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जनधन खाते में 60 प्रतिशत जमा जांच के घेरे में

सोमेश झा / नई दिल्ली September 05, 2018

सरकार ने 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद 3.7 करोड़ जनधन खातों में जमा 60 प्रतिशत से ज्यादा राशि को 'संदेहास्पद' पाया है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने दस्तावेजों को देखा है, जिससे पता चलता है कि 8 नवंबर 2016 और 30 दिसंबर 2016 के बीच 3.74 करोड़ जनधन खातों में 42,200 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। जनधन खातों में 4 जनवरी 2017 को कुल जमा 70,000 करोड़ रुपये हो गया था, जिसमें से करीब 60 प्रतिशत जमा राशि संदेहास्पद लेनदेन के माध्यम से जमा राशि का हिस्सा था। काले धन पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट 8 नवंबर, 2016 से वापस लेने की घोषणा की थी और नागरिकों को पुराने नोट जमा करने के लिए 50 दिन का वक्त दिया गया और वे अपने नोट 30 दिसंबर 2016 तक अपने खाते में जमा कर सकते थे। 
 
वित्त सचिव हसमुख अढिया ने पुष्टि की कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को 187 रिपोर्टिंग इकाइयों (इनमें ज्यादातर विभिन्न बैंकोंं की शाखाएं हैं) से 30 एक समय की रिपोर्टें मिली हैं और इनकी जांच चल रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से पूछे गए सवालों का ई-मेल पर भेजे गए जवाब में अढिया ने कहा, 'पहली नजर में इस जमा राशि को अवैध नहीं कहा जा सकता है। सीबीडीटी को जरूरी जांच और उसके बाद की कार्रवाई के लिए सूचनाएं प्राप्त हुई हैं।' सीबीडीटी ने प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत खोले गए खातों या जनधन खातोंं में जमा धनराशि को जमा करने वाले के प्रोफाइल से मिलाना शुरू कर दिया है। अढिया ने कहा, 'ऐसे मामलों में जहां खाते में जमा राशि जमाकर्ता की प्रोफाइल से मिलान नहीं खाती, जांच की जाएगी। उसके बाद जमाकर्ता का दायित्व है कि वह जमा की गई राशि के बारे में साक्ष्य दे।' 
 
इस जमा राशि को तभी नाजायज करार दिया जाएगा जब जांच को न्यायालयोंं द्वारा वैध ठहराया जाएगा। अढिया ने कहा, 'इस प्रक्रिया में वक्त लगेगा।' उन्होंने कहा कि जांच की प्रक्रिया पूरी होने के पहले इन खातोंं को जब्त नहीं किया जाएगा।  नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद 9 नवंबर 2016 तक जनधन खातोंं में कुल जमा राशि 45,600 करोड़ रुपये थी। एक सप्ताह के भीतर जमा 41 प्रतिशत बढ़कर 64,200 करोड़ रुपये हो गई। उसके बाद 7 दिसंबर 2017 तक इन खातों में 74,600 करोड़ रुपये आ गए और नोटबंदी के बाद इन खातोंं मेंं जमा राशि 63 प्रतिशत बढ़ी।  12 नवंब 2016 को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, 'हमें कुछ शिकायतें मिल रही हैं कि जनधन खातों में अचानक धन बढ़ गया है, ऐसे में इनके दुरुपयोग की संभावना है।' 
 
कुछ दिन बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि उसने जनधन खातों मेंं 50,000 रुपये तक जमा करने की सीमा तय कर दी है। इसकी वजह से ऐसे खातों में जमा की वृद्धि दर पर लगाम लग गई। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने पिछले महीने लोकसभा में कहा था कि पीएमजेडीवाई अगस्त 2014 में शुरू की गई थी, जिससे कि देश में बैंकों की पैठ बढ़ाई जा सके। पीएमजेडीवाई के तहत बैंक खाते में न्यूनतम जमा राशि की कोई सीमा नहीं तय की गई है, जिसे अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) दस्तावेजों के साथ खोला जा सकता है। इस साल 29 अगस्त तक पीएमजेडीवाई के तहत  3.26 करोड़ बैंक खातों में 82,100 करोड़ रुपये जमा थे। 
 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2016 के पहले सप्ताह से जनधन खाते से जमाकर्ताओं ने धन निकासी शुरू कर दी थी। जनधन खातों में जमा किए गए धन में लगातार कमी आती गई और यह मार्च 2017 तक गिरकर 63,000 करोड़ रुपये रह गया। 29 नवंबर 2016 को रिजर्व बैंक ने जनधन खातों में से 10,000 रुपये मासिक निकासी की सीमा तय कर दी थी, जिससे पीएमजेडीवाई खाता धारकों को धनशोधन जैसी गतिविधियों से बचाया जा सके। 
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