विस्तृत नोट जारी किया जिसमें इसने अपना शाकाहारी सामग्री से जुड़ा प्रमाणपत्र भी पेश किया। सोढ़ी कहते हैं, 'सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन और मार्केटिंग के जरिये हमने यह सुनिश्चित किया कि जब ग्राहक ई-471 या अमूल आइसक्रीम सर्च करें तो उन्हें हमारी वेबसाइट पर आने और पढऩे का मौका मिले।'  आखिर सोढ़ी को वीडियो संदेश देने की क्या जरूरत पड़ी? क्या उन्हें अपने ब्रांड के लिए ज्यादा मशहूर चेहरे का इस्तेमाल करना चाहिए? मोगे मीडिया के संस्थापक संदीप गोयल कहते हैं, 'इस विवाद पर मेरा कोई विचार नहीं है और न ही मुझे इस बात की परवाह है कि कुल्फी में क्या है। लेकिन जब अमूल इस तरह के आरोपों और आलोचना का सामना कर रही थी तब आखिर इसने होर्डिंग वाले संदेशों से परहेज क्यों किया जिसे यह परंपरागत तरीके से देती रही है।' उनका मानना है कि ब्रांड संचार उनके अनुरूप नहीं है जिसे इसने कई सालों तक बरकरार रखा था। वह कहते हैं, 'दूसरों का मजाक उड़ाना आसान है लेकिन जब आप मुश्किल में हों तब यह एक अलग बात हो जाती है।'

सोढ़ी कहते हैं, 'फर्जी वीडियो जिसका प्रसार किया जा रहा है उसे देख कर ऐसा लगता है कि यह एक खास मकसद से तैयार किया गया। इसी वजह से हमने सोशल मीडिया पर इसका खंडन करने का फैसला किया। जहां तक अमूल गर्ल के हास्य वाले पहलू नहीं इस्तेमाल करने की बात है तो इस पर मैं यह कहना चाहूंगा कि यह एक गंभीर मसला है और हम इसे हास्यास्पद विषय नहीं बनाना चाहते थे।' ट्विटर पर अमूल गर्ल ने कहा, 'मैं शत-प्रतिशत शाकाहारी हूं।' सोढ़ी ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि जो 36 लाख किसान अमूल से जुड़े हैं वे ग्राहकों को धोखा नहीं देंगे। सोढ़ी कहते हैं, 'अमूल का पैसा देश से बाहर नहीं बल्कि गरीब किसानों को जाता है और वे झूठ नहीं बोलते।' ऐसा लगता है कि सोढ़ी इस संकट को एक मौके के तौर पर बदलकर ब्रांड को राष्ट्रवादी रंग देते हैं।

 

ब्रांडों की चुनौती
ब्रांड को कई तरह की अफवाहों का सामना करना पड़ता है। कई दफा वे जल्दी ही प्रतिक्रिया देते हैं जबकि बाकी को चुप रहने का दंश झेलना पड़ता है। 
 
अमूल आइसक्रीम-2018
इस आइसक्रीम के कुछ फ्लेवर में जानवरों की वसा इस्तेमाल किए जाने और शुद्ध शाकाहारी न होने का आरोप लगा। कंपनी ने प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी का एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्होंने आरोपों का खंडन किया। इसके अलावा ब्रांड ने अपने मशहूर शुभंकर अमूल गर्ल का इस्तेमाल करते हुए भी समान संदेश दिया।
 
आशीर्वाद आटा-2018
आईटीसी पर यह आरोप लगा कि वह आशीर्वाद में प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करने के लिए एक अभियान शुरू किया। इसने तीन शहरों में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई और कंपनी को इस तरह के वीडियो का प्रसार रोकने के लिए उद्योग का समर्थन भी मिला। 
 
लिप्टन चाय-2016
एक ग्राहक ने एक वीडियो पोस्ट कर यह दावा किया कि लिप्टन लेमन ग्रीन टी बैग में कीड़े थे। कंपनी ने तुरंत एक वीडियो पोस्ट कर अपना पक्ष बताया कि ये कीड़े नहीं बल्कि यह फ्लेवर देने वाली चीजें थी जो गर्म पानी में घुलता है।
 
मैगी-2015
उत्तर प्रदेश में खाद्य एवं दवा प्रशासन के अधिकारियों ने यह घोषित किया कि नेस्ले इंडिया के मैगी नमूने में प्रतिबंधित मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) है। कंपनी ने इस पर प्रतिक्रिया देने में भी देर की और इसकी वजह से मैगी पर प्रतिबंध लगा जो करीब दो सालों तक चला। इसके बाद मैगी ने दुकानों की शेल्फ पर वापसी की है। लेकिन इस वाकये के बाद से ब्रांड ने देश में संकट पर अपनी प्रतिक्रिया देने के तरीके में बदलाव किया।
 
पेप्सी/कोक-2006
सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवॉयरनमेंट (सीएसई) ने आरोप लगाया कि पेप्सी और कोका कोला में कीटनाशक स्वीकृत स्तर के मुकाबले 24 गुना ज्यादा है। देश के कई राज्यों में इन पर प्रतिबंध लग गया। दोनों ब्रांडों ने सीएसई के खोज को चुनौती दी और इन आरोपों का खंडन करते हुए विज्ञापन किया।
 
कैडबरी-2003
महाराष्ट्र में और बाद में अन्य राज्यों में कथित तौर पर कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट में कीड़े पाए गए। कंपनी ने अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए व्यापक विज्ञापन अभियान छेड़ा जिसमें अमिताभ बच्चन ब्रांड ऐंबेसडर बने। 
Keyword: amul, ice cream, social media, troll,,
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