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कामयाब रही आर-इन्फ्रा की मुद्रीकरण रणनीति

अमृता पिल्लई / मुंबई 09 05, 2018

अनिल अंबानी समूह ने हल्की परिसंपत्ति का मॉडल अपनाया

बिजनेस स्टैंडर्ड कामयाब रही आर-इन्फ्रा की मुद्रीकरण रणनीति

कुछ परिसंपत्तियों की बिक्री के बाद बड़ा सवाल यह है कि इन कंपनियों के बाकी कर्ज के भुगतान व पूंजीगत खर्च के लिए नकदी का प्रवाह पर्याप्त है 

लार्सन ऐंड टुब्रो और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवक्र्स ने भी इस मॉडल को आजमाया लेकिन उनके परिणाम अलग-अलग रहे

जीवीके और जीएमआर जैसी कंपनियों ने ऋण बोझ घटाने में सफल रहीं जबकि लैंको जैसी कंपनियां दिवालिया के कगार पर खड़ी हैं 

अनिल अंबानी ने पिछले हफ्ते रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की आगे की राह के बारे में बताया और इस तरह से संपत्ति के मुद्रीकरण की रणनीति की समाप्ति की सूचना दी। अनिल अंबानी समूह ने जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर, जीवीके पावर ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और लैंको इन्फ्राटेक आदि की तरह हल्की परिसंपत्ति का मॉडल अपनाया।

ऐसा सामान्य तौर पर देखा जाता है कि कारोबार की शुरुआत भारी-भरकम विस्तार योजना के साथ की जाती है जिसमें काफी पूंजी लगती है लेकिन बाद में कंपनी काफी ऋण बोझ तले दब जाती है। ऐसे में यह जरूरी नहीं है कि उसे अधिक मुनाफा हासिल हो।

हालांकि लार्सन ऐंड टुब्रो और आईएलऐंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवक्र्स ने भी इस मॉडल को आजमाया लेकिन उनके परिणाम अलग-अलग रहे। जीवीके और जीएमआर जैसी कुछ कंपनियों ने अपना ऋण बोझ घटाने में सफल रहीं जबकि लैंको जैसी अन्य कंपनियां कम पूंजी वाली रणनीति के बावजूद दिवालिया के कगार पर खड़ी हैं।

 

एक स्वतंत्र सलाहकार एचवी हरीश ने कहा, 'बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्रों में उतरने वाले हरेक समूह का अनुभव भिन्न रहा है। उन्हें वृहत आर्थिक मुद्दों, आंतरिक समस्याओं और परियोजनाओं के लिए शुल्क वसूलने में अक्षमता जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ा है।

उसका कोई समाधान नहीं है लेकिन कंपनियां कम पूंजी के साथ कारोबार के संचालन की रणनीति अपना सकती हैं।' जीएमआर ने नवंबर 2016 में 30 करोड़ डॉलर के एक सौदे के तहत जीएमआर एनर्जी में 30 फीसदी हिस्सेदारी मलेशिया की कंपनी टेनागा नैशनल बेरहाद को बेची थी।

इससे पहले 2013 में जीएमआर हाइवेज ने 2.22 अरब रुपये के एक सौदे के तहत जीएमआर उलंडुरपेट एक्सप्रेसवेज में 74 फीसदी हिस्सेदारी इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (आईआईएफ) को बेची थी। इसके अलावा रणनीतिक ऋण पुनर्गठन (एसडीआर) के तहत राजमुंदरी संयंत्र में 45 फीसदी हिस्सेदारी लेनदारों को देना भी उसकी रणनीति का हिस्सा था।

लैंको की तरह अन्य कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों को भुनाकर लाभ उठाने में विफल रहीं और ऐसे में समूह की चालू एवं निर्माणाधीन सभी परिसंपत्तियां दिवालिया अदालत में जा सकती हैं। जीवीके ने 2017 में 34.92 अरब रुपये के एक सौदे के तहत बेंगलूरु हवाई अड्डा परियोजना में 43 फीसदी हिस्सेदारी फेयरफैक्स ग्रुप को बेच दी थी।  

साल 2016 में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 48 अरब रुपये के सौदे के तहत अपना सीमेंट कारोबार बिड़ला कॉरपोरेशन को बेच दिया था। पिछले सप्ताह अंबानी के नियंत्रण वाली कंपनी ने भी अपना मुंबई वितरण कारोबार अदाणी ट्रांसमिशन को बेचने की घोषणा की जिससे उसे 188 अरब रुपये मिलने की उम्मीद है।

अदाणी ट्रांसमिशन को आरइन्फ्रा के मुंबई वितरण कारोबार बेचने की घोषणा करते हुए रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी परिसंपत्तियों को हल्का करने, अधिक वृद्धि हासिल करने और अधिक लाभांश वाली कंपनी बनने जा रही है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पसंदीदा रणनीति के बजाय कहीं अधिक समय की मांग है। क्रिसिल रिसर्च के निदेशक राहुल पृथियानी ने कहा, 'ऐसेट-लाइट मॉडल तमाम कंपनियों के लिए जरूरत बन चुना है। ऐसेट-हैवी मॉडल में खासकर खस्ताहाल बहीखाते वाली कंपनियों के लिए वित्त पोषण की सीमित गुंजाइश होती है।'

कैपिटालाइन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुछ बुनियादी ढांचा कंपनियों के लिए ब्याज कवरेज अनुपात (आईसीआर) से अच्छी तस्वीर नहीं दिखती है। वित्त वर्ष 2017-18 में जीवीके पावर का आईसीआर 0.77 गुना और जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर का आईसीआर 0.54 गुना रहा था।

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