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नहीं थमी गिरावट शेयर, रुपया धड़ाम

समी मोडक और अनूप रॉय / मुंबई September 11, 2018

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भी खलबली जारी रही। देश के वृहद आर्थिक हालात बिगडऩे की आशंका के बीच शेयर, रुपये और बॉन्ड तीनों की हालत खस्ता रही। तेल कीमतों में तेजी और रुपये में लगातार कमजोरी से देश का चालू खाते का घाटा  बढऩे और मूल्यांकन महंगा होने से कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने देसी शेयरों से निवेश निकालना जारी रखा।  बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स मंगलवार को 509 अंक गिरकर 37,413 पर बंद हुआ। इस तरह, पिछले दो दिनों में सेंसेक्स 977 अंक गिर चुका है। 
 
एनएसई का निफ्टी भी 150 अंक फिसलकर 11,287.50 पर बंद हुआ। रुपये में गिरावट बदस्तूर जारी रही और 0.34 प्रतिशत गिरकर डॉलर के मुकाबले 72.70 पर बंद हुआ। इतना ही नहीं, सरकारी बॉन्ड पर प्राप्तियां भी 3 प्रतिशत उछलकर 8.18 प्रतिशत तक पहुंच गईं। बाजार में मची भगदड़ पर एडिलवाइस ग्रुप के मुख्य कार्याधिकारी राशेश शाह ने कहा, 'वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है। ज्यादातर तेजी से उभरते बाजारों में शेयर और मुद्राएं धड़ाम हो रहे हैं। थोड़ी बहुत अनिश्चितता से हमें घबराना नहीं चाहिए। हमने हमेशा कहा है कि बाजारों में 5 से 10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।' 
 
वैश्विक स्तर पर व्यापार से जुड़ी चिंताओं और तेजी से उभरते बाजारों की मुद्राओं में गिरावट के बाद जोखिम भरी परिसंपत्तियों से निवेशक दूर रहने लगे हैं। एफपीआई ने मंगलवार को 14.5 अरब रुपये मूल्य के शेयर बेचे। इस तरह, एक महीने में उन्होंने 65 अरब रुपये की बिकवाली की है। क्रेडिट सुइसे वेल्थ मैंनेजमेंट में इंडिया इक्विटी रिसर्च प्रमुख जितेंद्र गोहिल ने कहा, 'बढ़ी ब्याज दरों, चुनावों से पहले वृहद आर्थिक हालत बिगडऩे के मद्देनजर निकट अवधि में शेयर बाजार में शेयरों की रेटिंग कमजोर हो सकती है।' 
 
क्रेडिट सुइसे के अनुसार जीएसटी के तहत उम्मीद से कम संग्रह, राजकोषीय घाटा लक्ष्य पूरा करने में सरकार को रही मुश्किलें, रुपये में लगातार गिरावट और तेल कीमतों में तेजी से वृहद आर्थिक हालत प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान रुपया एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही है। अमेरिका मुद्रा डॉलर के मुकाबले इसमें 12.14 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। मुद्रा सलाहकार कंपनी आईएफए ग्लोबल ने कहा, 'अगर तेजी से उभरते बाजारों में घबराहट नहीं थमी तो अगले तीन से चार महीने में रुपये में अतिरिक्त 3 से 4 प्रतिशत की गिरावट से इनकार नहीं किया सकता।' एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभिषेक बरुआ ने कहा कि रुपये में गिरावट को एक संकट के रूप में देखना चाहिए। 
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