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दिवालिया प्रक्रिया के दायरे में लैंको की प्रमुख परिसंपत्तियां

बी दशरथ रेड्डी / हैदराबाद September 03, 2018

भारी ऋण बोझ से जूझ रहे लैंको ग्रुप की लगभग सभी चालू एवं निर्माणाधीन बिजली परिसंपत्तियां ऋण शोधन ट्रिब्यूनल में जा सकती हैं क्योंकि लेनदार निर्धारित समय-सीमा के भीतर शेष तीन बड़ी परियोजनाओं के लिए किसी समाधान को अंतिम रूप देने में विफल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ट्रिब्यूनल से बाहर समाधान के लिए अंतिम समय सीमा 27 अगस्त निर्धारित की थी। कंपनी के एक वरिष्ठï अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'आरबीआई की ओर से 12 फरवरी को जारी परिपत्र के अनुसार, लैंको कोंडापल्ली (33 अरब रुपये), लैंको अनपरा (60 अरब रुपये) और लैंको विदर्भ (45 अरब रुपये) के कुल 200 अरब रुपये से अधिक के बड़े ऋण खातों के समाधान के लिए 27 अगस्त तक 180 दिनों का समय दिया गया था। आगामी दिनों में इन परिसंपत्तियों को भी नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के समक्ष भेजा जाना चाहिए।'

 
कुछ समय पहले जून में ऐक्सिस बैंक ने 1,500 मेगावॉट वाली लैंको कोंडापल्ली परियोजना को रणनीतिक ऋण पुनर्गठन (एसडीआर) के प्रावधानों के तहत बिक्री के लिए रखा था। सूत्रों के अनुसार, लैंको की गैर-बिजली सहायक इकाई में लेनदारों द्वारा 51 फीसदी हिस्सेदारी लिए जाने के बाद ऐक्सिस बैंक ने यह पहल की थी। हालांकि इस परिसंपत्ति के लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) भी प्राप्त कर लिए गए थे लेकिन 27 अगस्त की समय-सीमा खत्म होने तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। लैंको अनपरा पावर लिमिटेड उत्तर प्रदेश में 1,200 मेगावॉट की चालू बिजली क्षमता वाली परियोजना है। वह कुछ वर्ष पहले राज्य बिजली यूटिलिटीज के साथ पीपीए को लेकर मुकदमेबाजी शुरू होने के बाद से ही बैंकों की ऋण अदायगी में चूक करती रही है। हालांकि लेनदारों ने बकाये की वसूली के लिए अब तक कोई खास कार्रवाई नहीं की है क्योंकि उन्हें अनपरा मामले में कंपनी और डिस्कॉम के बीच सुलह होने की उम्मीद थी। इसी प्रकार 1,320 मेगावॉट की लैंको विदर्भ थर्मल पावर लिमिटेड निर्माणाधीन रह गई जिसका कोई लेनदार नहीं मिला।
 
लैंको समूह का कुल ऋण बोझ 500 अरब रुपये से अधिक है। समूह की चार सहायक इकाइयों- लैंको इन्फ्राटेक (110 अरब रुपये), लैंको अमरकंटक (110 अरब रुपये), लैंको बाबंध (67 अरब रुपये) और लैंको तीस्ता पावर (27 अरब रुपये)- फिलहाल ऋण शोधन प्रक्रया का सामना कर रही हैं। इस श्रेणी में अन्य तीन परियोजनाओं के आने पर समूह के कुल 500 अरब रुपये के ऋण में से करीब 410 अरब रुपये के ऋण ऋण शोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) 2016 के तहत आ जाएंगे। लैंकों के पोर्टफोलियो में कुल 3,456 मेगावॉट क्षमता की स्थापित बिजली परिसंपत्तियों के अलावा 4,536 मेगावॉट क्षमता की निर्माणाधीन बिजली परिसंपत्तियां शामिल हैं।
 
कंपनी के लिए समस्याओं की शुरुआत गैस बिजली इकाइयों के लिए फीड स्टॉक की किल्लत से हुई थी। इन गैस बिजली इकाइयों से उत्पादित बिजली के एक उल्लेखनीय हिस्से के लिए कोई पीपीए नहीं था। कंपनी को तगड़ा झटका उस दौरान लगा जब वह अपनी बड़ी तापीय बिजली परियोजनाओं को पूरा करने में विफल रही। इन्हीं परियोजनाओं में अमरकंटक और बाबंध परियोजना भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरे न होने से लागत बढ़ती गई जो कंपनी के लिए एक बड़ी समस्या बन गई। इसके बाद ऋण चुकाने की क्षमता पर संदेह करते हुए बैंकों ने कंपनी को अतिरिक्त ऋण देने से इनकार कर दिया।
 
साल 2016 के अंत तक लैंको की निर्माणाधीन तापीय बिजली परियोजनाओं की औसत लागत 9 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट के पार पहुंच गई जबकि अधिकतम 6 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट लागत को ही स्वीकार्य माना जाता था। इसके अलावा बिजली कीमतों में नरमी से इन संकटग्रस्त परियोजनाओं की समस्या कहीं अधिक बढ़ गई। लैंको साल 2012-13 से घाटा दर्ज करने लगी जबकि उस दौरान उसका सकल राजस्व 152 अरब रुपये के अधिकतम स्तर तक पहुंच चुका था। ऋण शोधन चरण के बाद कंपनी का राजस्व घटकर करीब 15 अरब डॉलर रहने की उम्मीद की जा रही है।
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