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कारोबारी संपर्क की भाषा बनती हिंदी

संदीप कुमार /  September 13, 2018

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही कारोबार और संपर्क की भाषा के रूप में अंग्रेजी सबसे बड़ी विकल्प है लेकिन फिर भी भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए हिंदी अनिवार्य जरूरत बनती जा रही है। हिंदी देश की 22 आधिकारिक भाषाओं में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। दुनिया के कई देशों में औषधि निर्यात करने वाली कंपनी हिंद फार्मा के चेयरमैन आर एस गोस्वामी कहते हैं कि विदेशी कारोबार में हिंदी बहुत काम आती है। अगर विदेशी कारोबारी हिंदुस्तानी हुए तो हिंदी बोलने भर से सौदा बहुत आसान हो जाता है। जबकि विदेशी कारोबारियों में भी हिंदी बोलने का शौक हाल के दिनों में बढ़ रहा है। 

 
गोस्वामी बताते हैं कि अफगानिस्तान, मॉरीशस के अलावा नीदरलैंड के कई कारोबारियों से कारोबारी बातचीत हिंदी में ही होती है।  रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में कारोबार करने की इच्छुक कंपनियों को अक्सर ऐसे मुख्य कार्याधिकारियों की तलाश रहती है जो कम से कम कुछ हिंदी बोल सकें। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर संपर्क कायम करने में सुविधा होती है। हिंदी का एक विशेष पाठ्यक्रम चलाने वाले पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग के प्रोफेसर माउरो गिलेन एक परिचर्चा में कहते हैं, 'अक्सर यह कहा जाता है कि अंग्रेजी पूरी दुनिया के कारोबारी वर्ग की भाषा है। परंतु भारत की बात करते हुए हम एक चीज भूल जाते हैं कि हाल के कुछ वर्षों में भारत आर्थिक रूप से बहुत शक्तिशाली होकर उभरा है। विदेशी कारोबारी केवल कारोबार नहीं करते बल्कि वे उस देश के बारे में काफी कुछ जानना चाहते हैं जहां वे कारोबार कर रहे हैं। भारत की संस्कृति और इतिहास को जानने के इच्छुक कारोबारी भी हिंदी सीखने में रुचि लेते हैं।' 
 
स्वरोजगार और उद्यमिता के इस दौर में उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में रोज नये कारोबारी निकल कर सामने आ रहे हैं। अब कारोबार चंद बड़े कारोबारियों की बपौती नहीं रह गए हैं। चीन, ताइवान समेत पूर्वी एशिया के कई देशों के साथ देश के छोटे कारोबारी भी कारोबार कर रहे हैं। हिंदी भले ही भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है लेकिन ये कारोबारी आज भी अपनी मातृभाषा में बहुत सहज हैं। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के कारोबारी मनीष शर्मा कहते हैं कि विदेशी कारोबारी पहले 'नमस्ते' और 'धन्यवाद' जैसे इक्का दुक्का शब्द बोलकर हिंदुस्तानी कारोबारियों को चौंका देते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वे अच्छी खासी हिंदी बोलने लगे हैं। 
 
विदेशियों के इस हिंदी ज्ञान में हिंदी चैनलों और बॉलीवुड की भी काफी अहम भूमिका है। कई विदेशी विश्वविद्यालयों में बाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि भारत में कारोबार करने की इच्छा रखने वाले लोग हिंदी बोलना और समझना सीख लें। दीर्घावधि में पूरी दुनिया को भारत और उसके कारोबारियों को और अधिक गंभीरता से लेना होगा। अब जबकि भारत तेजी से एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है तो दुनिया के कई प्रमुख कारोबारी समूहों के लिए हिंदी सीखना एक आवश्यकता बन गया है। जमीनी कारोबारी हकीकतों को समझने के लिए स्थानीय भाषा को समझना बहुत आवश्यक है। भारत की यात्रा पर आए जापान के दाइतो बुंका विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हिदियाकी इशिदा हालांकि स्वयं बहुत परिष्कृत हिंदी बोलते हैं लेकिन वह कहते हैं कि हिंदी को विदेशों में और अधिक ग्राह्य बनाने के लिए दूसरी भाषाओं के कुछ कठिन शब्दों को जस का तस अपनाया जाना भी गलत नहीं होगा। वह कहते हैं कि किसी भी भाषा में नये शब्द जुड़ते रहें तो भाषा चलायमान रहती है। भाषा के भविष्य के लिए यह बेहतर बात है। उदाहरण के लिए हेज फंड या प्राइवेट इक्विटी की हिंदी तलाशने से बेहतर है इनको जस का तस स्वीकार कर लिया जाए। 
 
बतौर वैश्विक समुदाय हम सभी को सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार करना होगा। यह भाषा के क्षेत्र में भी हमारे सामने आती है। इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि विश्व अर्थव्यवस्था में कारोबार प्रमुख है। यहां हर उस भाषा के लिए अवसर है जो दूसरों को आपके साथ कारोबार का अवसर प्रदान करती है। भारत आने वाले कारोबारियों के लिए हिंदी इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बिना स्थानीय भाषा की जानकारी के वे स्थानीय संस्कृति से तालमेल नहीं बिठा पाएंगे। असल बात यह है कि आप सामने वाले को अपनी बात समझाने में या प्रभावित कर पाने में कामयाब हो पाते हो या नहीं। 
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