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एनआरआई को एफपीआई कोटे में शामिल करेगा सेबी

पवन बुरुगुला / मुंबई September 10, 2018

बाजार नियामक सेबी प्रवासी भारतीयों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के कोटे में शामिल करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि नियामक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ऐसे विलय पर राय मांगी है। इस कदम से देश में विदेशी निवेश का नया स्रोत खुल सकता है क्योंकि नियामकीय पाबंदियों के चलते अभी प्रवासी भारतीय (एनआरआई) बड़े निवेशक नहीं हैं। निवेश के लिए प्रवासी भारतीय सामान्य तौर पर म्युचुअल फंड का जरिया अपनाते हैं, हालांकि यह जरिया उन्हें कंपनी विशेष में निवेश की अनुमति नहीं देता।
 
सेबी के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत हर साल एनआरआई से हर साल 10-15 अरब डॉलर हासिल करता है। एनआरआई निवेशकों के पास भारतीय इक्विटी में कुल परिसंपत्तियां 50 करोड़ डॉलर से कम है।  एफपीआई के नियमों को आसान बनाने की खातिर गठित एचआर खान समिति ने एनआरआई निवेश को एफपीआई में शामिल करने पर चर्चा की थी। समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि वह इस मसले पर उन सिफारिशों पर विचार कर रही है जिसे केंद्र सरकार और आरबीआई के सामने रखा जा सके।
 
सूत्रों ने कहा कि विशिष्ट केवाईसी नियमों का पालन करने वाले एनआरआई को एफपीआई श्रेणी-2 व श्रेणी-3 के तहत अनुमति दे सकता है, जो उनके फंड की प्रकृति पर निर्भर करेगा। यह प्रगति ऐसे समय में देखने को मिली है जब डॉलर के मुकाबले रुपया नया निचला स्तर बना रहा है। डॉलर के मुकाबले देसी मुद्रा 12 फीसदी टूटकर 72.45 रुपये पर आ गया है। 10 अप्रैल के सर्कुलर के जरिए एफपीआई मार्ग से आने वाले एनआरआई निवेश पर पाबंदी को लेकर हाल के महीने में सेबी ने आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। एक सूत्र ने कहा, एनआरआई के लिए निवेश नियमों को आसान बनाना पुरानी मांग रही है क्योंकि इसमें भारतीय बाजारों के लिए आकर्षक निवेश आकर्षित करने की क्षमता है। मौजूदा नियामकीय ढांचा एनआरआई निवेश के अनुकूल नहीं है। एफपीआई की श्रेणी-3 के तहत कई अविनियमित इकाइयों को भारत में निवेश की अनुमति है। ऐसे में फैमिली ट्रस्ट जैसे संस्थान से एनआरआई निवेश आ रहा हो तो इसे एफपीआई श्रेणी-3 के तहत अनुमति दी जा सकती है।
 
भारतीय बाजार की गतिविधियां का विनियमन सेबी करता है, लेकिन देश में आने वाले एनआरआई निवेश को प्रशासित करने का काम विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम के तहत आरबीआई करता है। इस अधिनियम के कुछ मौजूदा प्रावधान एनआरआई को देसी निवेशकों व एफपीआई के मुकाबले सुविधाहीन श्रेणी में रखते हैं।  आईसी यूनिवर्सल लीगल के पार्टनर तेजेश चितलंगी ने कहा, एनआरआई निवेश के नियमों में सुधार का स्वागत होगा क्योंकि भारत बड़ा निवेश हासिल कर पाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया के लिए अंतर-नियामकीय संपर्क की दरकार होगी क्योंंकि आरबीआई, कर विभाग का भी इसमें दखल है। पूरी तरह से पाबंदी लगाने के बजाय निवेश की अनुमति देना और रकम के प्रवाह की निगरानी में सुधार लाना बेहतर है।
 
फेमा के नियमों के मुताबिक, एनआरआई अपना पोर्टफोलियो निवेश सिर्फ बैंकों की चयनित शाखाओं के जरिए कर सकता है, जहां उसका खाता पंजीकृत हो। यह अपेक्षाकृत सख्त व्यवस्था है क्योंकि अन्य निवेशक वर्ग अपने ब्रोकरों के जरिए शेयरों की खरीद-बिक्री करता है। निवेश की सीमा भी काफी कम है क्योंकि एनआरआई किसी एक कंपनी की पांच फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकता और एनआरआई मिलकर किसी कंपनी की 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं ले सकते। इसकी तुलना में एफपीआई किसी कंपनी में 10 फीसदी तक हिस्सेदारी ले सकते हैं और ज्यादातर क्षेत्रों में 100 फीसदी एफपीआई निवेश की अनुमति भी है। एनआरआई को डिलिवरी के आधार पर ही ट्रेड की अनुमति है, जो डेरिवेटिव व अन्य हाइब्रिड उत्पादों पर दांव लगाने की उनकी आजादी पर रोक लगाता है। 
 
धनशोधन की चिंता के चलते एनआरआई के नियमों को सख्त रखा गया है। एचआर खान समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट शनिवार को सौंपी, जिसमें उसने कई सुझाव पेश किए हैं। इन सुझावों में एनआरआई को किसी एफपीआई में 25 फीसदी तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी लेने की अनुमति देना शामिल है।
Keyword: NRI, FPI, SEBI,,
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