बिजनेस स्टैंडर्ड - मसाला बॉन्ड पर छूट से बढ़ेगा निवेशक आधार
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मसाला बॉन्ड पर छूट से बढ़ेगा निवेशक आधार

अनूप रॉय / मुंबई 09 16, 2018

मसाला बॉन्ड अनिवार्य रूप से डॉलर बॉन्ड होते हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड मसाला बॉन्ड पर छूट से बढ़ेगा निवेशक आधारसरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से देसी बैंकों को मसाला बॉन्ड की अंडरराइटिंग व विपणन की अनुमति दिए जाने से रुपये वाले बॉन्ड में निवेशकों का आधार बढऩे की उम्मीद है। साथ ही इस साल जारी बॉन्ड पर 5 फीसदी विदहोल्डिंग कर हटाए जाने से सामान्य से ज्यादा मसाला बॉन्ड जारी हो सकते हैं।

ऐसा हो सकता है कि मसाला बॉन्ड लगातार जारी करने वाली कंपनियां कुछ ज्यादा बॉन्ड जारी कर सकती हैं, लेकिन इसकी संख्या भी सीमित होगी। मसाला बॉन्ड अनिवार्य रूप से डॉलर बॉन्ड होते हैं, जिनका निपटान रुपये में होता है।

इन्हें जारी करने वाली कंपनियों को मुद्रा जोखिम के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं होती क्योंकि उन्हें स्थानीय मुद्रा में भुगतान करना होता है। लेकिन ऐसे बॉन्ड के खरीदारों को मुद्रा की विपरीत चाल को ध्यान में रखना होता है। रुपये की हालिया चाल को देखते हुए ऐसे मसाला बॉन्ड की कीमत निवेशकोंं के हाथ में कम हुई है। 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे जारी करने वाली कंपनियोंं के लिए क्रेडिट मार्केट सख्त हो गया है। एचएसबीसी इंडिया के प्रमुख (वैश्विक बाजार) हितेंद्र दवे ने कहा कि अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों के लिए भी स्प्रेड कम से कम 50 आधार अंक बढ़ा है। निचली रेटिंग वाली कंपनियों के लिए (जो ज्यादा प्रतिफल की पेशकश करती हैं) कभी भी बहुत बड़ा बाजार नहीं होता, ऐसे में उन पर असर भी ज्यादा होगा। इसका मतलब यह हुआ कि कम रेटिंग वाली कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड सीमा से बाहर को सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि मसाला बॉन्ड भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा जरिया बन गया है। आरबीआई के आंकड़ोंं से पता चलता है कि सितंबर 2016 के बाद से भारतीय कंपनियों ने इसके जरिए महज 505 अरब रुपये जुटाए हैं। ब्याज दर भी लगातार घट रही है। कुछ महीने ऐसे बॉन्ड जारी नहीं हुए हैं। इसकी तुलना में साल में 7-8 लाख करोड़ रुपये के स्थानीय बॉन्ड जारी हुए हैं। मसाला बॉन्ड के नाकाम होने की कई वजह है।

प्राथमिक वजह यह हो सकती है कि देश व विदेश में कीमत का अंतर वास्तव में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। एचडीएफसी बैंक के ट्रेजरर आशिष पार्थसारथि ने कहा, ऐसा नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक किसी सस्ती दर पर रकम उधार देते हैं। विदहोल्डिंग टैक्स हटाने से इश्यू करने वालों के लिए ब्याज दरों में 40 से 50 आधार अंकों की बचत हो रही है।

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