बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली का घाटा कम करेगा बिहार
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बिजली का घाटा कम करेगा बिहार

बीएस संवाददाता / पटना September 14, 2018

संचरण नेटवर्क में सुधार और कमाई में इजाफे के जरिये बिहार सरकार ने राज्य के संचरण और वितरण (टीऐंडडी) घाटे में भारी कटौती का लक्ष्य रखा है। ऊर्जा विभाग ने चालू वित्त वर्ष के अंत तक राज्य में टीऐंडडी घाटे को 25 फीसदी तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है। इस वक्त बिहार का टीऐंडडी घाटा करीब 35 फीसदी है। बीते साल के 40 फीसदी के घाटे की तुलना में इसमें काफी सुधार हुआ है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिजली बिल की वसूली में सुधार और ट्रांसमिशन लाइंस में सुधार की वजह से यह घाटा कम हुआ है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस वक्त राज्य में बिजली की मासिक वसूली 700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। सिर्फ पटना शहर से बिजली बिल के रूप में 160 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो रही है। विभाग ने इस साल के अंत तक मासिक 800 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा है। गौरतलब है कि दो वर्ष तक पहले तक राज्य में बिजली बिल के रूप में मुश्किल से 300-350 करोड़ रुपये की वसूली हो पाती थी। अधिकारियों के मुताबिक बड़े पैमाने पर मीटरिंग और वसूली अभियान की वजह से यह बदलाव देखने को मिला है। 
 
वहीं अब राज्य सरकार अपनी संचरण व्यवस्था भी मजबूत करने में जुट गई है। विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा, 'हमने अगले वित्त वर्ष की शुरुआत तक राज्य में इस घाटे को 25 फीसदी की सीमा तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। अगर बिजली की बर्बादी कम होगी, हमारी कमाई में इजाफा होगा। हमने इस बारे में काफी काम किया है। पुराने तारों को भी बदला है। साथ ही, नए सिरे से संचरण का बुनियादी ढांचा तैयार किया है। इसके तहत राज्य में 3 लाख सर्किट किमी से ज्यादा तारों को बिछाया गया है। वहीं, नए ग्रिड और सब-स्टेशन तैयार किए गए हैं। साथ ही, नए मीटर लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।'   लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में करीब 3,000 किलोमीटर के पुराने और जर्जर तारों को बदलने का लक्ष्य रखा है। इस पर राज्य सरकार करीब 3,100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। 
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