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तय करनी है छोटी दूरी तो अपनी कार क्या वाकई है जरूरी?

तिनेश भसीन /  September 02, 2018

नई दिल्ली में एक वाहन कंपनी में काम करने वाली एकता शैलेंद्र ने हाल में अपनी कार इसलिए बेच दी क्योंकि अब वह टैक्सी एग्रीगेटरों की सेवाएं लेने लगी हैं और इस वजह से उनकी गाड़ी इस्तेमाल नहीं होती है। एकता ने कहा, 'मैंने पिछले 6 महीनों में मुश्किल से ही कभी इसका इस्तेमाल किया है, लेकिन मुझे इसकी सर्विस और पार्किग पर पैसा खर्च करना पड़ा।' इसके अलावा कुछ लोग समीर शर्मा जैसे हैं, जो कार खरीदना ही नहीं चाहते हैं। उनका तर्क भी वैसा ही है। शर्मा कहते हैं, 'मैं हमेशा कार किराये पर ले सकता हूं तो मुझे क्यों कार खरीदने पर पैसा खर्च करना चाहिए और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र एवं समय पर बीमा खरीदने की सिरदर्दी मोल लेनी चाहिए।' ऐसा लगता है कि यह ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं और ग्राहकों दोनों के ही लिए फायदेमंद है। हाल में ओला के सीईओ भावीश अग्रवाल ने कहा था कि कंपनी परिचालन लाभ में आ गई है और यह भारत में हर उस राइड पर कमाई कर रही है, जो वह मुहैया कराती है। 

 
इन टैक्सी एग्रीगेटरों ने तय दूरी के आधार पर किराये की दरें कम तय की हैं। उदाहरण के लिए मुंबई में अगर कोई व्यक्ति 7 किलोमीटर का सफर करता है तो उसे माइक्रो-सेगमेंट की कार इस्तेमाल करने के लिए 145 रुपये का निश्चित किराया चुकाना होता है। यह किराया 12 किलोमीटर तक के लिए 205 रुपये और 20 किलोमीटर तक 305 रुपये तक है। ओला में उपाध्यक्ष (किराया एवं कॉरपोरेट वितरण) राहुल मारोली ने कहा, 'हम कैब का इस्तेमाल बढऩे पर ग्राहकों के लिए सफर को और किफायती बना सकते हैं।' उबर के भी लगभग इतने ही किराये हैं, जिसका फ्लैट किराया 139 रुपये से शुरू होता है।  अब बहुत से लोग रोजाना आने-जाने और बैठकों के लिए इन ऐप आधारित टैक्सी के इस्तेमाल को तरजीह देते हैं, जबकि अपनी कार का इस्तेमाल परिवार के साथ सप्ताह के अंत में करते हैं। 
 
कार रखना हुआ महंगा 
 
खुद की कार खरीदना और इसे चलाना अमूमन महंगा पड़ता है। अन्स्र्ट ऐंड यंग के आंकड़े दर्शाते हैं कि अगर कोई व्यक्ति एक दिन में 50 किलोमीटर का सफर तय करता है तो खुद की कार से आना-जाना ज्यादा महंगा पड़ेगा, भले ही व्यक्ति कार खुद चलाए। अगर आप एक दिन में 20 किलोमीटर का सफर तय करते हैं और गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर भी रखते हैं तो यह ऐप आधारित टैक्सी लेने के मुकाबले तीन गुना ज्यादा महंगा पड़ेगा।   अगर आप सामान्य किराये के 1.3 गुना सर्ज कीमत पर भी टैक्सी लेते हैं तो यह ज्यादा किफायती पड़ेगी। कार का मालिक बनने की कुल लागत में व्यक्ति द्वारा वाहन ऋण पर चुकाई जाने वाली ब्याज लागत, ईंधन एïवं मरम्मत का खर्च, बीमा, पार्किंग और कुछ वर्षों बाद कार को बदलना शामिल है। 
 
अगर आप रोजाना 50 किलोमीटर से 100 किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं तो आपका कार खरीदना तर्कसंगत बन जाता है। इस स्थिति में अपनी कार से आना-जाना ऐप आधारित टैक्सी की तुलना में सस्ता पड़ता है।  ईवाई इंडिया में पार्टनर और ऑटोमोटिव सेक्टर लीडर राकेश बत्रा ने कहा, '20 किलोमीटर तक की कम दूरी के लिए खुद की कार के बजाय ऐप आधारित टैक्सी लेना 67 फीसदी सस्ता पड़ता है। ऐप आधारित टैक्सी 50 किलोमीटर की दूरी के लिए 39 फीसदी सस्ती पड़ती है। कार खरीदने की लागत, कार को कुछ साल बाद बदलने की लागत, ईंधन की लागत, मरम्मत और चालक को वेतन को मद्देनजर रखते हुए आपको एक दिन में जितनी कम दूरी तय करनी होगी, उतना ही ज्यादा आपके लिए ओला और उबर जैसी राइड हेलिंग सेवाएं लेना तर्कसंगत होगा।'
 
लागत में और कमी 
 
अगर व्यक्ति टैक्सी साझा करता है तो यात्रा की कुल लागत और कम हो सकती है। इन ऐप आधारित टैक्सी ने हाल में साझा सवारी के लिए 'राइड पास' शुरू किया है। ओला साझा सवारी के लिए 24 किलोमीटर तक का 209 रुपये फ्लैट किराया वसूलती है। अगर व्यक्ति खुद के लिए ही पूरी कैब बुक करता है तो उसे 20 किलोमीटर तक के सफर के लिए 305 रुपये चुकाने होंगे। मेरू के सीईओ नीलेश संगोई ने कहा, 'बहुत कम कार मालिक रोजाना लंबी दूरी (75 से 100 किलोमीटर) तय करते हैं। यहां तक कि उनके लिए भी इतनी लंबी दूरी तक कार चलाने में होने वाली थकान कैब सेवा के इस्तेमाल को ज्यादा आकर्षक बना देती है।' 
 
लेकिन साझा सवारी में ज्यादा समय लगता है क्योंकि कैब को कई ग्राहकों को लेना या छोडऩा पड़ता है। इसी वजह से ज्यादातर लोग साझा सवारी के बजाय पूरी तरह अपने लिए ही कैब बुक करने को तरजीह देते हैं। मारोली ने कहा, 'साझा सवारी का खंड ग्राहक के पूरी टैक्सी खुद के लिए बुक करने और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सड़क से यात्रा करने के बीच में आता है। इसमें अकेले यात्रा करने की तुलना में ज्यादा समय लगता है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन से कम लगता है।' इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के नागरिक अभियांत्रिकी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष वर्मा ने कहा, 'लोगों ने केवल यात्रा की लागत से ही ऐप आधारित टैक्सी को अपनाना शुरू नहीं किया है। इसकी वजह यातायात के हालात भी हैं। लोग भीड़-भड़ाके में गाड़ी चलाने का तनाव मोल नहीं लेना चाहते हैं। कार चालक होने से यात्री अन्य महत्त्वपूर्ण चीजों पर ध्यान देते हैं।'
Keyword: car, cab, taxi,,
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