बिजनेस स्टैंडर्ड - अदालत के आदेश से पसोपेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, September 20, 2018 08:30 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

अदालत के आदेश से पसोपेश

अद्वैत राव पालेपू और अभिजित लेले / मुंबई September 14, 2018

उच्चतम न्यायालय के बिजली, चीनी, जहाजरानी और कपड़ा क्षेत्र की चूककर्ता परिसंपत्तियों के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही पर रोक लगाने के फैसले से बैंकरों में पसोपेश की स्थिति है और वे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। ऋणदाता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि दबाव वाली परिसंपत्तियों के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए या नहीं। न्यायालय ने मंगलवार को आरबीआई को दिवालिया कार्यवाही पर यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था। आरबीआई के 12 फरवरी के परिपत्र के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर सभी याचिकाओं को न्यायालय ने अपने पास मंगा लिया था। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी। 
 
पुंज लॉयड, एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स, साउथ इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ऑफ तमिलनाडु और धारणी शुगर ऐंड केमिकल्स सहित कई कंपनियों ने आरबीआई के परिपत्र से राहत की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को चूककर्ता परिसंपत्तियों के खिलाफ 180 दिन के भीतर समाधान योजना पेश करने को कहा था। अगर वे ऐसा करने में नाकाम रहते तो उन्हें 15 दिन के भीतर दिवालिया कार्यवाही के लिए आवेदन करना था। यह समयसीमा मंगलवार को खत्म हो गई। एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह साफ नहीं है कि अगर समाधान योजना मंगलवार से पहले तैयार हो चुकी है तो फिर इस पर न्यायालय के फैसले का असर पड़ेगा या नहीं।' दो अन्य बैंकरों ने कहा कि वे आरबीआई से दिवालिया मामलों में स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध करेंगे।
 
केंद्रीय बैंक का परिपत्र जारी होने के बाद बैंकों ने करीब 70 दबाव वाली परिसंपत्तियों को गैर निष्पादित परिसंपत्तियों की श्रेणी में डाला है। लेकिन बिजली क्षेत्र की दबाव वाली 34 परिसंपत्तियों में से केवल नौ ही दिवालिया प्रक्रिया के बाहर समाधान के करीब हैं।  इकनॉमिक लॉज प्रेक्टिस में पार्टनर बाबू शिवप्रकाशम ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'कुछ याचिकाएं उद्योग संगठनों ने दायर की हैं, इसलिए यह प्रतिनिधि याचिका है और इससे संगठन की सभी सदस्य कपंनियों को न्यायालय के फैसले का लाभ मिल सकता है। इस बारे में स्पष्टीकरण की जरूरत है कि यह आरबीआई के पूरे परिपत्र पर लागू होगी या फिर इसके फिर इसके कुछ हिस्सों पर। यह याचियों द्वारा विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर विशेष याचिकाओं पर निर्भर करेगा।' कानूनी जानकारों का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश से बैंकरों और दबाव वाली परिसंपत्तियों को राहत मिली है क्योंकि उनके पास अगली सुनवाई से पहले समाधान योजना बनाने का समय है। 
Keyword: company, defaulter, court, RBI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मोर सौदे से रिटेल स्टोर कारोबार में बढ़ेगा एमेजॉन का दबदबा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.