बिजनेस स्टैंडर्ड - बढ़ती दरों से निपटने की रणनीति
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बढ़ती दरों से निपटने की रणनीति

संजय कुमार सिंह /  September 16, 2018

दस साल के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल की बेंचमार्क दर 1 दिसंबर, 2014 को 8 फीसदी से अधिक चल रही थी। उसके बाद यह नीचे आई थी, लेकिन 4 सितंबर, 2018 को इसका आंकड़ा एक बार फिर 8 फीसदी से ऊपर चला गया। बॉन्ड प्रतिफल में पिछले एक साल के दौरान 150 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों का यह दौर अगले 18 से 24 महीनों तक बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए उधारी और निवेश की अपनी रणनीतियों को दुरुस्त बनाना होगा।

 
तेल और रुपया ही जड़
 
हाल में सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में मजबूती रुपये में गिरावट से आई है। जब रुपया गिरता है तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दरें बढ़ाने के लिए बाध्य हो जाता है। सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीद में बढ़ता है। इस समय उभरते बाजारों की कई मुद्राओं पर दबाव है। तुर्की की लीरा इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले करीब 41 फीसदी लुढ़क चुकी है। तुर्की को अगले 10 महीनों के दौरान मोटा विदेशी कर्ज चुकाना है, जिससे ऋण में डिफॉल्ट की चिंताएं पैदा हो रही हैं। इसे लेकर ही अर्जेन्टीना और कुछ अन्य उभरते देशों पर भी दबाव है। भारत में भी चालू खाते का घाटा है, इसलिए उसकी मुद्रा में भी गिरावट आई है। हालांकि यह उनके जितनी नहीं गिरी है। कच्चे तेल की कीमतें 72-73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 77 डॉलर पर पहुंच गई हैं, जिससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा है। आगे ब्याज दरों का रुझान मुद्रा संकट और तेल कीमतों की हलचल पर निर्भर करेगा। एचडीएफसी बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री तुषार अरोड़ा ने कहा, 'अगर जोखिम से बचने का माहौल बना रहा और रुपये में गिरावट जारी रही तो सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में और इजाफा हो सकता है। लेकिन यदि तुर्की का मुद्दा सुलझ जाता है, व्यापार युद्ध ठंडा पड़ता है और तेल की कीमतें घटती हैं तो इस 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति पर प्रतिफल घटकर 8 फीसदी से नीचे आ सकता है।' अर्थव्यवस्था 8 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रही है, इसलिए अर्थशास्त्री जल्द ही ब्याज दरों में अहम कमी नहीं आने की संभावना जता रहे हैं। 
 
पहले ही चुका दें कर्ज
 
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने फंड की सभी अवधियों की सीमांत लागत आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) 20 आधार अंक बढ़ाई है, जबकि हाल में आईसीआईसीआई बैंक ने 6 महीने और 12 महीने की एमसीएलआर में 15 आधार अंकों का इजाफा किया है। जब होम लोन की ब्याज दर बढ़ती हैं तो ईएमआई में बढ़ोतरी या कर्ज अवधि में बढ़ोतरी में से कोई एक विकल्प चुनना पड़ता है। इस स्थिति में ईएमआई में बढ़ोतरी के विकल्प को अपनाने की सलाह दी जाती है क्योंकि अगर आप कर्ज चुकाने की समयावधि बढ़ाने का विकल्प चुनते हैं तो आपको ब्याज के रूप में ज्यादा पैसा चुकाना होगा। सेबी में पंजीकृत एक निवेश सलाहकार पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, 'ब्याज दर में बढ़ोतरी से निपटने का पहला विकल्प ऋण के एक हिस्से का पूर्व भुगतान है। दूसरा विकल्प बकाया ऋण को उस दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना है, जिसकी ब्याज दर आपके बैंक से कम है। हालांकि ऋण को ट्रांसफर करने से पहले लागत में होने वाले फायदे का विश्लेषण किया जाना चाहिए। 
 
सावधि जमाओं में सुरक्षा पहले 
 
हाल में बहुत से बैंकों ने अपनी सावधि जमा की दरें बढ़ाई हैं। एसबीआई ने 30 जुलाई को 5 से 10 आधार अंक और एचडीएफसी बैंक ने 6 अगस्त को 10 से 60 आधार अंक की बढ़ोतरी की है। अब एसबीआई की एक साल की एफडी पर ब्याज 6.70 फीसदी (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.20 फीसदी) मिल रहा है। मुंबई के फाइनैंशियल प्लानर पंकज मालदे ने कहा, 'एफडी में निवेश से पहले कर चुकाने के बाद मिलने वाले प्रतिफल के बारे में गुणा-भाग लगाएं। सूचकांक लाभ के कारण 20 से 30 फीसदी कर की श्रेणी में आने वाले निवेशकों के लिए डेट म्युचुअल फंड बेहतर विकल्प हैं, विशेष रूप से अगर इन्हें तीन साल से अधिक रखा जाता है।'
 
उन्होंने कहा कि जिस राशि का एफडी में निवेश किया जाना है, उसके एक मामूली हिस्से का ही स्मॉल फाइनैंस बैंकों में निवेश किया जाना चाहिए। वहीं सहकारी बैंकों में निवेश से बचना बेहतर है। निवेशक एएए रेटिंग वाली कंपनियों की कॉरपोरेट एफडी के बारे में भी विचार कर सकते हैं, जो बैंक एफडी से 50 से 75 आधार अंक ज्यादा ब्याज मुहैया कराती हैं। 
 
लघु अवधि के डेट फंडों में रखें ज्यादातर निवेश 
 
डेट बाजार में पिछले संकट (2008 से 2013) के समय भी वैश्विक उठापटक के कारण फंडों से निकासी हुई और करेंसी में गिरावट आई थी। लेकिन इन घटनाक्रमों के बाद के एक वर्ष में डेट म्युचुअल फंडों का शानदार प्रदर्शन रहा। ऐसा लगता है कि हम इस समय संकट के बीचोंबीच हैं। मिरे एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू ने कहा, 'उन लघु अवधि के डेट फंडों में निवेश करें, जिनकी मियाद तीन साल की है। अगर आप इन्हें तीन साल तक बनाए रखेंगे तो निश्चित रूप से 8.5 से 9 फीसदी प्रतिफल हासिल करेंगे, बशर्ते की कोई डिफॉल्ट न हो।' उन्होंने कहा कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 8.25 से 8.50 फीसदी के आसपास पहुंच रहा है, ऐसे में निवेशक धीरे-धीरे ड्यूरेशन फंडों में आवंटन बढ़ा सकते हैं। 
 
जो लोग कुछ ज्यादा प्रतिफल के लिए थोड़ा ज्यादा जोखिम लेना चाहते हैं, वे क्रेडिट रिस्क फंडों में थोड़ा निवेश कर सकते हैं। इनमें आपको करीब 9 फीसदी प्रतिफल मिल सकता है, लेकिन यह ध्यान रखें कि वे एए और ए- रेटिंग प्राप्त बॉन्डों में निवेश करते हैं। लेकिन इसमें कम से कम पोर्टफोलियो के प्रबंधन के लिए एक फंड प्रबंधक होता है और आपको डायवर्सिफिकेशन का फायदा मिलता है।  जो निवेशक ओपन-ऐंड डेट फंडों के वर्तमान उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं, वे तीन साल से अधिक अवधि के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) के बारे में भी विचार कर सकते हैं। जो लोग एए+ या एएए- बॉन्डों में निवेश करते हैं, वे करीब 8 फीसदी प्रतिफल देंगे, जबकि ए या एए- जैसे ज्यादा जोखिम वाले बॉन्डों में निवेश करने वाले फंड करीब 8.75 फीसदी प्रतिफल देंगे। इस बात का ध्यान रखें कि एफएमपी को आसान नहीं है। 
बाजार में 185 अरब रुपये के गैर-परिवर्तनीय डिंबेंचर (एनसीडी) आएंगे। हालांकि ये 9 फीसदी से अधिक दर मुहैया कराते हैं, लेकिन निवेशकों को उनकी क्रेडिट रेटिंग देखकर उनके जोखिम की थाह लेनी चाहिए। एक ही एनसीडी में मोटी रकम लगाने या तीन साल से अधिक अवधि की लंबी अवधि से बचना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और एलआईसी की प्रधानमंत्री वय वंदना योजना अच्छे विकल्प हैं। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में 8.3 फीसदी और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में 10 साल के लिए 8 फीसदी निश्चित प्रतिफल मिलता है। 
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