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बाजार की सबसे बड़ी चिंता आम चुनाव

पुनीत वाधवा /  September 17, 2018

भले ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, व्यापार युद्घ की आशंका और रुपये में गिरावट का बाजार धारणा पर प्रभाव पड़ा हो, लेकिन सेंट्रम ब्रोकिंग में संस्थागत इक्विटी एवं परामर्श के लिए मुख्य कार्याधिकारी निश्चल माहेश्वरी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि अगले एक साल में 2019 के आम चुनाव का परिणाम बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। बातचीत के मुख्य अंश:

 
वृहद चुनौतियां भारतीय बाजार के लिए किस तरह से नुकसानदायक हैं?
 
भारत ने हमेशा से अन्य उभरते बाजारों (ईएम) की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है और वह लगातार बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। मौजूदा वृहद आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए मेरा मानना है कि बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला कायम रहेगा। इसकी मुख्य वजह भारत की मजबूत घरेलू खपत की स्थिति है। मौजूदा समय में, दीर्घावधि निवेश परिवेश में मजबूती दिख रही है और मुझे उम्मीद है कि इक्विटी में पूंजी प्रवाह बना रहेगा। हालांकि बढ़ती तेल कीमतें, रुपये में कमजोरी से बाजार में अल्पावधि में अनिश्चितता बनी रह सकती है।
 
क्या बाजार राजकोषीय घाटे के आंकड़ों में कमी के लिए तैयार हैं?
 
विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत के आधार पर मेरा मानना है कि हम अर्थव्यवस्था में निश्चित तौर पर सुधार देख रहे हैं। हमारे जीडीपी वृद्घि के आंकड़ों में निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं में मजबूती की वजह से सुधार दिखा है। साथ ही हमें ऊंची तेल कीमतों और रुपये में गिरावट की वजह से राजकोषीय घाटे के संदर्भ में चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बाजार में राजकोषीय घाटे में कमी के संकेत का असर पहले ही दिख चुका है, इसलिए अगली कुछ तिमाहियों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आ सकती है। 
 
विदेशी प्रवाह पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) दुनियाभर में शुद्घ बिकवाल बन रहे हैं और मेरा मानना है कि यह रुझान बरकरार रह सकता है। अमेरिका को छोड़कर कई बाजारों का प्रदर्शन औसत रहा है। यह स्थिति विदेशी प्रवाह लगातार आकर्षित करने के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण होगी।
 
भारत के बारे में स्थिति कैसी है?
 
भारत को संक्षिप्त-मध्यावधि में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) व्यापार युद्घ की चिंताओं और रुपये में गिरावट के बीच अपना निवेश सुरक्षित परिसंपत्ति विकल्पों में स्थानांतरित कर सकते हैं। निवेशक सतर्क हैं और यदि उन्हें राजकोषीय घाटा बढऩे का संकेत दिखता है तो वे निवेश से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि यह मुद्रास्फीति दबाव बढऩे का संकेत है। हालांकि जून तिमाही में भारतीय उद्योग जगत के मजबूत प्रदर्शन में प्रमुख शेयरों की दो अंक में वृद्घि से मदद मिली है और इससे आगामी तिमाहियों के लिए सकारात्मक रुझान दिख रहा है। अनुकूल मॉनसून से भी वृद्घि को लेकर चिंताएं घटी हैं।
 
आय वृद्घि या राजनीतिक अनिश्चितता, कौन सी बड़ी चिंता है?
 
मेरा मानना है कि अगले साल के आम चुनाव का परिणाम बड़ी चुनौती है। राजनीतिक अनिश्चितता या इससे संबंधित बदलाव (यदि कोई हो) कम से कम अगले पांच साल तक बना रहेगा जबकि मुनाफा वृद्घि में कमी का अल्पावधि प्रभाव होगा।
 
क्या इस साल गिरावट को देखते हुए मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों को खरीदने का यह अच्छा समय है?
 
हमारा मानना है कि स्मॉल- और मिड-कैप निचले स्तर से उबर चुके हैं, लेकिन हम निवेशकों को सतर्क रहने और सिर्फ अच्छे चयन के आधार पर ही मिडकैप में निवेश करने की सलाह देते हैं। हम खपत, आईटी और दवा तथा इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) जैसी उन कंपनियों पर उत्साहित हैं जिनमें गिरावट आई है। ईपीसी के मोर्चे पर, यदि आप निर्माण के संदर्भ में विचार करें तो सभी ईपीसी कंपनियों ने शानदार ऑर्डर बुक दर्ज की है। 
 
लेकिन आईटी और फार्मा में पहले ही अच्छी तेजी दिख चुकी है। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
रुपये में गिरावट आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों के लिए सकारात्मक है। इससे आईटी क्षेत्र को अगले तीन वर्षों के लिए राहत मिली है, क्योंकि हम लगभग 8-9 वर्षों के बाद मांग में तेजी देख रहे हैं। खपत क्षेत्र (एफएमसीजी और ड्यूरेबल्स) भी अच्छे मॉनसून और आगामी त्योहारी सीजन की वजह से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। एफएमसीजी हमेशा महंगा रहा है और महंगा बना रहेगा। मैं नहीं मानता कि यह क्षेत्र (एफएमसीजी) कभी सस्ता होगा, क्योंकि इसमें मांग मजबूत है और साथ ही मॉनसून भी अच्छा रहा है। कुल मिलाकर, अगली कुछ तिमाहियां इस क्षेत्र के लिए अच्छी साबित होंगी।
Keyword: crude oil, price, iran, america, अमेरिका, भारत, चीन,
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