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मुनाफावसूली करने का है उचित समय: विश्लेषक

पुनीत वाधवा /  September 16, 2018

तेल कीमतें एक बार फिर से 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दिख रही हैं और अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये के गिरकर 73 के निचले स्तर पर पहुंचने से शेयर बाजार की धारणा प्रभावित हुई है। बीएसई के सेंसेक्स में चालू सप्ताह के पहले दो दिन (सोमवार और मंगलवार) में लगभग 1000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आरबीआई द्वारा रुपये की गिरावट थामने के लिए प्रयास किए जाने की उम्मीद बुधवार को इसमें थोड़ा सुधार दिखा। इन घटनाक्रम ने उन विश्लेषकों को सतर्क कर दिया है जिन्होंने निवेशकों को यह सलाह दी कि उन्हें चालू स्तरों पर आंशिक रूप से मुनाफावसूली कर लेनी चाहिए और बाजार में तब तक नए निवेश से परहेज करना चाहिए जब तक कि रुपये और तेल कीमतों में मजबूती न आ जाए।

 
चुनाव से पहले ऊंची ब्याज दर के परिवेश और कमजोर वृहद आर्थिक बुनियादी आधार (जीएसटी संग्रहण उम्मीद की तुलना में कम रहने से राजकोषीय लक्ष्य पूरा करने की सरकार की दक्षता, रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, बढ़ती तेल कीमतों आदि को लेकर सवाल उठे हैं) को देखते हुए क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि इक्विटी बाजार में अल्पावधि में रेटिंग में कमी देखी जा सकती है। क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट के प्रमुख (इंडिया इक्विटी रिसर्च) जितेंद्र गोहिल ने प्रेमल कामदार के साथ मिलकर लिखी एक ताजा रिपोर्ट में कहा है, 'हम निवेशकों को इक्विटी में कुछ मुनाफावसूली की सलाह दे रहे हैं। हमें कुछ गिरावट (लार्ज कैप में भी) की संभावना है, क्योंकि हम रुपये में गिरावट के साथ साथ ऊंची तेल कीमतों की वजह से मुद्रास्फीति दबाव से खपत वृद्घि में कमी देख रहे हैं।  इस चुनौतीपूर्ण समय को ध्यान में रखते हुए हम निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बड़े शेयरों में मुनाफावसूली करने की सलाह दे रहे हैं।'
 
आंकड़ों से पता चलता है कि बीएसई पर सभी सूचीबद्घ शेयरों के बाजार मूल्य के संदर्भ में कुल निवेशक संपत्ति चालू सप्ताह में काफी घटी है। रुपये के लिए परिदृश्य तेज वैश्विक मुद्रास्फीति और सख्त मौद्रिक नीतियों (खासकर अमेरिकी फेडरल द्वारा) और दिसंबर से यूरोपीय बैंक द्वारा परिसंपत्ति खरीद कार्यक्रम में कमी को देखते हुए अभी भी कमजोर बना हुआ है। मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि रुपया मजबूत हो सकता है और उन्हें आरबीआई द्वारा इस संदर्भ में प्रयास किए जाने की उम्मीद है।
 
डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट ने कहा, 'मेरा मानना है कि बााजार में कुछ समय तक दबाव बना रहेगा। खासकर तेल कीमतों और रुपये को जब तक कुछ राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में दबाव की स्थिति बरकरार रह सकती है। रुपया 72-73 के स्तरों पर स्थिर हो सकता है। निवेशकों को मुनाफावसूली करनी चाहिए और फिलहाल बाजार से दूर रहना चाहिए। दबाव की स्थिति में निफ्टी-50 सूचकांक गिरकर 10,700 के स्तर से नीचे जा सकता है, जो इस सूचकांक के लिए मजबूत समर्थन स्तर भी है।'
 
सेंट्रम ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं शोध प्रमुख जगन्नाथम थुनुगुंटला ने निवेशकों को सलाह दी है कि परिसंपत्ति आवंटन के संदर्भ में उन्हें रुपये में गिरावट का फायदा उठाने के लिए निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर विचार करना चाहिए। वह कहते हैं, 'रुझान संबंधित जोखिम अब शेयर बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों को सतर्क बने रहने और निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों और कर्ज-मुक्त कंपनियों में खरीदारी की कोशिश करने की जरूरत है। 2014 से 2018 तक भारत में यह विरोधाभाव देखा गया है। 2014 से 2017 के दौरान वृहद कारकों पर विचार किया गया, लेकिन कंपनी आय पर ध्यान नहीं दिया  गया। मौजूदा समय में इसके विपरीत स्थिति है और आय में तेजी का प्रमाण है, लेकिन वृहद कारक दबाव में दिख रहे हैं।' क्रेडिट सुइस का मानना है कि भविष्य में ऑटो और ऑटो एंसिलियरी, सीमेंट/केमिकल्स के साथ साथ धातु और खनन क्षेत्र भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्रेडिट सुइस ने हेल्थकेयर, कंज्यूमर, एनर्जी/ यूटिलिटीज, पूंजीगत वस्तु/उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर तटस्थ रुख बरकरार रखा है। उसे वित्त और दूरसंचार क्षेत्रों का प्रदर्शन कमजोर रहने का अनुमान है। 
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