बिजनेस स्टैंडर्ड - आयात प्रतिबंध प्रस्ताव से सहमा स्वर्ण उद्योग
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आयात प्रतिबंध प्रस्ताव से सहमा स्वर्ण उद्योग

राजेश भयानी / मुंबई 09 17, 2018

आयात पर अंकुश

पिछले प्रतिबंध से तस्करी में बढ़ोतरी हुई जिससे उद्योग ने सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी
10 प्रतिशत तक आयात शुल्क सरकार ने वर्ष 2013 में बढ़ाया जिससे सोने की तस्करी बढ़ गई
देश के मंदिरों और घरों में करीब 25,000 टन सोना पड़ा है
अगर इसका एक हिस्सा स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत बाजार में आए तो औसतन 35 अरब डॉलर के स्वर्ण आयात बिल में कमी आएगी

बिजनेस स्टैंडर्ड आयात प्रतिबंध प्रस्ताव से सहमा स्वर्ण उद्योगसरकार द्वारा गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने के निर्णय से स्वर्ण उद्योग सहमा हुआ है। वह ऐसे कदम उठाने की अनुशंसा तैयार कर रहा है जिससे सोने के आयात पर अंकुश लगाए जाने पर कारोबार की बढ़ोतरी को नुकसान ना पहुंचे। सरकार ने 2013 में कई चरणों में आयात शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ा दिया था और 80:20 योजना की घोषणा की थी। यह योजना बुरी तरह से विफल रही और इसने तस्करी के कई नए रास्ते खोल दिए। इस योजना के कार्यान्वयन के बाद घरेलू बाजार में सोने की आयातित कीमतों पर प्रीमियम 200 डॉलर प्रति औंस की उच्च दरों तक पहुंच गया था। इसने तस्करी को काफी बढ़ावा दिया और स्वर्ण आयात के आंकड़ों में गिरावट आने के बाद भी अनधिकृत तौर पर आयात जारी रहा। अगस्त में देश का स्वर्ण आयात बिल 3.6 अरब डॉलर का रहा जो अगस्त 2017 के मुकाबले लगभग दोगुना था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो महीनों में 167 टन सोने का आयात किया गया। 

कई विश्लेषकों का मानना है कि माल के आधार पर स्वर्ण आयात पर अंकुश लगाना तर्कसंगत कदम हो सकता है क्योंकि इस तरह से आयात करने पर भारत में सोने की बिक्री होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा और बिना बिक्री वाला सोना भुगतान के बगैर ही वापस भेज दिया जाएगा। मई 2013 में माल के आधार पर आयात पर प्रतिबंध लगाए गए थे। कोटक महिंद्रा बैंक के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष शेखर भंडारी कहते हैं, 'पिछले एक वर्ष में सोने का आयात काफी नियंत्रित रहा है। निवेश के मामले में यह इक्विटी और डेट फंड के मुकाबले कमजोर हुआ है।' रॉयटर्स और मेटल फोकस का भी कहना है कि इस बार स्वर्ण आयात वर्ष 2017 के मुकाबले 10 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है। हालांकि, भंडारी सलाह देते हैं कि अपरिष्कृत सोने और परिष्कृत सोने के बीच आयात शुल्क में अंतर को समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि केवल ट्रेडिंग के उद्देश्य से अपरिष्कृत सोना मंगाकर प्रसंस्करण के बाद सोने की वास्तविक कीमत से थोड़ी कम कीमत पर बेचा जा रहा है, जिसपर रोक लगाई जानी चाहिए। 

हालांकि इस विषय पर रिफाइनरों का मत अलग है। वे कहते हैं कि अपरिष्कृत सोने पर जो भी काम किया गया, वह भारत में हुआ है जिस कारण भारतीय रिफाइनरों को ये लाभ मिलते रहने चाहिए। मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के अध्यक्ष एहमद एमपी ने कहते हैं, 'अगर सरकार सोने के आयात पर अंकुश लगाना चाहती है तो ग्राहकों के लॉकर में रखे सोने को बाजार में लाने के लिए सरकार तथा उद्योग को मिलकर काम करना चाहिए। अगर इस सोने को बाजार में लाया गया तो आयात पर निर्भरता स्वत: ही घट जाएगी।' 

स्वर्ण मुद्रीकरण योजना नवंबर 2015 में शुरू की गई थी लेकिन उसके परिणाम आशानुरूप नहीं रहे। भारतीय मंदिरों और घरों में लगभग 25,000 टन सोना रखा हुआ है। अगर इसका एक हिस्सा भी स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत बाजार में आ जाए तो इससे औसतन 35 अरब डॉलर के स्वर्ण आयात बिल में कमी की जा सकेगी। वर्तमान में 10 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी ने सोने की तस्करी को काफी आकर्षक बना दिया है। पिछले वर्ष गैर-आधिकारिक तरीके से 140 टन सोना भारत पहुंचा है। सभी शोध संस्थानों का अनुमान है कि वर्ष 2018 में गैर-आधिकारिक तरीके से लगभग 200 टन सोना भारत आएगा। अर्थात, सोने की 24 प्रतिशत घरेलू मांग तस्करी से आए सोने से पूरी हो जाएगी। यह एक बड़ा कारण है कि भारत में सोने पर प्रतिबंध कारगर नहीं हो पाते। 

इंडियन बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता रेमिटेंस योजना की सीमा 2.5 लाख डॉलर से कम करके 1 लाख डॉलर करने का सुझाव देते हैं। डॉलर को देश से बाहर भेजने पर रोक लगाने का यह एक सरल माध्यम है। वह कहते हैं कि सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड के तहत कम शुल्क लिया जाना चाहिए, जिससे वास्तविक सोने की मांग कम होगी। मेहता यह भी कहते हैं, 'फिलहाल चालू खाता घाटा कम करने के लिए 3-5 वर्ष के लिए सोने के लिए आवर्ती जमा (आरडी) खाता बनाना बेहतर तरीका हो सकता है।'
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