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मीडिया का तकनीक से होगा मेल तभी बन पाएगा तालमेल

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  September 18, 2018

फाइल साझा करने वाले ऐप शेयरइट के दुनिया भर में करीब 150 करोड़ उपभोक्ता हैं। इनमें से 40 करोड़ से भी अधिक उपभोक्ता अकेले भारत में ही हैं। इस तरह भारत इस चीनी फर्म का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इस साल की शुरुआत में शेयरइट ने भारत के एक ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म फास्टफिल्म्ज का 1.3 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण किया था। तकरीबन सभी तरह के वीडियो को चलाने की सुविधा देने वाले एमएक्स प्लेयर का भी भारत में 17.5 करोड़ से अधिक लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। जुलाई 2018 में भारत के दिग्गज मीडिया समूह टाइम्स ग्रुप ने करीब 10 करोड़ डॉलर में एमएक्स प्लेयर का अधिग्रहण कर लिया।

 
तकनीक-आधारित कंपनी शेयरइट ने एक कंटेंट फर्म का अधिग्रहण किया है जबकि मीडिया क्षेत्र की कंपनी टाइम्स ग्रुप ने एक बड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म को खरीदा है। डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ ही डेटा शुल्क तेजी से गिरे हैं और आज 41.2 करोड़ से अधिक लोग ब्रॉडबैंड सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी हालत में कंटेंट, वितरण, तकनीक और प्लेटफॉर्म जैसे तमाम वर्गीकरण तेजी से धुंधले पड़ते जा रहे हैं। शेयरइट-फास्टफिल्म्ज और टाइम्स-एमएक्स प्लेयर की तरह के सौदों की संख्या अब बढ़ेगी। ईवाई की एक रिपोर्ट में ऐसे ही तीन और सौदों का जिक्र हुआ है। फिल्म स्टूडियो, प्रसारक और कंटेंट कारोबार में सक्रिय किसी भी फर्म को दो कारणों से इस पर ध्यान देना चाहिए। 
 
पहला, शेयरइट के 40 करोड़ भारतीय उपभोक्ताओं में से बड़ा हिस्सा तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों का है। इन इलाकों के निवासियों के लिए फास्टफिल्म्ज काफी अहम है क्योंकि यह दक्षिण भारत का शीर्ष ओटीटी प्लेटफॉर्म है। शेयरइट इंडिया के प्रबंध निदेशक जैसन वांग कहते हैं, 'फास्टफिल्म्ज की टीम हमारे लिए बेहद अहम है। वे लोग दक्षिण भारत के उस्ताद हैं। मलयालम, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ भाषाएं बोलने वाले इस बाजार में उनकी मौजूदगी हमारे लिए उपयोगी है।' सच तो यह है कि भारतीय मीडिया की समूची पारिस्थितिकी में छोटे शहरों को बहुत कम तवज्जो ही मिलती है। अमूमन यही सोच हावी रहती है कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से ही भारत शुरू होता है और वहीं पर खत्म हो जाता है। हरेक युवा मीडिया योजनाकार सोचता है कि भारत में टेलीविजन का पतन हो रहा है। लेकिन इसकी वजह यह है कि वह खुद नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो देखता रहता है।
 
हमें यह ध्यान रखना होगा कि भारत में टेलीविजन की पहुंच 83.6 करोड़ लोगों तक है और यह दर दो अंक में बढ़ रही है। इस बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा भारत के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों से आ रहा है। हमें फ्री-टू-एयर चैनलों की कामयाबी और पिछले तीन वर्षों में टेलीविजन सेट पर फिल्म देने वाले दर्शकों की संख्या में हुई वृद्धि को ध्यान में रखना चाहिए। अधिकांश मल्टीप्लेक्स शृंखलाएं दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में सिनेमा स्क्रीन लगाने पर अपना निवेश बढ़ा रही हैं। एमएक्स प्लेयर और शेयरइट जैसी श्रेणी वाली कंपनियां मीडिया के विभिन्न माध्यमों की दस्तक का इंतजार कर रहे इन इलाकों में बड़ी उथलपुथल मचाने की काबिलियत रखती हैं। 
 
दूसरा, भारत के 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ताओं में अभी तक खास बढ़ोतरी नहीं दिखी है। अगर ग्राहक और विज्ञापन दोनों मदों में हासिल शुल्क को एक साथ रखकर देखें तो भी डिजिटल कारोबार महज 100 अरब रुपये तक ही पहुंच पाता है। दूसरी तरफ टेलीविजन 660 अरब रुपये का राजस्व जुटा रहा है। यूट्यूब को छोड़कर कोई भी दूसरा वीडियो ऐप भारत में कमाई नहीं कर पा रहा है और संभवत: लंबे समय तक ऐसा नहीं कर पाएगा। शेयरइट के भारतीय कारोबार प्रमुख वांग कहते हैं, 'भारत में प्रति हजार दर्शक के लिए विज्ञापन लागत काफी कम है। इतनी कम आय के लिए उपभोक्ताओं के वीडियो अनुभव को बाधित करने की कोई जरूरत नहीं है। हम अगले 3-5 वर्षों के लिए इस राजस्व का मोह छोड़ सकते हैं क्योंकि हमारी स्पष्ट राय है कि उपभोक्ताओं की संख्या बढऩे से भारत में आय बढ़ेगी।'
 
इसका मतलब है कि भारत में तकनीक आधारित मीडिया कारोबार दीर्घावधि सोच से प्रेरित है और जल्दबाजी में कमाई की मंशा रखने वालों की इसमें कोई जगह नहीं है। समाचारपत्र, टीवी, रेडियो और डिजिटल व्यवसाय में संलग्न टाइम्स ग्रुप 2013 से ही ओटीटी बाजार में दखल बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। उस समय टाइम्स ने बॉक्स टीवी नाम से अपना प्लेटफॉर्म उतारा था जो स्टार के हॉटस्टार या वायकॉम18 के वूट से बहुत पहले की बात है। इस लिहाज से टाइम्स ग्रुप का एमएक्स प्लेयर को अपने पाले में लाना ओटीटी कारोबार में उसकी सबसे बड़ी पहल है। 
 
टेलीविजन की दुनिया में पांच दिग्गज कंपनियों सन टीवी, सोनी, स्टार, ज़ी और वायकॉम18 का दबदबा है। इन पांचों टीवी समूहों ने  भारत के 19.7 करोड़ घरों में टीवी देखने वाले लोगों की 70 फीसदी संख्या पर कब्जा कर रखा है। लेकिन टीवी कारोबार को लेकर एक तरह की बेपरवाही देखी जाती है कि उन्हें उठाए जाने वाले कदमों के बारे में सब पता है। इनमें से कोई भी समाहित इकाई पूरे टीवी कारोबार का परिदृश्य बदलकर रख सकती है। सभी बड़े प्रसारकों के अपने ओटीटी ऐप हैं लेकिन वे अपने ही कंटेंट और ढांचे तक सीमित हैं। उनमें से किसी भी टीवी समूह के पास इतने डिजिटल दर्शक नहीं हैं कि वह यूट्यूब, शेयरइट या एमएक्स प्लेयर की बराबरी कर सके। आप यह दलील दे सकते हैं कि टीवी सेटों के जरिये उनकी व्यापक पहुंच को आधार मानें तो यह कोई वाजिब तुलना नहीं है।
 
फिर भी बाजार, दर्शक और तकनीक का इस तरह से घालमेल हुआ है कि अब उनके बीच स्पष्ट विभाजन ही नहीं रह गया है। अब प्लेटफॉर्म, एग्रीगेटर, वितरक और कंटेंट निर्माता महज शब्दावली भर रह गए हैं। एक दर्शक को तो बस अच्छे वीडियो की जरूरत होती है।
Keyword: shareit, file, tv, rural, urban, OTT, film,,
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