बिजनेस स्टैंडर्ड - निफ्टी के लिए अगले साल जून का लक्ष्य 11,892
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निफ्टी के लिए अगले साल जून का लक्ष्य 11,892

पुनीत वाधवा /  September 09, 2018

बाजारों में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान कमजोर रुपये के बावजूद तेजी आई है। नोमुरा में भारतीय इक्विटी शोध प्रमुख सायन मुखर्जी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि हालांकि इसकी संभावना नहीं है कि सिर्फ रुपये में मौजूदा गिरावट से बिकवाली बढ़ सकती है, लेकिन इसमें बड़ी गिरावट से मुद्रास्फीति/ मौद्रिक सख्ती बढ़ सकती है जिससे वृद्घि की रफ्तार प्रभावित होगी और इसका असर बाजारों पर भी पड़ेगा। पेश हैं मुख्य अंश:

 
अगले एक साल में प्रमुख सूचकांकों का प्रदर्शन कैसा रहेगा?
 
निफ्टी 50 के लिए हमारा जून 2019 तक का लक्ष्य 11,892 है। भारत के लिए प्रमुख चुनौती में उभरते बाजारों में बिकवाली की आशंका से मूल्यांकन पर जोखिम शामिल है। व्यपार युद्घ जैसे वैश्विक कारक और नकदी को लेकर सख्ती, और वृहद आर्थिक बुनियादी आधार पर दबाव तथा आगामी चुनावों की वजह से राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से उभरते बाजारों में बिकवाली बढ़ सकती है। 
 
लेकिन बाजार बढ़त दर्ज करते दिख रहे हैं क्योंकि बाजार पर 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग की जीत की संभावनाओं का असर दिख चुका है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
अगली सरकार के गठन की दिशा में भाजपा-नीत राजग के एकमात्र सबसे बड़े दल के तौर पर उभरने की संभावना है। इसके अलावा, यह भी ध्यान देने की बात है कि जुलाई 2018 में लोकसभा में आयोजित अविश्वास प्रस्ताव में भाजपा ने कुछ बड़ी गैर-राजग पार्टियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन का दावा किया। इससे विपक्ष की एकता की ताकता पर सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहेगी। यह निश्चित है कि ग्रामीण और समाज के गरीब तबकों पर केंद्रित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और कृषि चिंताओं को दूर करने पर जोर रहेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती से जिन शेयरों को लाभ होने की संभावना है, उनमें महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम), हीरो मोटोकॉर्प, क्रॉम्पटन कंज्यूमर, डाबर और एमऐंडएम फाइनैंशियल सर्विसेज मुख्य रूप से शामिल हैं।
 
आपके हिसाब से अगले 3-6 महीनों में रुपये की स्थिति कैसी रहेगी?
 
रुपया एशिया में सबसे कमजोर प्रदर्शन वाली मुद्रा बन गया है। बढ़ते व्यापार घाटे से भी इसमें गिरावट का जोखिम बढ़ रहा है। चढ़ती तेल कीमतों और निर्मित सामान के बढ़ते आयात की वजह से ऊंचे व्यापार घाटे की पृष्ठभूमि में रुपये में गिरावट की आशंका बनी हुई है। 
 
क्या इससे भारतीय शेयर बाजारों में जोखिम की स्थिति बढ़ सकती है?
 
बाजारों में तेजी आई है क्योंकि मुद्रा-समायोजित बाजार प्रदर्शन इस साल अब तक सकारात्मक है। इसलिए, बाजारों ने रुपये में गिरावट को नकारात्मक नहीं समझा है क्योंकि भारत में वृद्घि की कहानी मजबूत बनी हुई है। इसलिए, ऐसा लगता है कि सिर्फ मुद्रा में गिरावट से बिकवाली को बढ़ावा नहीं मिलेगा। हालांकि ज्यादा गिरावट से अधिक मुद्रास्फीति/मौद्रिक सख्ती को बढ़ावा मिलेगा और इससे वृद्घि की रफ्तार प्रभावित हो सकती है जिसका बाजारों पर भी असर पड़ेगा।
 
मिड- और स्मॉल-कैप पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
 
सापेक्ष आधार पर, कुछ मिड- और स्मॉल-कैप कंपनियों का मूल्यांकन आकर्षक हो गया है और इसलिए, हमारा मानना है कि इनमें से कुछ अवसरों का आकलन करने की जरूरत है। मिड-/स्मॉल-कैप में, हम मजबूत बैलेंस शीट और अच्छे प्रशासनिक मानकों वाली कंपनियों को पसंद कर रहे हैं। लेकिन चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित वृहद आर्थिक परिवेश में मिड-/स्मॉल-कैप में बहुत ज्यादा तेजी की उम्मीद न करें।
 
अगले एक वर्ष के दौरान भारतीय शेयर बाजारों में प्रवाह (घरेलू और विदेशी) की स्थिति कैसी रहने का अनुमान है?
 
हम वैश्विक रूप से बढ़ती दरों की वजह से नकदी पर सख्ती से जुड़ी चिंताओं के बीच विदेशी प्रवाह पर आशंकित बने हुए हैं। जी4 केंद्रीय बैंकों द्वारा संभावित बैलेंस शीट सामान्यीकरण से भी जोखिम पैदा हुआ है। हमारी अर्थशास्त्री टीम ने भविष्यवाणी की है कि वैश्विक तरलता में कमी आनी शुरू होगी। इसकी शुरुआत चालू वर्ष 2018 की चौथी तिमाही से होगी। 
 
पसंदीदा और नकारात्मक सेक्टर कौन से हैं?
 
हम वाहन, वित्त, गैस आपूर्तिकर्ताओं, हेल्थकेयर और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों पर उत्साति हैं। वहीं हमारी कम पसंद वाले क्षेत्रों (अंडरवेट) में कंज्यूमर स्टैपल्स, सीमेंट, तेल पीएसयू, आईटी सेवाएं, बिजली और दूरसंचार शामिल हैं। 
 
क्या वृहद आर्थिक आंकड़ों का कॉरपोरेट आय वृद्घि में योगदान है?
 
हम भारत के वृहद आर्थिक हालात, खासकर मुद्रास्फीति, राज्यों और केंद्र की संयुक्त रजकोषीय स्थिति और बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर सतर्क हैं। हालांकि हम आय वृद्घि सुधार को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। 
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