बिजनेस स्टैंडर्ड - गहराती अनिश्चितता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, September 21, 2018 05:47 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

गहराती अनिश्चितता

संपादकीय /  September 11, 2018

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर संकटग्रस्त बिजली कंपनियों के खिलाफ कर्जदाताओं द्वारा कोई नया कदम उठाने पर रोक लगा दी। उसने विभिन्न अदालतों में हो रही सुनवाइयों को अपने पास स्थानांतरित करने का निर्देश देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कहा कि वह नवंबर में याचिका की सुनवाई होने तक यथास्थिति बरकरार रखे। इससे बिजली उत्पादक महासंघ को राहत मिली है। उसका दावा है कि इससे कंपनियों को करीब 13 गीगावॉट क्षमता की फंसी हुई बिजली उत्पादन परिसंपत्तियों के लिए निस्तारण योजना तैयार करने का अवसर मिलेगा। दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने आरबीआई के 1 मार्च के परिपत्र पर स्थगन आदेश जारी किया है जिसके तहत भुगतान में एक दिन की भी देरी होने पर कंपनियों को ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता की प्रक्रिया के हवाले करने की बात कही गई थी। इसके निस्तारण के लिए 180 दिन की अवधि निर्धारित की गई थी। अगर उस समय सीमा को माना जाए तो वह अवधि अगस्त के अंत में समाप्त हो चुकी है। 

 
ऐसे में यह स्पष्टï है कि फंसे हुए कर्ज (एनपीए) के संकट को लेकर सरकार की सोच बेबुनियाद है। कानूनी कदमों ने देश के फंसे हुए कर्ज की समस्या के निस्तारण के प्रयासों को काफी उलझा दिया है। आईबीसी प्रक्रिया का एक लाभ तो यह है कि इससे बकाया के मसले का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित होता है। कानूनी देरी से उन समस्याओं का कोई स्थायी हल नहीं निकल सकेगा जो दरअसल ढांचागत बदलावों की वजहों से पैदा हुई हैं। इससे केवल क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता ही बढ़ेगी और बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता गिरेगी। आरबीआई ने आखिरकार एक ठोस रुख अपनाया ताकि इस संकट से निजात पाई जा सके। ऐसे में अगर आगे चलकर समझौतावादी रुख अपनाना पड़ा तो यह दुखद होगा। नवंबर आने में अभी देरी है और यह भी तय नहीं है कि कैसे मौजूदा संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का बचाव किया जाएगा।
 
हो चुके निवेश का बड़ा हिस्सा कच्चे माल की आपूर्ति, बिजली की मांग और बिजली खरीद समझौतों की उपलब्धता पर ही आधारित था। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति यह परीक्षण करने में लगी हुई है कि इस क्षेत्र को कैसे उबारा जाए। उसे कुछ ठोस निर्णय लेने होंगे। फिर भी उसे इस अनुमान के अधीन काम नहीं करना चाहिए कि कानून व्यवस्था उसे और अधिक समय देगी या फिर बिजली क्षेत्र को उबारने के लिए सरकारी संसाधन हमेशा मिलते रहेंगे।  इससे जुड़े कई ऐसे मुद्दे मंडरा रहे हैं जो उत्पादन से जुड़े विभिन्न उप क्षेत्रों को परेशानी में डाल रहे हैं। कोयला आधारित बिजली संयंत्र फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं लेकिन उन्हें उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक अपनानी होगी। यह तकनीक उन नियमन के अनुरूप है जिनका पालन भारत को पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में जताई गई प्रतिबद्घता के तहत करना है। इस निवेश के लिए वित्तीय मदद जुटाना आसान नहीं। गैस आधारित बिजली कच्चे माल की कमी से जूझ रही है। 24 गीगावॉट क्षमता वाली गैस आधारित बिजली क्षमता का करीब एक तिहाई हिस्सा बिना इस्तेमाल का है। दूसरे शब्दों में कहें तो बिजली क्षेत्र की समस्या मौजूदा एनपीए संकट से कहीं अधिक गहरी है। इसका निस्तारण ऐसा हो कि जलवायु परिवर्तन से भी समझौता न करना पड़े और वह भविष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से भी तार्किक हो। समझौता ऐसा हो कि मौजूदा संयंत्र संचालित होते रहें। सरकार इस दिशा में और देर नहीं कर सकती। फंसे कर्ज से निपटने के लिए दिवालिया प्रक्रिया को पूरी छूट दी जानी चाहिए। लब्बोलुआब यह कि किसी सरकारी अधिकारी की ओर से ऐसा बयान नहीं आना चाहिए जो एनपीए संकट को लेकर झूठी उम्मीद बंधाए। 
Keyword: power, electric, supreme court, high court, RBI, defaulter, उच्चतम न्यायालय,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 लघु बचत की दरें बढ़ाने के बाद बैंकों पर भी ब्याज बढ़ाने का होगा दबाव?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.