बिजनेस स्टैंडर्ड - गाड़ी चलाएं तो उसका बंडल्ड बीमा ही कराएं
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गाड़ी चलाएं तो उसका बंडल्ड बीमा ही कराएं

तिनेश भसीन /  September 09, 2018

वाहन बीमा के जो नियम हाल ही में बदले गए हैं, उससे नए खरीदारों की जेब पर अचानक बोझ पडऩे लगा है। अगर आप हाल-फिलहाल नई कार या दोपहिया खरीदने जा रहे हैं तो नए नियमों के तहत आपको एक साल का बीमा नहीं मिलेगा, बल्कि आपको लंबे समय के लिए ही बीमा लेना पड़ेगा। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय द्वारा सड़क सुरक्षा के मसले पर नियुक्त समिति की सिफारिशें आने के बाद बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि नई कारों पर तीन साल का और नए दोपहिया पर पांच साल का थर्ड पार्टी लायबिलिटी बीमा ही प्रदान करें। ज्यादातर बीमा कंपनियां अभी नए नियमों के मुताबिक बीमा योजनाएं पेश करने की तैयारी ही कर रही हैं, लेकिन कुछ पहले से ही बाजार में ऐसे बीमा कवर उतार चुकी हैं।

 
दोपहिया और कार खरीदारों के पास अब बीमा कवर के मामले में तीन विकल्प होंगे। पहले विकल्प के तहत वे तीन साल के लिए थर्ड पार्टी बीमा कवर ले सकते हैं। लेकिन अगर दुर्घटना में वाहन को नुकसान पहुंचता है तो उसका हर्जाना इस बीमा के तहत नहीं मिलेगा। अगर आप चाहते हैं कि दुर्घटना की सूरत में आपके वाहन की मरम्मत का खर्च भी बीमा कंपनी उठाए तो आपको बंडल्ड बीमा का रास्ता चुनना पड़ेगा। इस बीमा में एक साल के लिए बीमाधारक की कार को होने वाले नुकसान का बीमा होता है और तीन साल के लिए थर्ड पार्टी बीमा होता है। खरीदार चाहे तो तीन साल के लिए कॉम्प्रिहेंसिव बीमा भी चुन सकता है। इसमें थर्ड पार्टी बीमा तो होता ही है, पूरे तीन साल के लिए खरीदार की कार का बीमा भी होता है यानी तीन साल कार को होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा से हो जाती है।
 
हालिया घटनाक्रम को देखते हुए विशेषज्ञों को यही लगता है कि बीमा के जो भी विकल्प हैं, उनमें ऐसा बंडल्ड बीमा लेना सबसे अच्छा रहेगा, जिसमें खरीदार की कार की मरम्मत के लिए केवल एक साल के बीमा का प्रावधान हो। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में मोटर बीमा के प्रमुख सज्जा प्रवीण चौधरी कहते हैं, 'लंबे अरसे के वाहन बीमा के बारे में नियम अब भी बनाए ही जा रहे हैं। उदाहरण के लिए नियामक ने अभी तक यह नहीं बताया है कि नई बीमा पॉलिसी में ग्राहक को कितना नो क्लेम बोनस दिया जाएगा। ज्यादातर बीमा कंपनियां इस समय नो क्लेम बोनस नहीं देने की ही योजना बना रही हैं। जब तक इस मामले में तस्वीर साफ नहीं होती है तब तक बंडल्ड बीमा लेना ही बेहतर होगा।' अगर बीमा कराने वाले व्यक्ति को नो क्लेम बोनस नहीं मिल रहा हो तो लंबी अवधि के लिए कॉम्प्रिहेंसिव बीमा कवर लेना उसके लिए ज्यादा खर्चीला साबित हो सकता है। 
 
बंडल्ड बीमा ही बेहतर
 
जब बीमा पॉलिसियों का हर साल नवीकरण किया जाता है तो नो क्लेम बोनस बहुत काम आता है। यदि बीमाधारक ने पूरे साल में किसी भी तरह का दावा नहीं किया है तो नो क्लेम बोनस के कारण उसका प्रीमियम बहुत कम हो जाएगा। अगर कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी बदल लेता है यानी नई गाड़ी खरीद लेता है तो भी उसे बीमा कंपनी से नो क्लेम बोनस का प्रमाणपत्र मिल सकता है। उसमें इक_ा हुए बोनस का इस्तेमाल वह नई कार के लिए बीमा कराते समय कर सकता है, जिससे उसका प्रीमियम कम हो जाएगा। चूंकि बीमा कंपनियों को बीमा नियामक के नए नियमों के मुताबिक अपनी योजनाएं ढालने के लिए बहुत कम वक्त मिला है, इसलिए उनमें से कुछ कंपनियां पुरानी पॉलिसी में जमा नो क्लेम बोनस को मान ही नहीं रही हैं। कुछ अन्य कंपनियां दावे से जुड़े अपने अनुभवों के मुताबिक नो क्लेम बोनस तय कर रही हैं। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के मोटर बीमा अंडरराइटिंग और मोटर दावा प्रमुख संजय सक्सेना बताते हैं, 'हमने देखा है कि शुरुआती तीन साल में हमारे पास औसतन कितने दावे आते हैं। उन्हीं के आधार पर हमने नो क्लेम बोनस की छूट तय की है।'
 
तीन साल की दीर्घकालिक कॉम्प्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी में किसी व्यक्ति के पास जितना भी नो क्लेम बोनस इक_ा होगा, उसे नवीकरण के समय ग्राहक को दे दिया जाएगा। हां, उसमें यह जरूर देखा जाएगा कि दावा किस साल में किया गया है। अगर ग्राहक पहले या दूसरे साल में बीमा का दावा करता है, लेकिन तीसरे साल में किसी तरह का दावा नहीं करता है तो उसे केवल एक ही साल के लिए नो क्लेम बोनस मिलेगा। लेकिन अगर ग्राहक ने तीसरे साल में दावा किया होगा तो उसका पूरा नो क्लेम बोनस खत्म हो जाएगा। यह बीमा पॉलिसी बेशक कॉम्प्रिहेंसिव होगी, लेकिन बीमा कंपनी हर साल ग्राहक के दावे का हिसाब रखेगी। यदि तीसरे साल में दावा किया गया होगा तो ग्राहक को चौथे साल के प्रीमियम में नो क्लेम बोनस वाली छूट नहीं मिलेगी।
 
महंगे पड़ेंगे डीलर
 
बंडल्ड बीमा योजना को अगर बेहतर बताया जा रहा है तो उसके पीछे एक और पुख्ता कारण है। इसमें बीमाधारक को दूसरे साल में कोई दूसरी बीमा कंपनी चुनने की आजादी भी मिल जाती है। चौधरी बताते हैं कि यदि बीमा पॉलिसी किसी डीलर से खरीदी जाती है तो आम तौर पर वह महंगी पड़ती है। कई बार वाहन डीलर तमाम तरह के सामान पर छूट देकर या मुफ्त सामान देकर खरीदारों को लुभाते हैं या उन पर दबाव डालते हैं कि वे उन्हीं से बीमा पॉलिसी कराएं। चौधरी कहते हैं, 'जो बीमा पॉलिसी आप डीलर से खरीदते हैं, वही अगर कहीं और से खरीदेंगे तो वह 30-40 फीसदी सस्ती पड़ सकती है।'
 
अगर आप अपनी कार को होने वाले नुकसान के लिए एक साल के बीमा और थर्ड पार्टी के लिए तीन साल के बीमा वाली बंडल्ड योजना खरीदते हैं तो आपके पास बाद में अपनी बीमा कंपनी बदलने का विकल्प होगा। इस समय ऐसी कोई भी वाहन बीमा पॉलिसी नहीं है, जो केवल आपकी कार के नुकसान का बीमा करे यानी थर्ड पार्टी बीमा न करे। लेकिन ज्यादातर बीमा विशेषज्ञों को लगता है कि बीमा नियामक जल्द ही इस तरह की बीमा पॉलिसी पेश करने की इजाजत देने वाला है। ऐसा हुआ तो कोई भी व्यक्ति अपनी कार या बाइक को होने वाले नुकसान के लिए किसी भी बीमा कंपनी से पॉलिसी ले पाएगा और गाड़ी खरीदते वक्त उसने किसी अन्य कंपनी से जो थर्ड पार्टी बीमा लिया था, वह भी चलता रहेगा।
 
जेब नहीं होगी हल्की
 
अगर लंबे अरसे के लिए कॉम्प्रिहेंसिव वाहन बीमा लिया जाता है तो उसमें आपको एकमुश्त बड़ी रकम भी चुकानी पड़ेगी। उदाहरण के लिए अगर आप मारुति सुजूकी की कोई कार खरीद रहे हैं तो तीन साल के लिए थर्ड पार्टी बीमा और एक साल के लिए अपनी गाड़ी को होने वाले नुकसान का बीमा एक साथ लेने पर करीब 23,349 रुपये चुकाने पड़ेंगे, जो बीमा घोषित मूल्य (आईडीवी) का करीब 5 फीसदी होगा। लेकिन अगर आप कार के लिए तीन साल का कॉम्प्रिहेंसिव बीमा लेते हैं तो आपको 50,000 रुपये चुकाने पड़ेंगे, जो आईडीवी के 11 फीसदी के बराबर राशि होगी। जाहिर है कि आपकी जेब पर इससे तगड़ी चोट पड़ेगी और इतनी बड़ी रकम के लिए आप बैंक से कर्ज भी नहीं ले सकते क्योंकि कानून के मुताबिक बैंक बीमा प्रीमियम के लिए कर्ज नहीं दे सकते।
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