बिजनेस स्टैंडर्ड - केरल की बाढ़ में छिपे चेतावनी भरे संदेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, September 20, 2018 08:30 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

केरल की बाढ़ में छिपे चेतावनी भरे संदेश

जमीनी हकीकत
सुनीता नारायण /  September 10, 2018

'गॉड्स ओन कंट्री' के नाम से मशहूर केरल पहाड़ों, नदियों, धान के खेतों और समुद्री तटों से भरा इलाका है। यहां पर प्राकृतिक सुंदरता की भरमार है। लेकिन यह खूबसूरत जगह उसी दुनिया में स्थित है जो हानिकारक रूप से गैर-संवहनीय है। इसकी वजह यह है कि यहां के लोगों ने पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया है और हमारी दुनिया की जलवायु को भी जोखिम में डाला जा चुका है। ऐसी स्थिति में वही होता है जो 'भगवान के अपने देश' में अगस्त के महीने में देखने को मिला। यह डूब गया था। उफनती नदियों और भूस्खलन ने इस राज्य में तबाही मचा दी। कहा जा रहा है कि इस बाढ़ ने केरल में इस कदर नुकसान पहुंचाया है कि एक तरह से समूचे राज्य का नए सिरे से निर्माण करना होगा।

 
गौर से विचार करें तो यही लगेगा कि केरल लंबे समय से इस तरह की आपदा का इंतजार कर रहा था। राज्य में छोटी-बड़ी 44 नदियां हैं जो पश्चिमी घाट से निकलती हैं और अमूमन 100 किलोमीटर से भी कम दूरी तय कर समुद्र में मिल जाती हैं। यह उष्ण-कटिबंधीय क्षेत्र भी है जहां खूब बारिश होती है। इसका मतलब है कि राज्य में जलनिकासी का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए। पश्चिमी घाट वाले उष्ण-कटिबंधीय वनाच्छादित पहाड़ी इलाके में मौजूद 61 बांध इस जलनिकासी पारिस्थितिकी का एक अंग हैं। मुख्यत: बिजली उत्पादन के लिए बनाए गए इन बांधों में मॉनसून के समय पानी जमा होता है और बारिश खत्म होने के बाद पानी को छोड़ा जाता है। लेकिन इस बार केरल में मूसलाधार बारिश हुई और 15-20 दिनों में ही 7.71 सेंटीमीटर बारिश हो गई। इसमें भी 75 फीसदी बारिश महज आठ दिनों में हुई। भारी बारिश के चलते ये बांध ही आपदा का सबब बन गए। 
 
मूसलाधार बारिश होने से पहाड़ी इलाकों में चट्टïानों के दरकने का सिलसिला शुरू हो गया जिसकी चपेट में आने से कई लोगों की मौत हो गई। चंद दिनों में ही भारी बारिश से जलाशयों में इतना पानी इक_ïा हो गया कि उनके गेट खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा न करने पर बांधों की दीवारें टूटने का खतरा था। सबसे बड़े बांधों में से एक इडुक्की के गेट 26 साल बाद पहली बार और अब तक केवल तीसरी बार खोले गए। दरअसल मॉनसूनी बारिश के चलते जुलाई में ही बांधों के जलाशय काफी हद तक भर चुके थे। बारिश के वितरण में असंतुलन होने से बांध संचालकों ने जलाशयों में जमा पानी को छोडऩा भी मुनासिब नहीं समझा। उन्हें यह सूचना नहीं थी कि अगस्त में इतनी भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा उन्हें यह भी यकीन था कि बिजली पैदा करने के लिए जरूरी बारिश होगी और उनके जलाशय लबालब भर जाएंगे। इन वजहों से अगस्त की बारिश ने इस आपदा को कई गुना बढ़ा दिया। सच तो यह है कि मौसम प्रणाली में हो रहे बदलाव का सामना करने के लिए हमारे पास कोई योजना ही नहीं है। हम मॉनसून के प्रतिकूल एवं बदलावकारी चरित्र से निपटने के लिए तनिक भी तैयार नहीं हैं। लिहाजा हमें यह बात पूरी तरह साफ होनी चाहिए कि केरल की बाढ़ पूरी तरह मानव-निर्मित है।
 
यह त्रासदी वैश्विक उत्सर्जन पर काबू पाने में हमारी साझा नाकामी का नतीजा है। वैश्विक उत्सर्जन की वजह से अजीब मौसमी घटनाएं घट रही हैं। यह संसाधनों के हमारे कुप्रबंधन का नतीजा है। राज्य ने जंगली क्षेत्र से होकर धान के खेतों और वहां से तालाबों एवं नदियों तक जाने वाली जलप्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। तालाबों एवं नदियों में अतिरिक्त पानी को इक_ïा किया जा सकता था। यह हमारी तकनीकी एजेंसियों की अक्षमता भी है कि बाढ़ नियंत्रण और बांध प्रबंधन की सटीक योजना नहीं बनाई जा सकी। इस तरह यह त्रासदी मानव-निर्मित है। सबसे अहम बात यह है कि इसके मानव-निर्मित होने की वजह यह है कि हम इसे नया सामान्य मानने को तैयार नहीं हैं। हम यह मानना चाहते हैं कि यह महज एक अनूठी और सौ साल में एक बार होने वाली घटना है जिससे निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की जा सकती है।
 
हमें सच को स्वीकार करना होगा, केवल शब्दों में ही नहीं बल्कि व्यवहार में भी। केरल का एक तरह से पुनर्निर्माण होने जा रहा है। वह दोबारा वही गलती नहीं दोहरा सकता है। उसे मौसमी बारिश के इस नव-सामान्य पहलू (असमान वितरण एवं अत्यधिक बारिश) को ध्यान में रखते हुए नवनिर्माण करना होगा। लिहाजा केरल को हरेक नदी, नाले, तालाब, खेत और शहर से जल निकासी की समुचित योजना बनानी होगी और हरेक कीमत पर उनका संरक्षण करना होगा। प्रत्येक घर, संस्थान, गांव और शहर को वर्षाजल संचयन के लिए इंतजाम करना होगा ताकि बारिश के पानी को रास्ता दिखाया जा सके और उससे जलस्तर को भी बढ़ाया जा सके। वन पारिस्थितिकी का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि लोगों को फायदा हो। जंगली इलाके में पौधरोपण इस तरह किया जाए कि मृदा संरक्षित रहे। लेकिन जलवायु परिवर्तन के जोखिम वाले दौर में इतना काफी नहीं होगा।
 
इस नव-सामान्य परिघटना में सरकारों को परिवर्तनशीलता के लिए भी योजना बनानी होगी। इसका मतलब है कि मौसम के सटीक पूर्वानुमान और उस सूचना से अवगत कराने के लिए सरकार को तकनीकी क्षमताएं बढ़ानी होंगी। केरल की बाढ़ के संदर्भ में देखें तो इसे भयंकर रूप लेने से तभी रोका जा सकता था जब जुलाई के पहले ही मॉनसून की भारी बारिश के बारे में जानकारी उपलब्ध होती। ऐसा होने पर बांधों में जमा पानी को छोड़ दिया जाता और जलाशयों की भंडारण क्षमता को भारी बारिश के लिए तैयार रखा जाता। सवाल है कि ऐसा किस तरह किया जा सकता है? अगली बाढ़ को इतना भयंकर रूप लेने से रोकने के लिए क्या करना होगा? जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसम वैज्ञानिकों से लेकर जल संसाधन एवं बाढ़ प्रबंधन से जुड़े तकनीकी संस्थानों के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यही है और हमें इसका जवाब तलाशना होगा। यह अब सामान्य स्थिति नहीं रह गई है। वह वक्त बीत चुका है और हमें इस बात को साफ-साफ समझ लेना होगा।
Keyword: kerala, flood, fund,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मोर सौदे से रिटेल स्टोर कारोबार में बढ़ेगा एमेजॉन का दबदबा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.