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बड़ी निजी इक्विटी कंपनियां कर रहीं बाजार को संचालित

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली September 14, 2018

देश के निजी इक्विटी (पीई) क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव के तहत बड़ी पीई कंपनियां ऐसे तमाम सौदे करने लगी हैं जहां उनकी नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी अथवा कम से कम कंपनी पर अर्ध-नियंत्रण हासिल है। जबकि इससे पहले बड़ी पीई कंपनियां महज एक अल्पांश निवेशक के तौर पर बाजार में दिखती थीं। निजी इक्विटी के क्षेत्र में अर्ध-नियंत्रण का तात्पर्य उन सौदों से है जहां विशेष प्रस्तावों की शक्तियों के साथ कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी हासिल हो। निजी इक्विटी कंपनियों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2007 से 2011 के दौरान हुए सभी सौदों में नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी 17.6 फीसदी थी। जबकि 2012 से 2017 के बीच यह बढ़कर 26 फीसदी हो गई। यदि हम उनके सौदों को भी ले लें जिनमें निजी इक्विटी कंपनियों का अर्ध-नियंत्रण है तो हिस्सेदारी बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंच जाती है। अध्ययन में शामिल सौदों का आकार भी अपेक्षाकृत बड़ा (10 करोड़ डॉलर का प्रत्येक) है।
 
इसी प्रकार, यदि हम 10 करोड़ डॉलर और इससे अधिक मूल्य के उन सौदों पर गौर करते हैं जहां निजी इक्विटी कंपनियों की नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी है तो साल 2012 से 2017 के बीच कुल सौदों में हिस्सेदारी 27.5 फीसदी होगी जबकि 2007 से 2011 के बीच यह आंकड़ा महज 16.6 फीसदी रहा था। यदि हम उन कंपनियों पर भी गौर करें जिनमें निजी इक्विटी फर्मों का अर्ध-नियंत्रण है तो कुल हिस्सेदारी का आंकड़ा 18.9 फीसदी से बढ़कर 35.5 फीसदी हो जाएगी। निजी इक्विटी फंडों का दावा है कि दबावग्रस्त परिसंपत्तियों की बिक्री के साथ ही इसमें इजाफा हुआ है। उदाहरण के लिए, एऑन ने मोनेट इस्पात को हासिल करने के लिए जेएसडब्ल्यू के साथ बोली लगाई थी और सफलता मिलने पर कंपनी में उसकी बहुलांश हिस्सेदारी (70 फीसदी) है। बिनानी सीमेंट के लिए डालमिया भारत की बोली पर फिलहाल अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार है, लेकिन उसे इंडिया रीसर्जेंट फंड (पीरामल एंटरप्राइजेज और बेन कैपिटल क्रेडिट पार्टनरशिप का संयुक्त उद्यम) का समर्थन है। यदि उन्हें सफलता मिलती है तो समाधान योजना के तहत डालमिया भारत को 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी और कंपनी पर उसका समान नियंत्रण होगा।
 
यहां तक कि ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता पैकेज के बाहर भी केकेआर ने हाल में घोषणा की थी कि वह 60 करोड़ डॉलर के एक सौदे के तहत हैदराबाद की पर्यावरण एवं अपशिष्टï प्रबंधन समाधान कंपनी रामकी एन्वायरो इंजीनियर्स में 60 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने जा रही है।  नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी वाले सौदों में अग्रणी एडवेंट इंटरनैशनल ने कुछ सप्ताह पहले पैकेजिंग कंपनी मंजूश्री टेक्नोपैक में बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी थी। जबकि कुछ महीने पहले उसने इनरवियर बनाने वाली कंपनी डिक्सी टेक्सटाइल्स में नियंत्रण हासिल किया था।
 
इंडिया रीसर्जेंस फंड (इंडियाआरएफ) के शांतनु नालावाड़ी ने कहा, 'पिछले 18 से 24 महीन के दौरान हमने देखा है कि तमाम भारतीय उद्यमी स्वामित्व और प्रबंधन के बीच अंतर करने के लिए तैयार हैं। वे पेशेवर प्रबंधन के तहत अपनी संपत्ति को फलते-फूलते देखना चाहते हैं। इससे पीई फंडों के लिए नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी हासिल करने और वैश्विक विशेषज्ञता लाने का अवसर पैदा हुआ है।'
Keyword: equity, PE, market,,
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