बिजनेस स्टैंडर्ड - सफर में हमसफर बनती प्रौद्योगिकी
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सफर में हमसफर बनती प्रौद्योगिकी

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली 09 07, 2018

आसान होती राह

बिजनेस स्टैंडर्ड सफर में हमसफर बनती प्रौद्योगिकीप्रौद्योगिकी से जीवन के हर क्षेत्र में बदलाव आ रहा है और परिवहन क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। आप छुट्टियां मनाने के लिए नौका में सवार होकर अंडमान जा रहे हों या व्यस्त समय में ऑफिस जाने के लिए इलेक्ट्रिक बस में बैठे हों, प्रौद्योगिकी के जरिये आप पता लगा सकते हैं कि आपको रास्ते में क्या परेशानी हो सकती है। इतना ही नहीं प्रौद्योगिकी के जरिये इन दिक्कतों को बैठे-बैठे दूर भी किया जा सकता है। इससे किसी ई-बस को ओवरहेड चार्जिंग सिस्टम से जोड़ा जा सकता है और वह भी यात्रा में किसी देरी के बिना। प्रौद्योगिकी लोगों की यात्रा का तरीका बदल रही है और लेकिन यह खुद आने वाले दिनों में बहुत तेजी से बदलने जा रही है।

उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक चार्जर 350 किलोवॉट तक की ऊर्जा पर काम कर सकते हैं। एबीबी का टेरा हाई पावर चार्जर महज आठ मिनट तक चार्ज करने पर किसी इलेक्ट्रिक वाहन को 200 किमी तक दौड़ा सकता है। आने वाले दिनों में परिवहन क्षेत्र में डिजिटल और आईटी टूल्स, क्लाउड आधारित सूचना व्यवस्थाएं और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। जीई ट्रांसपोर्टेशन के एशिया प्रशांत और चीन क्षेत्र के प्रेजिडेंट नलिन जैन ने कहा, 'परिवहन परिसंपत्तियों की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दुनियाभर में डिजिटलीकरण और हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा सेंसरों पर आधारित सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हो रहा है।' एग्रीगेटरों ने प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सक्रिय बस एग्रीगेटर शटल के सह संस्थापक अमित सिंह कहते हैं, 'उपभोक्ता परिवहन व्यवस्था के सुरक्षित, भरोसेमंद, आरामदायक और किफायती होने की अपेक्षा रखते हैं। साथ ही इस तक पहुंच आसान होनी चाहिए और यात्रा तथा इंतजार में कम समय लगना चाहिए।'

परिवहन क्षेत्र में डिजिटल और आईटी का इस्तेमाल बढऩे के कई कारण है। लोगों की यात्रा के तरीकों और वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन में बदलाव आया है। लोग अब परंपरागत ईंधन से इलेक्ट्रिक का रुख कर रहे हैं। एबीबी इंडिया के प्रबंध निदेशक संजीव शर्मा कहते हैं, 'क्लाउड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित प्रौद्योगिकी के जरिये इंटरकनेक्टिविटी से फ्रंट एंड में ऐसे प्लेटफॉर्म बने हैं जहां उपभोक्ताओं को धुआं और प्रदूषण मुक्त परिवहन व्यवस्था मिल रही है। इतना ही नहीं वे चार्जर लोकेशन, रिमोट बिल भुगतान और सर्विसिंग से अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकते हैं।'

बैक एंड में इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड, अक्षय ऊर्जा की अस्थिरता को संतुलित करने और दूर से मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी की जरूरत होगी। शर्मा ने कहा, 'वाहनों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों को यह पता लगाने में सक्षम होना चाहिए कि किसी क्षेत्र विशेष में कितनी बिजली खींची जाए।' भारत में विमानन कंपनियां, मेट्रो और रेलवे आईटी के इस्तेमाल में बहुत आगे हैं। लेकिन अगर उबर को अगले सात साल में अपनी हवाई टैक्सी सेवा शुरू करनी है या मेट्रिनो को सड़क पर वाहनों के साथ-साथ ऊपर चलना है तो फिर इसके लिए बहुत ज्यादा प्रौद्योगिकी टूल्स की जरूरत होगी। 

अलबत्ता देश के अधिकांश हिस्सों में अब भी पुराने जमाने के रिक्शे और बसें चलती हैं। हालांकि छोटे शहरों में भी अब नई प्रौद्योगिकी आ रही है। उदाहरण के लिए कुछ अन्य शहरों की तरह जबलपुर भी अब डीजल के बजाय अब इलेक्ट्रिक रिक्शों का रुख कर रहा है। वहां ई-रिक्शा बैटरी चार्ज करने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेंगे। शर्मा ने कहा कि इनमें सौर इनवर्टर लगे हैं जिन्हें दूर से संचालित कर दिया जा सकता है और मोबाइल ऐप से उन पर नजर रखी जा सकती है। दूर से निगरानी और जांच की व्यवस्था का इस्तेमाल रेलवे लोकोमोटिव और मरम्मत में किया जाएगा। जैन कहते हैं कि भारतीय रेलवे को जीई लोकोमोटिव्स की आपूर्ति की जा रही है जिनमें डिजिटल सुविधा है। उनकी उत्तर प्रदेश के रोजा स्थित मरम्मत केंद्र से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। 

निर्धारित समयसारणी सेवा के लिए विश्वसनीयता बनाए रखना मुश्किल है और यात्री सेवाओं के लिए सुविधाजनक सीट सुनिश्ििचत करना अहम है। सिंह ने कहा, 'आराम और लागत के बीच संतुलन मुश्किल है। हम मांग का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्घिमत्ता का इस्तेमाल करते हैं और उसके मुताबिक बच चलाते हैं।'लंबी दूरी और स्थानीय स्तर पर यात्रा के लिए यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। एग्रीगेटरों के लिए इसका मतलब है चालक का सत्यापन। शटल चेहरे का सत्यापन करती है। सिंह ने कहा, 'यात्री के परिजन और दोस्त किसी भी समय बस का पता लगा सकते हैं। यात्री होमचेक का विकल्प चुन सकते हैं। इसे महिला यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। अगर कोई यात्री यह विकल्प चुनता है तो यह जानने के लिए उसके होम जियोकोड/ आईवीआर का इस्तेमाल किया जाता है कि वह घर पहुंचा या नहीं।' शटल ने अपनी तकनीक विकसित की है और इसे एमेजॉन वेब सर्विसेज पर रखा है। रेल परिवहन में भी सुरक्षा, समय की पाबंदी, नेटवर्क आदि की बहुत अहमियत है। जैन ने कहा, 'विभिन्न तकनीकों के संयोजन से यात्रियों को नया अनुभव मिलेगा और संस्थाओं को परिचालन के तेजी से बदलते समीकरणों के साथ कदमताल का अवसर मिलेगा।'
Keyword: electric, charger, technical,,
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