बिजनेस स्टैंडर्ड - सुरक्षा को लेकर 328 दवाओं पर लगा प्रतिबंध
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सुरक्षा को लेकर 328 दवाओं पर लगा प्रतिबंध

अनीश फडणीस / नई दिल्ली 09 12, 2018

डीटीएबी ने मूल रूप से 349 दवाओं के खिलाफ सिफारिश की थी

 

बिजनेस स्टैंडर्ड सुरक्षा को लेकर 328 दवाओं पर लगा प्रतिबंध

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज सुरक्षा को आधार बनाते हुए फिक्स्ड डोज कंबिनेशन (एफडीसी) की 328 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर दी। यह प्रतिबंध औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (डीटीएबी) की सिफारिशों के मुताबिक लगाया गया है। वहीं एंटी डायबिटिक दवाओं, एंटी बॉयोटिक और एनलजेसिक दवाओं सहित 6 एफ डीसी के विनिर्माण और बिक्री पर बाध्यताएं लगाई गई हैं। 

जून में डीटीएबी ने मूल रूप से 349 दवाओं के खिलाफ सिफारिश की थी, लेकिन 1988 के पहले की मंजूर की गई 15 दवाओं को इससे बाहर रखा गया है। इन 15 दवाओं में खांसी की दवाएं फेनसेडिल और टिक्सिलिक्स का कारोबार 7 अरब रुपये से ज्यादा का है। 

 

बहरहाल इस प्रतिबंध से 15 अरब रुपये की बिक्री प्रभावित होगी, लेकिन वास्तविक आंकड़ों का तत्काल अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। घरेलू दवा बाजार का आकार करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये है और इसकी बिक्री में एफडीसी की हिस्सेदारी करीब आधी है।

डीटीएबी की सिफारिशों में जो 340 से ज्यादा उत्पाद शामिल हैं, उनकी हिस्सेदारी कुल कारोबार में 2.3 प्रतिशत या करीब 28 अरब रुपये की है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आईक्यूवीआईए ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि प्रतिबंधित होने वाली दवाओं में प्रमुख 5 एफडीसी की बाजार हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है। 

मार्च 2016 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने चंद्रशेखर कोकाटे समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए 349 एफडीसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। रिपोर्ट में पाया गया था कि दवाओं के ये कंबिनेशन अतार्किक हैं और उपचार को लेकर इनकी कोई तार्किकता नहीं है। 

दवा कंपनियां इस कदम के खिलाफ न्यायालय चली गईं। पिछले साल दिसंबर में उच्चतम न्यायालय ने यह मामला डीटीएबी को आगे की समीक्षा के लिए सौंप दिया। जून महीने मेंबोर्ड ने 343 एफडीसी को बंद किए जाने और 6 अन्य का उत्पादन और बिक्री सीमित किए जाने का सुझाव दिया। 

आल इंडिया ड्रग ऐक्शन नेटवर्क (एआईडीएएन) ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। एआईडीएएन की मालिनी असोला ने कहा, ‘इससे हमारी इस मांग को बल मिला है कि सिर्फ तार्किक दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति मिलनी चाहिए। सुरक्षा, असर और उपचार को लेकर दवाओं का तार्किक होना जरूरी है। इन एफडीसी में से कोई भी तार्किकता और सुरक्षा के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।’ 

Keyword: AIDAN, Malini Asola, DTAB, FDC, Health Ministry,
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