बिजनेस स्टैंडर्ड - तीन महीने में 300 अरब रुपये के पार पहुंचे पुनर्खरीद ऑफर
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तीन महीने में 300 अरब रुपये के पार पहुंचे पुनर्खरीद ऑफर

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा /  September 02, 2018

पिछले तीन महीनों में लगभग एक दर्जन कंपनियों द्वारा पुनर्खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने से इक्विटी शेयरों की पुनर्खरीद में तेजी आई है। निफ्टी-50 की तीन कंपनियों - टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज - समेत 13 कंपनियों ने जून से 309 अरब रुपये के शेयर पुनर्खरीद प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। कैपिटालाइनप्लस के आंकड़ों के अनुसार एम्फेसिस, डीसीएम श्रीराम, जस्ट डायल, इक्रा, नवनीत एजूकेशन और मैकलॉयड रसेल ने भी पुनर्खरीद प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की। 

 
इनमें से सात कंपनियों ने टेंडर रूट के जरिये पुनर्खरीद की घोषणा की है जिसके तहत फिक्स प्राइस टेंडर ऑफर का इस्तेमाल कर पुनर्खरीद की जाती है। खुली बाजार खरीद में कंपनी श्रेष्ठ कीमत पर बाजार से शेयर खरीदती है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार मौजूदा कैलेंडर वर्ष 2018 में अब तक 38 कंपनियों ने पुनर्खरीद विकल्प के जरिये 54.89 अरब रुपये के शेयर खरीदे हैं। वर्ष 2017 में कुल 50 कंपनियों ने 553 अरब रुपये मूल्य के शेयर खरीदे थे जबकि वर्ष 2016 में 37 कंपनियों ने पुनर्खरीद विकल्प के जरिये 279 अरब रुपये के शेयर खरीदे।
 
हालांकि शेयर पुनर्खरीद से कंपनी का व्यवसाय प्रभावित नहीं होता है, लेकिन इसका कुछ हद तक वित्तीय प्रभाव पड़ता है क्योंकि इससे नकदी और उसके बहीखाते में शेयरों की संख्या में कमी आती है। इसके परिणामस्वरूप, ईपीएस (प्रति शेयर आय) बढ़ जाती है। विश्लेषकों का कहना है कि शेयर पुनर्खरीद भारी-भरकम लाभांश चुकाने के बजाय शेयरधारकों को लाभान्वित करने का बेहतर तरीका है, क्योंकि लाभांश भुगतान कर दायरे से जुड़ा होता है। कानूनी अनिवार्यता की वजह से 10 लाख रुपये से अधिक की लाभांश आय पर लोगों, हिन्दू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ), या भागीदार कंपनियों और निजी ट्रस्टों को 10 प्रतिशत का कर चुकाना पड़ता है। 
 
आईडीबीआई कैपिटल में शोध प्रमुख ए के प्रभाकर का कहना है, 'कंपनियां कर से बचने के लिए पुनर्खरीद का सहारा ले रही हैं। जहां वे कॉरपोरेट कर से पहले से ही जुड़ी हुई हैं, वहीं एक खास सीमा से ऊपर लाभांश पर भी कर लगता है। इस तरह से, अधिक नकदी वाली कंपनियों के लिए यह कर-किफायती तरीके में शेयरधारकों को लाभान्वित करने का अच्छा विकल्प है। यह खुदरा निवेशकों और कंपनियों, दोनों के लिए फायदेमंद है।' टीसीएस ने 160 अरब रुपये की शेयर पुनर्खरीद की घोषणा की है जो उसकी शेयर पूंजी के लगभग 2 फीसदी के बराबर होगी। दो वर्षों में कंपनी की यह दूसरी शेयर पुनर्खरीद है। पिछले साल कंपनी ने लगभग 160 अरब रुपये की शेयर पुनर्खरीद की थी। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी ने अब 2100 रुपये प्रति शेयर के भाव पर लगभग 7.6 करोड़ शेयर पुन: खरीदने की योजना बनाई है। एडलवाइस में सहायक निदेशक एवं शोध प्रमुख विनय खट्टर का कहना है, 'कंपनियां निवेश लायक अवसरों के अभाव में शेयरधारकों को नकदी लौटा रही हैं। उदाहरण के लिए, लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) भी इस श्रेणी में शामिल है। ऐसे मामलों में, आगामी नकदी जरूरत बहुत ज्यादा नहीं होती है और इस वजह से कंपनी को नकदी लौटाना ही समझदारी भरा निर्णय होता है। इसकी अन्य वजह यह है कि वे बाजार कारोबारियों को यह संकेत देना चाहती हैं कि उनके शेयर की वैल्यू में कमी आई है।'  एलऐंडटी ने पिछले सप्ताह 1500 रुपये प्रति शेयर की अधिकतम कीमत पर लगभग 90 अरब रुपये की शेयर पुनर्खरीद योजना को मंजूरी प्रदान की। वहीं जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स ने भी पुनर्खरीद प्रस्ताव पर विचार किया है। 
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