बिजनेस स?टैंडर?ड - कैसे पूरे होंगे नई दूरसंचार नीति के अरमान...
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, December 02, 2022 02:54 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

कैसे पूरे होंगे नई दूरसंचार नीति के अरमान...

सुरजीत दास गुप्ता /  09 10, 2018

डिजिटल संचार नीति

बिजनेस स?टैंडर?ड कैसे पूरे होंगे नई दूरसंचार नीति के अरमान...राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति में कई महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह नीति छह साल के अंतराल के बाद जारी की गई है। इससे पहले आई नीति को राष्ट्रीय दूरसंचार नीति नाम दिया गया था। दूरसंचार विभाग ने राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति में कुछ कठोर लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसमें वर्ष 2022 तक देश के हर नागरिक को 50 एमबीपीएस रफ्तार के साथ यूनिवर्सल ब्रॉडबैंड कवरेज मुहैया कराना शामिल है। अभी देश में औसत डेटा स्पीड करीब 9.14 एमबीपीएस है। साथ ही सरकार ने अगले पांच साल में देश के आधे घरों में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 

साथ ही वर्ष 2020 तक देश में 50 लाख सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट बनाए जाएंगे और फिर अगले दो वर्षों में इस संख्या को दोगुना करने की योजना है। इसके अलावा देश के कम से कम 60 फीसदी मोबाइल टावरों को फाइबर से जोड़ा जाएगा जो अभी माइक्रोवेव लिंक से जुड़े हैं। क्या ये लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं या ये कपोल कल्पना है? इस बात को लेकर बहुत चर्चा हो रही है कि रिलायंस जियो ने देश में डेटा क्रांति की शुुरुआत कर दी है लेकिन जीएसएमए इंटेलीजेंट-एनालिसिस मेसन के एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 2017 के अंत तक मोबाइल ब्रॉडबैंड की पहुंच महज 31 फीसदी थी। यह वैश्विक औसत का आधा है और वियतनाम (36 फीसदी), नाइजीरिया (42 फीसदी) तथा इंडोनेशिया (53 फीसदी) से भी कम है। भारत की अधिकांश आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है जहां इंटरनेट की पहुंच 15 फीसदी से भी कम है। इन इलाकों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। निजी क्षेत्र को लगता है कि उसके लिए ग्रामीण इलाकों में भारी निवेश करना फायदे का सौदा नहीं है। 

जाहिर है कि दूरसंचार कंपनियों का भी मानना है कि नई नीति में निर्धारित किए गए लक्ष्य वास्तविकता के अनुरूप नहीं हैं। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने कहा, 'देश के सभी लोगों को 50 एमबीपीएस की स्पीड के साथ ब्रॉडबैंड सेवा मुहैया कराने के लिए हर दूरसंचार कंपनी को 400 मेगाहट्र्ज से अधिक स्पेक्ट्रम चाहिए जो उनके पास अभी मौजूद स्पेक्ट्रम से 10 गुना अधिक है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने स्पेक्ट्रम के लिए बहुत ज्यादा आधार कीमत तय की है और कंपनियां कर्ज में डूबी हुई हैं। ऐसी स्थिति में कोई भी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेश करने की स्थिति में नहीं होगा।'

मैथ्यूज ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों का कुल राजस्व 2,084 अरब रुपये है जबकि उन पर कुल 7,500 अरब रुपये का कर्ज है। ट्राई ने स्पेक्ट्रम की जो आधार कीमत तय की है, उससे उद्योग को 5,000 अरब रुपये का और निवेश करना पड़ेगा। यह सरकार की नीति के अनुरूप नहीं है जिसने नई नीति में नई नीति में स्पेक्ट्रम के अधिकतम इस्तेमाल की बात कही गई है जबकि पहले उसका लक्ष्य अधिक से अधिक राजस्व कमाना था।

अगर स्पेक्ट्रम की कीमतों में कटौती भी की जाए तो फिर बड़ी चुनौती कहीं और है। वर्ष 2022 तक देश में पूरे देश में यूनिवर्सल ब्रॉडबैंड सुविधा मुहैया कराने, देश के आधे घरों को फिक्स्ड ब्रॉडबैंड से जोडऩे और दो साल में 50 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित करने के लिए फाइबर की बहुत जरूरत है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन कहते हैं, 'हमारे पास मोबाइल ब्रॉडबैंड को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम है। लेकिन इसमें अहम चुनौती फाइबर की है जिसके बिना ब्रॉडबैंड का प्रसार नहीं हो सकता। साथ ही हमें ब्रॉडबैंड की उपलब्धता के लिए सार्वजनिक स्थानों पर वाईफाई स्थापित करने पर जोर देना होगा। इस मामले में हमारा रिकॉर्ड बहुत खराब है।' दूरसंचार और प्रौद्योगिकी कंपनियां बीआईएफ की सदस्य हैं। 

फाइबर के मामले में भारत दूसरे देशों से बहुत पीछे है। कुछ परियोजनाएं शुरुआती बाधाओं के बाद चल पड़ी हैं। इनमें भारत नेट प्रोग्राम भी शामिल है जिसका लक्ष्य देश की 150,000 ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा से जोडऩा है। इस योजना के समय से पहले दिसंबर में पूरी होने की संभावना है। सरकारी कंपनी बीएसएनएल ने 38,000 से अधिक वाईफाई हॉटस्पॉट शुरू करने के लिए निविदा जारी की है। इनके जरिये पंचायतों को गांव के आसपास के पुलिस थानों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा केंद्रों से जोड़ा जाएगा। सरकार की योजना इस वित्त वर्ष के अंत तक देश में 5 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित करने की है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। देश में फाइबर और जनसंख्या का अनुपात महज 0.1 फीसदी है जबकि चीन में यह 1.8 फीसदी है।

बीआईएफ के आंकड़ों के मुताबिक भारत में केवल 9.9 करोड़ किमी फाइबर है जो चीन के मुकाबले केवल दस फीसदी है। यही वजह है कि देश में अब तक केवल 30 फीसदी टावर ही फाइबर से जुड़े हैं जबकि बाकी माइक्रोवेव पर निर्भर हैं। माइक्रोवेव 4जी के अनुकूल नहीं है और 5जी के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। साफ है कि सबको ब्रॉडबैंड सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य दूर की कौड़ी है। एक किमी फाइबर बिछाने की लागत करीब एक करोड़ रुपये है। यानी पूरे देश में इसका जाल बिछाने के लिए बहुत निवेश की जरूरत है। फाइबर की बदतर स्थिति का मतलब है कि सार्वजनिक स्थानों पर वाईफाई सुविधा देने का लक्ष्य हासिल करना भी लगभग नामुमकिन है। अभी देश में 36,000 व्यावसायिक हॉटस्पॉट हैं। यानी 37,500 लोगों के लिए एक हॉटस्पॉट। नाइजीरिया में 13,800 और दक्षिण अफ्रीका में 3,600 लोगों पर एक हॉटस्पॉट है।

सरकार को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले दो वर्षों में इनकी संख्या 138 गुना बढ़ानी होगी। सीओएआई ने साथ ही कहा कि दूरसंचार कंपनियां अपने कारोबार पर कुल 10,440 अरब रुपये का निवेश कर चुकी हैं और वे हर साल 6-7 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश कर रही हैं। मैथ्यूज ने कहा, 'अगर आप नेटवर्क के विस्तार का मामला लें तो सरकार के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के भुगतान पर फाइबर के लिए 50-60 अरब डॉलर अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी। अगर नीति में इस समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो फिर यह पैसा कहां से आएगा।' 

Keyword: Fiber, Hotspot, Broadban, Communication, Company, WiFi, Spectrum, Digital,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बीमा के लिए एक ही लाइसेंस से कंपनियों को होगा फायदा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.