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बढ़ी ईएमआई चुभ रही तो करें बैलेंस ट्रांसफर, लें प्री-पेमेंट का सहारा

संजय कुमार सिंह /  September 09, 2018

ब्याज दरें कम रहने पर जिन लोगों ने भारी भरकम आवास ऋण ले लिया था, अब उनकी जेब पर ज्यादा बोझ पड़ सकता है क्योंकि आवास ऋण यानी होम लोन पर ब्याज की दरें चढऩा शुरू हो गई हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और आईसीआईसीआई बैंक दोनों ने ही हाल ही में होम लोन पर ब्याज की दरें बढ़ा दी हैं। एसबीआई ने कोष की सीमांत लागत पर आधारित अपनी ब्याज दर (एमसीएलआर) में 20 आधार अंक का इजाफा कर दिया है और उसकी एमसीएलआर अब 8.25 फीसदी से बढ़कर 8.45 फीसदी हो गई है। इसके साथ ही अब एसबीआई से होम लोन लेने वालों को 8.10 से 8.65 फीसदी तक की दर से ब्याज देना होगा। पहले बैंक 7.90 से 8.45 फीसदी तक की दर से ही ब्याज वसूल रहा था। आईसीआईसीआई बैंक ने छह महीने और एक साल की एमसीएलआर में 15 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर दी है।

 
होम लोन की दरें बढऩे से सबसे पहले नए ग्राहकों पर असर पड़ेगा। पुराने ग्राहकों को इसकी तपिश तब महसूस होगी, जब उनकी ब्याज दर बदलने की तारीख नजदीक आएगी। यदि किसी व्यक्ति ने स्टेट बैंक से 15 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का आवास ऋण लिया है तो उसकी मासिक किस्त यानी ईएमआई में ठीकठाक अंतर आ जाएगा। यदि उसके लिए ब्याज दर 7.90 से बढ़कर 8.10 फीसदी हो जाती है तो ईएमआई 1,145 रुपये बढ़ जाएगी। इससे भी बड़ी बात यह है कि यदि उसका कर्ज पूरे 15 साल के लिए चलता है तो उसे बतौर ब्याज ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी। यदि इसके बाद उसकी ब्याज दर कभी नहीं बढ़ी या घटी तो भी 20 आधार अंक की इस बढ़ोतरी की वजह से उसे ब्याज के तौर पर 2,07,827 रुपये अधिक चुकाने पड़ेंगे। बेशक ब्याज दरें एक चक्र में चलती हैं, इसलिए असर कुछ कम हो सकता है। लेकिन कुछ समय के लिए तो परिवारों को इसकी चुभन महसूस होना तय है।
 
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो आम तौर पर बैंक ईएमआई में कोई इजाफा नहीं करते हैं। उसके बजाय वे कर्ज की अवधि बढ़ा देेते हैं। लेकिन आप चाहें तो बैंक से कह सकते हैं कि अवधि बढ़ाने के बजाय ईएमआई में ही इजाफा कर दिया जाए। वास्तव में ईएमआई की रकम बढ़ाना ही बेहतर विकल्प होता है क्योंकि इससे कर्ज की पूरी अवधि के दौरान जाने वाला ब्याज बहुत अधिक नहीं बढ़ता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने 15 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है और उसकी ब्याज दर 7.90 फीसदी से बढ़कर 8.10 फीसदी हो जाती है। अगर वह कर्ज की अवधि को 15 साल से अधिक नहीं होने देता है और उसके बजाय ईएमआई 94,989 से बढ़कर 96,143 रुपये हो जाती है तो पूरी अवधि के दौरान वह ब्याज के तौर पर 2,07,827 रुपये अधिक चुकाएगा। इसके उलट अगर वह ईएमआई नहीं बढऩे देता है और उसके बजाय कर्ज की अवधि बढ़वाने पर राजी हो जाता है तो उसे ब्याज के मद में करीब 4,13,600 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ेंगे।
 
सेबी के पास पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव की सलाह है, 'अगर नकदी की आवक में कोई दिक्कत नहीं है तो अवधि पहले जितनी ही रखें और ईएमआई बढ़वा लें।' जो लोग पहले ही होम लोन ले चुके हैं वे बढ़ती ब्याज दरों से निपटने के लिए कुछ और तरीके आजमा सकते हैं। पहला तरीका है होम लोन की बेहतर ब्याज दर वाला बैंक तलाशना। पैसाबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'जिनका होम लोन चल रहा है, उन्हें देखना चाहिए कि उनका बैंक कितनी दर से ब्याज वसूल रहा है और दूसरे बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ब्याज दर कितनी है। इसके बाद हिसाब लगाना चाहिए कि अगर अपना लोन कम ब्याज दर वाले बैंक या एनबीएफसी के पास ट्रांसफर करा लिया जाए तो कितनी बचत हो सकती है। अब देखना चाहिए कि लोन ट्रांसफर करने में लगने वाला शुल्क इस बचत से कितना कम है। अगर अच्छी खासी बचत हो रही है तो फौरन होम लोन बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प आजमाना चाहिए।' राघव कहते हैं कि जब आपने लोन लिया था, उसके बाद से अगर आपके क्रेडिट स्कोर में बढ़ोतरी हो गई है तो आपको दूसरे बैंकों से कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
 
ब्याज दर बढ़ रही हो तो ब्याज दर को रीसेट करने की अवधि बढ़वाना भी कारगर विकल्प हो सकता है। बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टी का कहना है, 'अगर आपको कर्ज लिए हुए पांच साल से कम अरसा हुआ है तो आप ब्याज दर बदलने यानी रीसेट करने की अवधि बढ़ाकर दो साल तक करवाने की कोशिश कर सकते हैं। इससे आपको लंबे अरसे तक मौजूदा ब्याज दर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।' लेकिन उनका यह भी कहना है कि एमसीएलआर की अवधि बढ़वावने से कुल ब्याज दर में मामूली इजाफा भी हो सकता है। इसलिए कर्ज लेने वाले को फैसला करने से पहले देख लेना चाहिए कि उसका कुल कितना खर्च पड़ रहा है। शेट्टी के हिसाब से ईएमआई के बोझ से बचने का एक और तरीका बीच-बीच में कर्ज का प्री-पेमेंट यानी समय से पहले भुगतान करने रहना है। इसके लिए या तो आपको अधिक बचत करनी पड़ेगी या आप बोनस जैसी अचानक मिली रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जिनका कर्ज कुछ साल में ही पूरा होने जा रहा है, उन्हें प्री-पेमेंट का खयाल छोड़ देना चाहिए और पूरे अरसे तक कर्ज चुकाकर ब्याज में अधिक से अधिक छूट ले लेनी चाहिए।
Keyword: interest, bank, loan, EMI, SBI, ICICI,,
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