बिजनेस स?टैंडर?ड - क्यों बढ़ रही हैं मोदी पर किताबें?
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क्यों बढ़ रही हैं मोदी पर किताबें?

साई मनीष /  09 04, 2018

मोदी पर चली कलम

बिजनेस स?टैंडर?ड क्यों बढ़ रही हैं मोदी पर किताबें?पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर नेहरू स्मारक  संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) में किसी तरह के फेरबदल से परहेज करने को कहा था। लेकिन नई दिल्ली के तीन मूर्ति मार्ग पर स्थित इस ऐतिहासिक संग्रहालय में एक तरह की मूक क्रांति हो रही है जिसकी कांग्रेस के शासन में कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा किए गए नेहरू स्मारक पुस्तकालय की सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि इसमें मोदी पर कम से कम 81 पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसमें मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात का संकलन शामिल नहीं है। यह केवल केवल नेहरू पुस्तकालय का ही मामला नहीं है। कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय में मोदी पर 55 से अधिक किताबें हैं।

इनमें से कम से कम 30 विशिष्ट शीर्षक वाली किताबें नेहरू पुस्तकालय में उपलब्ध नहीं हैं। राष्टï्रीय पुस्तकालय देश का आधिकारिक पुस्तकालय है। इसमें मोदी पर उपलब्ध अधिकांश किताबें असमिया और बांग्ला भाषा में तथा इन भाषाओं में अंग्रेजी पुस्तकों की अनुवाद हैं।

बिजनेस स?टैंडर?ड क्यों बढ़ रही हैं मोदी पर किताबें?इनमें से अधिकांश किताबें 2014 के बाद प्रकाशित हुई हैं। मोदी की जिंदगी, उपलब्धियों, सोच और साहित्यिक उपलब्धियों पर करीब 150 पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। ये अनौपचारिक अनुमान हैं क्योंकि इस बात को लेकर कोई अध्ययन नहीं किया गया है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन पर कितना साहित्य प्रकाशित हुआ है। 

एशियन लिटरेरी रिव्यू की सलाहकार संपादक अरुणिमा रॉय कहती हैं, 'चाहे आप उनसे प्यार करें या नफरत, लेकिन इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि देश में मोदी की लहर है। इस लहर में हर कोई गोता लगाना चाहता है। उन पर आई किताबों में तेजी का एक कारण प्रचार भी है।

मोदी उत्सुक हैं और सहीं ढंग से इसे आगे बढ़ा रहे हैं। इन पुस्तकों से जनता के बीच मोदी की बुद्घिजीवी की छवि बनी है।' पैन मैकमिलन इंडिया के संपादकीय निदेशक प्रसून चटर्जी ने कहा, 'हर राजनीति दल के पास अपने नेताओं के प्रचार के लिए मशीनरी होती है। आप उनके नाम पर हवाई अड्डों या सड़कों का नाम रख सकते हैं या किताबें लिख सकते हैं।

अपने जमाने में नेहरू भी बहुत लोकप्रिय थे। उन्हें चाचा नेहरू कहा जाता था और उन पर कविताएं तथा किताबें लिखी गईं। अब भी वैसा ही हो रहा है और मोदी ऐसे समकालीन नेता हैं जो इसमें फिट बैठते हैं। इन दो कारणों से मोदी पर किताबों की संख्या बढ़ रही है।' 

नेहरू स्मारक पुस्तकालय के लिए मोदी से जुड़ी किताबों की संख्या में तेजी आना एक अपवाद है क्योंकि अमूमन इसमें गांधी परिवार से बाहर के नेताओं को ज्यादा तरजीह नहीं मिलती है। उदाहरण के लिए 1991 से 1996 तक पूरे पांच साल तक प्रधानमंत्री रहे कांग्रेस के पी वी नरसिंह राव की जिंदगी, कार्यकाल और उपलब्धियों के बारे में इस पुस्तकालय में केवल 30 किताबें हैं।

भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक और तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी संभवत: गांधी परिवार से बाहर के अकेले प्रधानमंत्री हैं जिन पर मोदी से ज्यादा किताबें हैं।  

नेहरू स्मारक पुस्तकालय के चीफ लाइब्रेरियन अजित कुमार कहते हैं, 'हम भारत के आधुनिक इतिहास के सभी पहलुओं पर ध्यान दे रहे हैं और देश के सभी प्रधानमंत्रियों के जीवन पर प्रकाशित पुस्तकें हमारे पुस्तकालय का हिस्सा होनी चाहिए। पुस्तकालय में आने वाली सभी पुस्तकों के लिए पुस्तकालय समिति के सदस्यों से मंजूरी ली जाती है। हर किताब के लिए यह मंजूरी जरूरी है चाहे वह मोदी पर हो या फिर किसी अन्य प्रधानमंत्री पर।'

इनमें से अधिकांश पुस्तकें (कम से कम 51) मोदी की जिंदगी, संघर्ष, उपलब्धियों, सोच, दर्शन, नेतृत्व और देश को बदलने वाले नेता के रूप में उनके व्यक्तित्व पर हैं। कम से 18 किताबें मोदी की विदेशी नीति पर और मोदी सिद्घांत पर हैं जिसमें उनकी विदेशी नीति की सफलताओं की गाथा है।

इसी तरह पांच किताबें उनकी राजनीति, चुनाव और उनके नेतृत्व में भाजपा की शानदार चुनावी सफलताओं पर हैं। साथ ही कुछ किताबें हिंदू सक्रियता जैसे मुद्दों और गुजरात के मुस्लिमों की राय पर भी है। स्वाभाविक रूप से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर हजारों किताबें हैं जिनमें कई पुस्तकें उन्होंने खुद लिखी हैं।

नेहरू स्मारक पुस्तकालय में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और इंदिरा गांधी पर भी सैकड़ों किताबें उपलब्ध हैं।  जब आप नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी की किताबों पर आप नजर डालेंगे तो आपको दो पहलू नजर आएगा। 2014 से पहले केवल तीन ही किताबें प्रकाशित हुई हैं।  

इनमें 'नरेंद्र मोदी: दि आर्किटेक्ट ऑफ ए मॉर्डन स्टेट' और 'विकास शिल्पी: नरेंद्र मोदी' जैसी किताबें भी हैं जिन्हें पत्रकार और प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष रहे एम वी कामत ने लिखा है जिनका निधन 2014 में हो गया था। इसके अलावा निलांजन मुखोपाध्याय ने 'नरेंद्र मोदी: दि मैन, दि टाइम्स' लिखी है जो किताब 2013 में प्रकाशित हुई।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ये किताबें लाइब्रेरी का हिस्सा कब बनीं। दूसरा पहलू यह है कि मोदी की निजी जिंदगी और चार सालों के कार्यकाल के दौरान देश के सबसे ताकतवर नेता के रूप में उनकी उपलब्धियों से जुड़ी किताबों का दबदबा है। इन किताबों में ज्यादातर जीवनी हैं जो 2015 से 2017 के बीच प्रकाशित हुई हैं।  

नेहरू स्मारक पुस्तकालय में मौजूद किताबें 2015 में प्रकाशित हुई हैं जिनमें विजय जिंदल की '21 लीडरशिप लेसंस फ्रॉम नरेंद्र मोदी', सुदेश वर्मा की 'गेम चेंजर नरेंद्र मोदी: युग प्रवर्तक', एस के मेहरा की 'प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी: ए ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर', किशोर मकवाना की लिखी किताब, 'मोदी: कॉमन मैन्स पीएम', एस सी पीपल की 'नरेंद्र मोदी: दि सन ऑफ सॉइल' और पावनी सिन्हा की 'बीइंग मोदी' शामिल हैं।  

नेहरू स्मारक पुस्तकालय में मोदी की जिंदगी से जुड़ी किताबों की बाद के वर्षों में ज्यादा बढ़ी जब ज्यादा जीवनी और प्रधानमंत्री कार्यालय में उनकी उपलब्धियों से जुड़ी सामग्री प्रकाशित होनी शुरू हुई। हिंदी भाषा में भी मोदी पर कई किताबें प्रकाशित हुईं और फिर इन्हें लाइब्रेरी में रखा गया।

नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी में रखी गईं मोदी पर 2016 में हिंदी भाषा में प्रकाशित किताबों में मनोज चतुर्वेदी की 'नरेंद्र मोदी का सर्वोदय दर्शन', सर्वनन की 'मोदी का विकासनामा' और धर्मेंद्र सिंह की 'ब्रांड मोदी का तिलिस्म: बदलाव की बानगी' शामिल है। 2017 में प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी किताबों की भारतीय बाजारों में बाढ़ आ गई और फिर इन किताबों ने धीरे-धीरे नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी में भी अपनी जगह बना ली।

कैटलॉग पर नजर डालने पर यह अंदाजा होता है कि लगभग एक-तिहाई किताबें 2017 में प्रकाशित हुईं। इनमें से एक किताब अपनी ओर ध्यान आकर्षित करती हैं, वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के अध्यक्ष विवेक देवरॉय और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रेस सचिव अशोक मलिक द्वारा संपादित किताब '70: कैप्चरिंग इंडियाज ट्रांसफॉर्मेशन अंडर नरेंद्र मोदी' है।

वर्ष 2018 में पुस्तकालय को पांच किताबें मिलीं जिनमें भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे द्वारा लिखी 'इनोवेशन रिपब्लिक: गवर्नेंस इनोवेशंस इन इंडिया अंडर नरेंद्र मोदी' शीर्षक वाली किताब प्रमुख है।  

मोदी की निजी जिंदगी के अलावा यहां विदेश नीति और दुनिया से जुड़े उनके नजरिये से भी जुड़ी किताबें हैं। नेहरू स्मारक पुस्तकालय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करती है। इसका मुख्य मकसद देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की स्मृति को संजोये रखना था लेकिन मोदी सरकार इस संग्रहालय को ज्यादा समावेशी बनाने के साथ देश के निर्माण में दूसरे प्रधानमंत्रियों के योगदान का उल्लेख भी चाहती है।
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