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सरकारी कदम एफपीआई के लिए सही

अनूप रॉय और समी मोडक / मुंबई 09 16, 2018

कैसा रहेगा बाजार का रुख

बिजनेस स्टैंडर्ड सरकारी कदम एफपीआई के लिए सही

एनसीडी में सौदे हो सकते हैं बहाल

कम रेटिंग वाले क्षेत्र मसलन रियल एस्टेट को हो सकता है फायदा

एफपीआई निवेश के मामले में बनी रह सकती है यथास्थिति

सोमवार को रुपया, शेयर और बॉन्डों में हो सकती है बढ़त

ऋणपत्र में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) इस बात से खुश हैं कि कॉरपोरेट ऋण प्रतिभूतियों में निवेश को लेकर पाबंदी हटा दी गई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि एफपीआई अब अपने पोर्टफोलियो का 20 फीसदी से ज्यादा किसी एक कंपनी में निवेश कर सकते हैं और इसके साथ ही 50 फीसदी से ज्यादा किसी एक बीमा कंपनी की कॉरपोरेट प्रतिभूतियों में झोंक सकते हैं। अप्रैल में भारतीय रिजर्व बैंक ने पाबंदी लगाई थी, लेकिन पहले से हो गए सौदों के लिए इसमें ढील दी गई थी।  

भारत में ज्यादातर कॉरपोरेट बॉन्डों का निजी नियोजन होता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017-18 में कंपनी जगत ने निजी नियोजन के जरिए 5.34 लाख करोड़ रुपये जुटाए जबकि 2016-17 में इन्होंने 6.40 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। निचली रेटिंग वाली कंपनियों के मामले में निजी नियोजन के तहत उच्च प्रतिफल की पेशकश एकमात्र विकल्प होता है।

ऐसे एनसीडी का निजी नियोजन एक या या सिर्फ चुनिंदा एफपीआई निवेशकों के साथ बातचीत के जरिए होता है। एफपीआई पूरा स्टॉक उठा लेते थे, लेकिन आरबीआई की अप्रैल की अधिसूचना में उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया था। चूंकि पाबंदी हटा ली गई है, लिहाजा एफपीआई इन प्रतिभूतियों में फिर से निवेश कर सकते हैं।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के ट्रेजरर जयेश मेहता के मुताबिक, इससे कुछ कंपनियां गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए एक बार फिर रकम जुटा सकती हैं। यह खास तौर से रियल एस्टेट क्षेत्र को फायदा पहुंचाएगा, जो मोटे तौर पर एफपीआई के साथ बातचीत के जरिए होने वाले सौदे पर आश्रित होते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एफपीआई भारत में भारी-भरकम निवेश की शुरुआत कर देंगे। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट्ट ने कहा, सरकार की तरफ से की गई घोषणा मामूली रूप से सकारात्मक है। इससे बाजार के माहौल में थोड़ा सुधार आएगा। हम सोमवार को बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देख सकते हैं। 

रुपये में गिरावट और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के बीच पिछले हफ्ते देसी बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी में तेजी दिखी थी। हालांकि अमेरिका व चीन के बीच व्यापार पर बाचतीत में दिखे आशावाद से शुक्रवार को एफपीआई की खरीद सकारात्मक हो गई।

भट्ट ने कहा, जहां तक एफपीआई की निकासी का सवाल है, इसमें यथास्थिति दिखेगी। वे वही करेंगे, जो वे करते रहे हैं। दूसरी ओर हम म्युचुअल फंडों की तरफ से और ज्यादा सकारात्मक रुख देख सकते हैं। ऋण व इक्विटी में एफपीआई इस साल शुद्ध बिकवाल रहे हैं। अमेरिकी फेड की तरफ से ब्याज दरों में इजाफा और 10 साल का ट्रेजरी प्रतिफल तीन फीसदी पर पहुंचने से एफपीआई का भारत व अन्य उभरते बाजारों से रकम निकालकर स्वदेश भेजना शुरू हो गया।

एचडीएफसी बैंक के ट्रेजरर आशिष पार्थसारथी के मुताबिक, एफपीआई के कदम और मसाला बॉन्ड के चलते कंपनियों की वित्त तक आसान पहुच होगी, लेकिन इसका तात्कालिक प्रभाव शायद ही देखने को मिलेगा। पार्थसारथी ने कहा, लंबी अवधि में कुछ उधारी दिख सकती है।

हमें लंबी अवधि में इस कदम के असर के लिए देखो व इंतजार करो की रणनीति अपनानी होगी। 14 सितंबर तक एफपीआई ने अपने कुल कॉरपोरेट निवेश सीमा 2.67 लाख करोड़ रुपये का 76.66 फीसदी इस्तेमाल किया। आगामी दिनों में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी दिख सकती है। विशेषज्ञोंं ने कहा कि सोमवार को रुपया थोड़ा मजबूत खुल सकता है। 10 साल के बॉन्ड का प्रतिफल करीब 8 फीसदी रह सकता है, वहीं इक्विटी में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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