बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी की व्यवस्था में करवंचना का खतरा?
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जीएसटी की व्यवस्था में करवंचना का खतरा?

सुकुमार मुखोपाध्याय /  September 12, 2018

हाल ही में एक राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि वस्तु एवं सेवा शुल्क (जीएसटी) को धता बताते हुए करवंचना करने के लिए कुछ छद्म (शेल) कंपनियां सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक अगर जीएसटी को लागू करने के पहले कुछ और प्रयोग किए गए होते तो इससे बचा जा सकता था। उक्त मंत्री जीएसटी का डिजाइन तैयार करने के लिए जिम्मेदार रहे और जीएसटी परिषद के सदस्य भी हैं।

मैं यह आलेख ऐसी मिथ्या धारणा को समाप्त करने के लिए लिख रहा हूं कि कुछ समय तक परीक्षण करने से जीएसटी से करवंचना का संकट दूर हो सकता था। जीएसटी का परीक्षण दुनिया के कई अन्य देशों, खासतौर पर यूरोप के देशों में दशकों तक हुआ है लेकिन वहां भी ऐसी धोखाधड़ी हो रही है। मैं यहां जो उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूं वह दिखाएगा कि परीक्षण करने से ऐसी करवंचना नहीं रुकती। सफलता केवल तभी मिल सकती है जब करवंचना करने वाले करदाताओं पर निरंतर नजर रखी जाए। 

1. फर्जी इनवॉयस की मदद से अतिरिक्त इनपुट क्रेडिट लेने वाले। 
अतिरिक्त क्रेडिट और रियायत के लिए झूठे दावे पेश किए जाते हैं। खासतौर पर फर्जी इनवॉयस की मदद से ऐसा करना एक आम व्यवहार है और सबसे महत्त्वपूर्ण भी। चूंकि करदाता खुद क्रेडिट ले सकता है और पांच साल में एक बार के अलावा इसका अंकेक्षण होने की आशंका भी नहीं होती है। एक वजह यह भी है कि इनवॉयस की तादाद बहुत अधिक होती है और विनिर्माताओं और डीलरों में यह प्रवृत्ति होती है कि वे इनपुट क्रेडिट हासिल करने के लिए कुछ फर्जी इनवॉयस लगा दें। 
2. अतिरंजित रिफंड दावा
3. बिक्री छिपाना
4. नकद खरीद की जानकारी छिपाना
5. पंजीयन न करना
6. अधिग्रहण संबंधी धोखाधड़ी
वैट संग्रह करना लेकिन 

सरकार को चुकता न करना।

7. केरसेल फ्रॉड

कथित रूप से पूर्व चुकता वैट का रिफंड लेने के लिए वस्तुओं का फर्जी लेनदेन दिखाया जाता है। बहरहाल वस्तुओं की खरीद और पुनर्बिक्री का काम किसी अन्य राज्य में स्थित कंपनी को किया जाता है। परिणामस्वरूप परिचालक बिना वैट चुकाए रिफंड का दावा करता है। ये झूठी आपूर्ति अग्रिम भी हो सकती है। इसके लिए फर्जी कंपनियां बनाकर यह भ्रम तैयार किया जा सकता है कि वस्तुएं किसी अन्य राज्य को आपूर्ति की जा रही हैं। इस धोखाधड़ी की बदौलत मिलान में अंतर उत्पन्न होगा क्योंकि फर्जी खरीदार के राज्य में कोई आपूर्ति दर्ज नहीं होगी। 

मई 2006 में जारी आंकड़ों पर गौर करें तो यूरोपीय संघ को होने वाले वैट नुकसान का आंकड़ा 6,000 करोड़ से 10,000 करोड़ डॉलर वार्षिक ठहरता है। यह आंकड़ा फैब्रिजियो बॉर्सेली ने इंटरनैशल वैट मॉनिटर के सितंबर-अक्टूबर 2008 अंक में दिया है। 

8. क्लोनिंग धोखाधड़ी

इस तरह की धोखाधड़ी में कोई व्यक्ति बिना पंजीयन कारोबार करता रहता है। वह किसी अन्य के वैट पंजीयन का इस्तेमाल करता है। डीलर बिना वैट रिटर्न चुकता किए गायब हो जाता है क्योंकि वह दूसरे के वैट पंजीयन का इस्तेमाल जाहिर तौर पर नहीं कर सकता। 

9. फर्मों का कृत्रिम अलगाव

उल्लिखित सीमा से नीचे रहने के लिए कुछ फर्म खुद को दो या तीन टुकड़ों में बांट लेती हैं। जबकि वित्तीय नियंत्रण मुख्य फर्म के पास ही रहता है। अन्य फर्म मुख्य फर्म की डमी बनकर रहती हैं। 

वैट का अंतर

वैट का अंतर वह अंतर है जो विशुद्घ सैद्घांतिक कर जवाबदेही और वास्तविक वैट राजस्व के बीच होता है। यह वैट की धोखाधड़ी और गतिविधियों की वंचना और अनुपालन न होने का प्रतिनिधित्व करता है। कितने वैट की चोरी की गई इसका आकलन करने के लिए करयोग्य बिक्री, क्रय से मिली टैक्स क्रेडिट और निवेश से हुई कर क्रेडिट का ध्यान रखना होगा जो सभी अनुमान हैं। इन अनुमानित आंकड़ों के साथ सैद्घांतिक कर आधार का आकलन किया जा सकता है। 

इसके बाद संभावित प्राप्तियों की राशि का आकलन किया जाता है। इसके लिए सैद्घांतिक कर आधार पर आम दरों को लागू किया जाता है। यह तरीका कारगर रहता है अगर कर वैट की दर एकल हो। अगर कई दरें हों तो वैट के अंतर का आकलन करना बेहद मुश्किल हो जाता है। 

एक बार फिर फैब्रिजियो बॉर्सेली की बात उधार लें तो उन्होंने इंटरनैशनल वैट मॉनिटर के सितंबर-अक्टूबर 2008 के अंक में कहा था कि अगर करवंचना रोकने के तमाम उपाय लागू कर दिए जाएं तो भी यूरोपीय संघ के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि कर वंचना को रोकपाना अभी तक संभव नहीं हो सका है।

निष्कर्ष 

इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि जीएसटी/वैट, टर्नओवर कर की तुलना में कर वंचना की दृष्टिï से कम जोखिम भरा है। यूरोपीय संघ, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया में करवंचना के तमाम मामले हुए हैं जो अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित भी हुए हैं। 

हमारे देश को भी करवंचकों की चतुराई पकडऩे के लिए कर वंचनारोधी उपाय अवश्य विकसित करने चाहिए। तथाकथित स्वनियमन व्यवस्था इतने प्रभावी ढंग से काम नहीं करती है। हालांकि सैद्घांतिक तौर पर ऐसा होने का दावा किया जाता है। 

(लेखक केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के सेवानिवृत्त सदस्य हैं। लेख में प्रस्तुत विचार निजी हैं।) 
Keyword: GST, Shell, Experiment, Country, World, Europe,
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