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ऑनलाइन स्ट्रीमिंग शो की लत से बढ़ते कारोबारी मौके

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  September 02, 2018

नेटफ्लिक्स, एमेजॉन और वूट जैसे ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री की प्रचुरता क्या आपको बीमार बना रही है? क्या आप इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद तमाम पुरस्कृत कार्यक्रमों और फिल्मों को देखने के बजाय सर्फिंग में ही अपना वक्त जाया कर रहे हैं? क्या आप उन दिनों की वापसी चाहते हैं जब टेलीविजन पर कोई कार्यक्रम इधर-उधर चहलकदमी करते हुए देखते थे और विज्ञापन आने पर दूसरे काम करने लगते थे? क्या आप खुद को नशे के आदी शख्स की तरह मानते हैं जो बेहद तल्लीनता से कार्यक्रम देखता है और उसके खत्म होने के बाद असहज करने वाली सुस्ती महसूस करता है? 

 
ऐसे ही सवालों का सामना खांडेकर परिवार भी कर रहा है। यह परिवार टीवी की मौजूदगी वाले 18.7 करोड़ घरों में रहने वाले उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो अब मनोरंजन के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का रुख कर चुके हैं। कुछ समय पहले हमने एक स्मार्ट टीवी खरीदा था। मई में नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो की भी सेवाएं लेनी शुरू कर दी थीं। जून आते-आते मैं स्ट्रीमिंग सेवाओं की आदी हो चुकी थी। पहले मैंने एमेजॉन प्राइम वीडियो पर डाउन्टन एबे शो देखना शुरू किया और फिर देखते-ही-देखते 52-52 एपिसोड वाले सभी छह संस्करण देख डाले। यह सिलसिला पूरे जून और जुलाई के भी शुरुआती दिनों तक चला। केवल एक एपिसोड देखकर रुक जाना असहनीय लगता था। मैं काम से छुट्टी कर लेती थी, ऑफिस से घर जल्दी आ जाती थी और देर रात तक डाउन्टन एबे के तीन-चार एपिसोड रोजाना देख ही लेती थी। डाउन्टन देखने का लालच अभी खत्म भी नहीं हो पाया था कि सेक्रेड गेम्स ने दस्तक दे दी। इस शो के आठों एपिसोड दो दिन में देख डाले। उसके बाद पति के साथ मैंने ये सारे एपिसोड दोबारा देखे। जुलाई मध्य तक इसका नतीजा यह हुआ कि मैं जिन दो पुस्तकों पर काम कर रही थी उनका काम काफी पीछे हो चुका था।
 
ऐसे में मैंने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से तौबा करने का मन बनाया लेकिन केवल दो दिन तक ही इस पर कायम रह पाई। ब्रिटेन के शाही परिवार पर आधारित शानदार शो 'द क्राउन' ने मुझे अपने संकल्प पर दृढ़ नहीं रहने दिया। एक घंटे की अवधि वाले 20-20 एपिसोड के दो संस्करण देखने के बाद मेरी हालत दीवानों जैसी हो चुकी थी। अब मैं क्या देखूंगी? कई घंटों तक इंटरनेट पर सर्फिंग करने के बाद मैंने अपने दो पुराने पसंदीदा शो द ग्राहम नॉर्टन शो और जॉन ओलिवर के कई क्लिप देख डाले। उसके बाद शरलॉक के सारे संस्करण को नौंवी बार देखा।
 
इस लालची प्रवृत्ति के बाद मेरे भीतर इससे छुटकारा पाने की चाह जगी। मैंने ऑनलाइन जाकर यह पता करने की कोशिश की कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार कार्यक्रम देखने वाले लोग कैसा महसूस कर रहे हैं? क्या उनकी भी आंखें ऑनलाइन गेम खेलने के आदी लोगों की तरह चमकती रहती हैं? कई लेखों में कहा गया है कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की लत के कारण लोगों के मस्तिष्क और संवेदनाओं पर भी असर पड़ रहा है। कई अनुसंधानों और उन पर आई टिप्पणियों से यह भी पता चलता है कि इन प्लेटफॉर्म पर स्तरीय सामग्री की अधिकता होने से हम सभी सुपर सर्फर में तब्दील हो चुके हैं। इतने सारे ऑनलाइन कार्यक्रम उपलब्ध हैं कि हमारा बहुत सारा समय यही तय करने में बीत जाता है कि क्या देखें? दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए बनाई गई सामग्री की भरमार है और यह अचानक नहीं आता है। मसलन, नेटफ्लिक्स आपके पहले देखे जा चुके शो को ध्यान में रखते हुए नए कार्यक्रमों की सलाह देता है। ऐसे में आपको अपनी पसंद के तय ढांचे के बाहर निकलने के लिए उससे बाहर जाकर तलाश करनी होगी।
 
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर आप अधिक वक्त बिताने के लिए मजबूर हो जाते हैं लेकिन उससे थकी आंखों और दिमाग के अलावा हासिल क्या होता है? दुनिया के सबसे बड़े स्टूडियो का तमगा हासिल कर चुके नेटफ्लिक्स ने वर्ष 2017 में अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद उपभोक्ताओं के लिए 82 फिल्में और 700 नए शो मुहैया कराया था। ये सभी सामग्री या तो दूसरे निर्माताओं से खरीदी गई थी या फिर नेटफ्लिक्स ने खुद उनका निर्माण किया था। अधिकांश स्टूडियो साल भर में औसतन आठ से लेकर 20 फिल्में तक ही बनाते हैं। अगर भारत की बात करें तो वर्ष 2018 में तमाम टीवी चैनलों पर अभी तक करीब 280 नए शो शुरू किए जा चुके हैं। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के आंकड़े बताते हैं कि यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। मीडिया पार्टनर्स एशिया की जुलाई में जारी रिपोर्ट कहती है कि भारत में पिछले साल टेलीविजन, ओटीटी और फिल्मों को मिलाकर करीब 4.2 अरब डॉलर खर्च किए गए थे। वर्ष 2017 में इन तीनों माध्यमों ने संयुक्त रूप से 12-13 अरब डॉलर का राजस्व कमाया। कार्यक्रम निर्माण पर खर्च जैसे-जैसे बढ़ेगा, कमजोर खिलाड़ी बाहर होते जाएंगे। यह इस कारोबार का निहितार्थ है।
 
उपभोक्ता व्यवहार के बारे में पूर्वानुमान लगाने के लिए हमें 2017 में मीडिया के सबसे हिट उत्पाद 'कारवां' पर नजर डालनी होगी। असल में यह पुराने मर्फी रेडियो की शक्ल वाला एक ब्लूटूथ स्पीकर है जिसमें 5,000 पुराने गाने अपलोड हैं। चलाने में बेहद आसान इस उत्पाद के साथ सारेगामा ने आईपॉड को तगड़ी टक्कर दी। अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच सारेगामा ने कारवां के 3.87 लाख इकाइयां बेचीं जिससे उसे अपनी कुल राजस्व का आधा हिस्सा मिला। कारवां की कामयाबी खुद के प्रति आसक्त ऑनलाइन वीडियो कारोबार को यह दिखाता है कि आकस्मिकता और आराम फरमाने वाले अहसास पर भी गौर किया जाना चाहिए।  दर्शक जब मनोरंजन के इरादे से बैठते हैं तो वे अपनी पसंद का दायरा बढ़ाने को भी तैयार होते हैं। ऐसे में दर्शकों की पसंद या तो पीछे की ओर जाएगी या नया मुकाम हासिल करेगी। लेकिन कोई भी ऐसा पैमाना नहीं है जो बता सके कि आगे क्या होगा?
Keyword: online, video, नेटफ्लिक्स, एमेजॉन और वूट ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म,
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