बिजनेस स्टैंडर्ड - खुली पेशकश से मिलेगी छूट!
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खुली पेशकश से मिलेगी छूट!

सोमेश झा / नई दिल्ली 09 04, 2018

आईडीबीआई बैंक का मामला

 बिजनेस स्टैंडर्ड खुली पेशकश से मिलेगी छूट!आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी तक हिस्सा खरीदेगी एलआईसी

 अनिवार्य खुली पेशकश पर सेबी से रियायत मांग सकती है एलआईसी

 खुली पेशकश पर छूट देने या नहीं देने का अंतिम निर्णय सेबी का होगा 

 अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए नियुक्त होंगे मर्चेंट बैंकर और कानूनी सलाहकार

सार्वजनिक क्षेत्र के संकटग्रस्त आईडीबीआई बैंक के अल्पांश शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) संभवत: नियामक से छूट की मांग कर सकती है। इसका संकेत आर्थिक मामलों के सचिव और एलआईसी के बोर्ड में सदस्य सुभाष चंद्र गर्ग ने आज दिया।

गर्ग ने कहा, 'एलआईसी खुली पेशकश की संभावना तलाश रही है। इस विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है कि खुली पेशकश में छूट मिलेगी या उसे अनिवार्य तौर पर लाना ही होगा।' आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण योजना की खातिर जरूरी निर्णय के लिए आज नई दिल्ली में एलआईसी के निदेशक मंडल की बैठक की गई।

गर्ग ने कहा कि खुली पेशकश का अंतिम निर्णय भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) करेगा। बैठक के बाद उन्होंने कहा, 'खुली पेशकश से छूट मिलेगी या नहीं, यह निर्णय सेबी को करना है। एलआईसी के निदेशक मंडल ने एक बार फिर 51 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण को मंजूरी दी है।'

सेबी की अधिग्रहण संहिता के अनुसार किसी भी सूचीबद्घ कंपनी में 25 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी के अधिग्रहण को नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी मानी जाती है और इसके लिए संबंधित पक्ष को खुली पेशकश लाना होता है। इसके तहत अधिग्रहण करने वाली कंपनी को मौजूदा शेयरधारकों की अतिरिक्त हिस्सेदारी को खरीदने के लिए अनिवार्य रूप से खुली पेशकश करना होता है।

इसे शेयरधारकों को कंपनी से बाहर निकलने का मौका देना माना जाता है, क्योंकि अधिग्रहण के बाद प्रबंधन में बदलाव होता है और निवेशकों को संभावित जोखिम से बचाव का अधिकार दिया जाता है। 

सूत्रों के अनुसार एलआईसी के निदेशक मंडल ने अधिग्रहण प्रकिया को पूरा करने के लिए एक मर्चेंट बैंकर और कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय किया है। बोर्ड ने एलआईसी को बैंक की जांच-परख करने के बाद विभिन्न नियामकीय मंजूरियां लेने को कहा है।

इस बीच, एलआईसी तरजीही शेयरों के जरिये आईडीबीआई बैंक में अतिरिक्त 7 फीसदी हिस्सेदारी लेने की प्रक्रिया में है। इससे आईडीबीआई बैंक में एलआईसी की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 14.9 फीसदी हो जाएगी। फिलहाल एलआईसी के पास इस बैंक की 7.98 फीसदी हिस्सेदारी है। 

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के बोर्ड ने भी जून में एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 फीसदी करने को मंजूरी दे दी थी। मौजूदा नियमन के अनुसार कोई भी बीमा कंपनी किसी सूचीबद्घ वित्तीय फर्म में 15 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकती है।  

इस साल अगस्त में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संकट में फंसे आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस सौदे में एलआईसी को करीब 110 अरब रुपये (अतिरिक्त 43 फीसदी हिस्सेदारी के लिए) खर्च करने होंगे। आईडीबीआई बैंक में अभी सरकार की 85.96 फीसदी हिस्सेदारी है। जून 2018 को समाप्त तिमाही में बैंक को 24 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ था।

Keyword: IDBI bank, LIC, NPA, share, SEBI, Open Offer, Merchant Banker, Shareholder, Public sector, Regulator,
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